मानसून सत्रः अविश्वास प्रस्ताव पर पीएम मोदी का करारा पलटवार, पढ़िए हर मुद्दे पर एक-एक बात

मोदी सरकार के चार सालों में 20 जुलाई की तारीख सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए बेहद अहम रही ।

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Updated: 20 Jul 2018, 10:53 PM IST

नई दिल्ली। मोदी सरकार के चार सालों में आज सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए बेहद बड़ा दिन है। विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा हुई है। हालांकि टीडीपी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की बजाए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का आंख मारना, पीएम को इशारा करके गले लगना ज्यादा चर्चा में रहा। राफेल डील को लेकर भी सवाल उठे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष की ओर से लगाए गए तमाम आरोपों एक-एक करके जवाब दिया। वे कभी शायराना तो कभी आक्रामक अंदाज में बोले। प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था, महिला सुरक्षा, राजनीतिक इतिहास, रोजगार, राष्ट्रीय सुरक्षा समेत तमाम अहम मसलों पर अपनी बात रखी।

Real Time Live updates: पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले...

- मैं इन सभी लोगों को 2024 में अविश्वास प्रस्ताव का निमंत्रण देकर अपनी बात खत्म करता हूं और अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने का आह्वान करता हूं।

- देश को गुमराह ना करें। देश अहम पड़ाव पर है। न्यू इंडिया देश की नई आकांक्षाओं और आशाओं का आधार बनेगा। इस अहम समय में सभी को साथ मिलकर चलने की आवश्यकता है। जिन लोगों ने चर्चा में भाग लिया मैं उनका आभार करता हूं। मैं एक बार फिर आंध्र की जनता के कल्याण की कामना करता हूं।
- ट्रांसपोर्ट सेक्टर में काफी लोगों को रोजगार मिला है। पिछले साल ट्रांसपोर्ट सेक्टर में सात लाख 60 हजार कमर्शियल गाड़ियां बिकीं। इनमें से 5 लाख 70 हजार गाड़ियां सड़क पर उतरीं। ऐसी एक गाड़ी पर दो लोगों को भी रोजगार मिला तो रोजगार पाने वालों की संख्या 11 लाख पार होती है। पैसेंजर गाड़ियों की संख्या 25 लाख थी, इनमें से 20 लाख नई गाड़ियां थी। इन नई गाड़ियों ने अगर केवल 25 फीसदी गाड़ियां भी दो लोगों को रोजगार देती है तो पांच लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला। इसी तरह दो लाख 55 हजार ऑटो बिके तो लगभग 2 लाख 30 हजार नए ऑटो पिछले साल सड़क पर उतरे। दो ऑटो से तीन लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में 3 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है।
- वकालत में ग्रैजुएट लोगों में 60 फीसदी भी प्रैक्टिस शुरू करें। तो दो लाख लोगों को रोजगार इनके माध्यम से मिला है।
- डॉक्टरी के पेशे से 2 लाख 40 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

- ईपीएफः सितंबर 2017 से मई 2018 तक नौ महीनों में लगभग 45 लाख नए सब्सक्राइबर ईपीएफ से जुड़ें हैं। इनमें से 77 फीसदी 25 वर्ष से कम हैं। एनपीएफ में पिछले नौ महीनों में 5 लाख 68 हजार लोग जुडे़ हैं। ये दो आंकड़े मिलाकर ही पिछले नौ महीनों में लाखों लोग रोजगार से जुड़े हैं। यह संख्या पूरे साल के लिए 70 लाख से भी ज्यादा है। इनमें ईएसआईसी सब्सक्राइबर्स को नहीं जोड़ा गया है, क्योंकि आधार लिंकिंग का काम चल रहा है।

