Bihar Assembly Polls: पहली बार राजद के पोस्टर-होर्डिंग से गायब हुआ लालू यादव, जानें क्या है रणनीति

  • Bihar Assembly Polls के बीच राष्ट्रीय जनता दल के पोस्टर-होर्डिंग से गायब हुआ लालू प्रसाद यादव
  • इतिहास में पहली बार नहीं दिख रहा लालू यादव का चेहरा
  • आरजेडी की इस रणनीति ने विरोधियों की बढ़ाई चिंता

By: धीरज शर्मा

Published: 21 Sep 2020, 02:05 PM IST

नई दिल्ली। बिहार चुनाव ( Bihar Assembly Polls ) जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है। राजनीतिक दलों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। जेडीयू बीजेपी गठबंधन जहां दोबारा सत्ता में वापसी के लिए सौगतों की बारिश के साथ आगे बढ़ रहा है वहीं विपक्ष में बैठा राष्ट्रीय जनता दल भी इस बार बदले हुए अंदाज में चुनावी मैदान में है। राष्ट्रीय जनता दल ( RJD ) के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चुनावी अभियान के दौरान लगाए जा रहे पोस्टरों से गायब हैं।

यानी इस बार राजद लालू प्रसाद यादव के चेहरे और नाम पर जनता के बीच नहीं जा रही है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसके पीछे भी आरजेडी की कोई बड़ी रणनीति है, जिसके सहारे वो चुनावी नैया पार करना चाहती है।

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नई सोच, युवा सरकार
बिहार में इन दिनों चुनावी तैयारियों का शोर ज्यादा सुनाई दे रहा है। राष्ट्रीय जनता दल सत्ताधारी नीतीश सरकार पर जहां लगातार हमले बोल रही है वहीं जनता के बीच जाने के लिए सड़कों पर जो होर्डिंग या पोस्टर लगाए जा रहे हैं उसमें से अपने चहीते नेता और सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को ही गायब कर दिया गया है।

हालांकि रैलियों को सभाओं में राजद नेता लालू प्रसाद यादव का नाम लेना या उनकों को कामों का बखान करना नहीं भूलते। ऐसे में भला पोस्टरों से उनका नदारद होने की क्या वजह हो सकती है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसके पीछे राजद की चुनावी रणनीति है, जो चाहती है कि वे जनता के बीच नई सोच युवा सरकार का संदेश दे। यही वजह है कि पोस्टरों में तेजस्वी यादव को ज्यादा हाइलाइट किया जा रहा है।

दो सीधे संदेश
इससे दो बातों का सीधा संदेश जा रहा है। पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी और नाराज सदस्यों को ये संदेश कि पार्टी में अब आगे भविष्य तेजस्वी के साथ ही है।

वहीं दूसरा संदेश ये कि अब जनता के बीच पार्टी नई सोच के साथ युवा सरकार बनाने का संदेश दे रही है। जो युवाओं के लिए सोचेगी भी और काम भी करेगी।

स्थानीय मुद्दों में राजद बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रमुखता से उठा भी रही है। तेजस्वी यादव कोरना और बाढ़ से हुई बेहाली के साथ-साथ नीतीश सरकार पर बेरोजगारी का बड़ा ठीकरा भी फोड़ रहे हैं।

लालू की ही चाल
राजनीति दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार लालू प्रसाद यादव इतनी आसानी से इस चुनाव को निकलने नहीं दे सकते। जानकारों की मानें तो पोस्टरों से हटना उन्हीं की नई चाल का हिस्सा हो सकता है। ऐसा कर तेजस्वी अपने घरेलू विरोध को खत्म कर देने की कोशिश कर रहे हैं।

यही वजह है कि पोस्टरों पर 'नई सोच नया बिहार, युवा सरकार अबकी बार..’ जैसे संदेश लिखे जा रहे हैं। हालांकि पोस्टरों में सिर्फ तेजस्वी के चेहरे पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि लालू ने इन पोस्टरों में बड़े बेटे तेज प्रताप को जगह नहीं दी है। आपको बता दें कि कुछ बातों में पहले ही तेज प्रताप अपने वर्चस्व को लेकर पार्टी की परेशानी बढ़ा चुके हैं।

हालांकि चुनाव में राजद का एक संदेश तो साफ नजर आ रहा है, तेजस्वी के बहाने पार्टी युवाओं को लुभाने में जुटी है।

राजद में नए युग की शुरुआत
बिहार की चुनावी बिसात में लगे तेजस्वी यादव के पोस्टरों ने राजद में एक नए युग का आगाज कर दिया है। लालू प्रसाद वैसे भी जेल में हैं और स्वास्थ्य से जूझ रहे हैं। ऐसे में पार्टी का वजूद अब उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव पर निर्भर है। इसकी झलक लालू यादव ने चुनावी अभियान के जरिए साफ भी कर दी है।

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धीरज शर्मा
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