- देश में रोजगार को लेकर बहुत सारे भ्रम फैलाए जा रहे हैं। आधारहीन बातें, कोई जानकारी नहीं ऐसे बयान दिए जा रहे हैं। थोड़ा ध्यान देते तो नौजवानों को फायदा होता।
- वही कर्मचारी, वही व्यवस्था लेकिन यह नई राजनीतिक इच्छा शक्ति है जो आगे बढ़ा रही है।
- पहले की सरकारों के मुकाबले हमारी सरकारी की गति कई तेज है। चाहे सड़कों का निर्माण हो, नए शिक्षा संस्थान हो, रेल का जाल बढ़ा।
- देश की हर पंचायत तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए तेजी से काम हुआ है।
- भारतमाला से हाईवे का जाल, सागर माला से बंदरगाह विकास पूरे देश में फैलाया जा रहा है।
- मॉब लिंचिंगः , लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा और अत्याचार बर्दाश्त नहीं है। राज्य सरकारों से आह्वान है ऐसे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- महिला सुरक्षाः दो महिला मंत्री (सुषमा और सीतारमण) देश के निर्णय ले रही हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जन आंदोलन बना। बेटियां लड़ाकू विमान उड़ा रही है। दुष्कर्मियों से फांसी का प्रावधान
- ईमानदारों के लिए जीवन के हर पड़ाव को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाएं।
- महात्मा गांधी के सपनों को साकार करने के लिए हमने 65 हजार गांवों में सभी के पास बैंक खाता, गैस कनेक्शन, टीकाकरण, बिजली, बीमा सुरक्षा कवर हो और हर घर में एलईडी हो... यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
- ये गांव उन 115 जिलों में है जिन्हें इन्होंने अविश्वास दिया और हमने विकास का विश्वास दिया।
- यूपीए सरकार 32 बिलियन डॉलर का कर्ज छोड़कर गई थी, इसे हमने खत्म कर दिया।
- अगर 2014 में एनडीए सरकार न बनती तो आज देश बहुत बड़े संकट में गुजर रहा होता।
- हमारी सरकार ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड बनाया, इसके तहत बड़े कर्जदारों पर लगाम कसी जा सके। एक साल में तीन बड़े मामलों में हमारी सरकार ने 55 फीसदी रिकवरी कर ली है। कल ही लोकसभा ने एक बड़ा बिल पास किया है। कर्ज ना चुकाने वालों के लिए देश के कानून से बचना और मुश्किल हो गया।
- हमने बैंकों में सुधार के लिए कई नीतिगत निर्णय लिए जो देश की अर्थव्यवस्था को आने वाले वर्षों में सुधार तक पहुंचाएंगे। विलफुल डिफॉल्टर्स की आशंका का आकलन किया जा रहा है। दो लाख दस हजार करोड़ की राशि बैंकों के सुधार के लिए दी जा रही है।
- लोन के भुगतान के लिए भी लोन दिए गए। फोन पर लोन पास हुए औऱ देश की बैंकें एनपीए के जंजाल में फंस गई।

- एक आंकड़ा सदन के लोगों को भी चौंका देगा। आजादी के 60 साल बाद तक हमारे देश की बैंकों ने लोन के रूप में 18 लाख करोड़ रुपए में बांट दिए थे। लेकिन 2008 से 2014 के छह साल में 52 लाख करोड़ रुपए तक यह आंकड़ा पहुंच गया।

- मैं एनपीए ( फंसे हुए बैंक कर्ज) की कहानी सुनाता हूं। कांग्रेस को चुनाव से एक साल पहले लगा था कि जितनी बैंक खाली कर सकते हैं कर लो। 2009 के बाद 2014 तक बैंकों की लूट चलती रही। जब तक कांग्रेस सत्ता में रही लूट का खेल चलता रहा।

- मैं आज एक और बात बताना चाहता हूं। जिनको सुनना नहीं है उनके कान में आने वाली नहीं। लेकिन देश केल लिए बेहद जरूरी है। कई लोगों ने हमको कहा था कि इकोनॉमी पर श्वेत पत्र लाया जाए। लेकिन एक के बाद एक ऐसी जानकारियां आई कि हम चौंक गए कि अर्थव्यवस्था की क्या गत हो चुकी है।

- किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के फैसले को आपने आठ साल तक अटका रखा था। हमने डेढ़ गुना करने का वादा किया था हमने उसे पूरा किया। आपने जनता और किसानों को झूठा विश्वास दिया।

- काला धन, बेनामी संपत्ति किसने रोक रखी थी? एनडीए सरकार ने कई ऐतिहासि निर्णय लिए अब तक किसने रोक रखे थे।

- वन रैंक वन पेंशन, जीएसटी का विषय इतने वर्षों से किसने लटकाया था? मुझ पर आरोप लगाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री ने अड़ंगे लगाए। मेरी चिट्ठियां सबूत है मैंने कहा था राज्यों के मुद्दों का समाधान किए बिना आप आगे नहीं बढ़ सकते। मैं यह भी रहस्य खोलता हूं कि बीजेपी के अलावा अन्य दलों के नेता भी मुझसे कहते थे हम नहीं बोल पाएंगे मोदी जी आप ही कुछ कहिए। हमारा भी भला हो जाएगा। अगर आपका अहंकार नहीं होता और राज्यों की परेशानियां समझी होतीं तो जीएसटी पांच साल पहले आ जाता।

- टीडीपी एनडीए से निकली तो चंद्रबाबू से मेरी फोन पर बात हुई तो मैंने कहा था, 'बाबू आप वाईएसआर के जाल में फंस रहे हो। आप बच नहीं पाओगे।' आंध्र की जनता भी इस घनघोर बदलाव को देख रही है।
- एनडीए सरकार ने सुनिश्चित किया कि तेलंगाना और आंध्र दोनों का विकास हो। मीडिया रिपोर्ट्स याद आ रही है। टीडीपी के एक माननीय सदस्य ने बयान दिया था कि स्पेशल कैटेगरी से कहीं बेहतर स्पेशल पैकेज है।

- 18 साल पहले अटल बिहारी जी की सरकार ने तीन राज्यों का गठन किया- उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़। कोई झगड़ा नहीं हुआ सभी के साथ मिलकर रास्ते निकाले। तीनों राज्य तेजी से विकास कर रहे हैं और देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। लेकिन राजनीति के लिए आंध्र प्रदेश के लोगों को जुटाया और तेलंगाना अलग कराया। उस समय मैंने कहा था, 'तेलुगु हमारी मां है। ये शब्द मेरे उस समय थे।' (अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले टीडीपी सांसद जयदेव ने समर्थन किया।) ये आपके लिए नया नहीं है। आपने भारत-पाकिस्तान का विभाजन किया आज तक मुसीबतें झेल रहे हैं। आपने उन्हें विश्वास में नहीं लिया। मुझे याद है विभाजन के बाद केसीआर और चंद्रबाबू नायडू के बीच झगड़े होते थे। बंटवारा ऐसा किया कि संसाधनों का विवाद आज भी चल रहा है।

- किसी के कहे शब्द दोहरा रहा हूं- 'कांग्रेस पार्टी अलग अलग राज्यों में क्यों और कैसे कमजोर हो गई। मैं एक ऐसे राज्य से हूं जहां कांग्रेस का प्रभुत्व खत्म होता जा रहा है।'

- कांग्रेस पार्टी जमीन से कट गई है। वो तो डूबे हैं दूसरों को भी डूबा रहे हैं। 'हम तो डूबे उन्हें भी ले डुबें'

- एक परिवार के सपनों के सामने सभी को कुर्बान किया गया। जिनके अंदर अहंकार भरा हो वो कैसे स्वीकार कर सकते हैं। उन्हें हमारा यहां बैठना कैसे गवारा हो सकता है।

- (इंदिरा पर तंज) धारा 356 का दुरुपयोग करने वाले अब हमें सिखा रहे हैं।
- बाबा साहेब के पहनावे का मजाक उडा़ने वाले आज उनके गीत गा रहे हैं।
- समाधान के रास्ते की बजाय चुनाव जीतने के शॉर्टकट ढूंढे जा रहे हैं।
- आरक्षण खत्म हो जाएगा, दलितों पर अत्याचार रोकने वाला कानून खत्म कर दिया गया है.... ये सब बयान देश को हिंसा की आग में झोंकने के लिए है। इमोशनल ब्लैकमेलिंग करके राजनीति की जा रही है।
- हम देश के विकास को नई दिशा में ले जाने वाले मेहनतकश मजदूरों के दुख को बांटने में हम भागीदार हैं। हम चौकीदार भी हैं, हम भागीदार भी हैं। हम सौदागर नहीं है। हमें गर्व है इस बात का।

- बारी बारी से आने दो किसी को छोड़ने वाला नहीं हूं। सभी का सम्मान करूंगा। सभी को जवाब दूंगा

- इतना तो ध्यान रखो पेट्रोलियम को जीएसटी से बाहर रखने का फैसला आपकी ही सरकार ने लिया।

- (राहुल पर तंज) आपकी आंख में हम आंख डाल भी नहीं सकते। गरीब मां का बेटा हूं।
- जय प्रकाश नारायण, चौधरी चरण सिंह, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल, प्रणब मुखर्जी, शरद पवार जी.... ये सब गवाह हैं उन्होंने आंख में आंख डालने की कोशिश की उनके साथ क्या किया गया।
- (राहुल के आंख मारने पर चुटकी) हम कामदार हैं हम नामदार से कैसे आंख मिला सकते हैं। आंखों की बात करने वालों की आंखों की हरकतों को आज टीवी पर देश देख रहा है। आंख में आंख डालकर आज सत्य को कुचला गया।

- 1979 में किसान नेता माटी के लाल चौधरी चरण सिंह जी को पहले समर्थन का भ्रम दिया और फिर वापस ले लिया। एक किसान का इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता है।
- चंद्रशेखर का भी इसी तरह अपमान किया। पहले सहयोग की रस्सी फेंको फिर धोखे से वापस खींचो। यही खेल चलता रहा। इसे 1997 में भी दोहराया। पहले देवगौड़ा जी को अपमानित किया गया और फिर इंद्र कुमार गुजराल को।
- चाहे गुजराल हों चाहे मुलायम सिंह जी हो कांग्रेस की तरफ से किए गए अपमान को कौन भूल सकता है।

- (सोनिया पर निशाना) अखबार में पढ़ा कि अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी के तुरंत बाद कहा गया कि कौन कहता है हमारे पास संख्या बल नहीं है। यह अहंकार है।

- कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव की व्यवस्था का दुरुपयोग किया।

- आपको गालियां देनी है तो मोदी खड़ा है सेना को गालियां मंजूर नहीं होगी
- देश के सेनाध्यक्ष के लिए ऐसे बयान से सीमा पर खड़े और देश के लिए मर मिटने वालों को कितनी चोट पहुंची होगी? आपको उनके पराक्रम को स्वीकारने का सामर्थ्य नहीं होगा लेकिन आप सर्जिकल स्ट्राइक को जुमला स्ट्राइक कहकर सवाल जायज नहीं
- राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए।
- अब सुधरने का मौका है सुधरने की कोशिश कीजिए। यह राजनीतिक स्तर देश के हित में नहीं है। मैं सदन के माध्यम से देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह समझौता (राफेल) दो देशों के बीच हुआ। किन्हीं व्यापारिक पार्टियों के बीच नहीं हुआ।

- यहां राफेल का मुद्दा छेड़ा गया। मैं कल्पना नहीं कर सकता कि देश को इस तरह से गुमराह किया जा सकता है क्या, क्या सत्य को इस तरह कुचला जा सकता है क्या.... यह कितना दुखद है कि सदन में लगाए गए आरोप पर दोनों देशों ( फ्रांस और भारत) को खंडन करना पड़ा

- हर जगह बचकाना हरकत करते रहेंगे क्या, देश के सदन की कोई गंभीरता नहीं है क्या

- (राहुल पर तंज) यहां पर डोकलाम की चर्चा हुई। मैं मानता हूं कि जिस विषय की जानकारी नहीं है कभी-कभी

उस पर बोलने से बात और बिगड़ जाती है। इसमें व्यक्ति का कम देश का नुकसान ज्यादा है।
- जो आज डोकलाम की बात करते हैं वे चीन के लोगों के साथ बैठते हैं। बाद में कभी हां तो कभी ना करते हैं। जैसे नाटकीय ढंग से चल रहा हो। ऐसा सस्पेंस क्यों

- आज शिव भक्ति की बात हो रही है। मैं भी करता हूं। आपको इतनी शक्ति मिले की 2024 में आप फिर से अविश्वास प्रस्ताव ले आएं... मेरी आपको शुभकामनाएं हैं।
- (नेशनल हेराल्ड के बहाने तंज) जब कोर्ट कचहरी में उन्हें भी जाना पड़ा तो तकलीफ हुई
- भ्रष्टाचार की कमाई आनी बंद हुई तो उनकी बैचेनी बढ़ गई।

 

- इन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के गौरव गान, ईवीएम पर, चुनाव आयोग पर भी विश्वास नहीं है।

- स्वच्छ भारत, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, देश के मुख्य न्यायाधीश, रिजर्व बैंक पर भी विश्वास नहीं

- कांग्रेस को खुद पर अविश्वास है। अविश्वास ही उनकी पूरी कार्यशैली और जीवन का हिस्सा है।

- (विपक्ष पर तंज) चातक पक्षी के मुंह में बारिश की बूंद सीधे नहीं गिरती तो इसमें बादल का क्या दोष

- देश को विश्वास है, दुनिया को विश्वास है, सर्वश्रेष्ठ संस्थाओं का विश्वास है। लेकिन जो खुद पर विश्वास नहीं करते वो हम पर क्या कर सकेंगे।

- ढाई लाख से ज्यादा शैल कंपनियों पर हमने ताले लगा दिए।
-हमने टेक्नोलॉजी के माध्यम से सरकारी खजाने से निकलने वाले रुपए में 90 हजार करोड़ रुपए बचाए हैं। उसे गलत हाथों में जाने से बचाया है।
- हमने काले धन के खिलाफ लड़ाई छेड़ी, ये लड़ाई रूकने वाली नहीं है।
- भारत छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। इसके लिए तो गौरव होना चाहिए।
- सरकार इज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाकर सरकार कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस घटा रही है। जीएसटी का भी किया जिक्र

- आज 10 हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स देश के नौजवान चला रहे हैं। डिजिटल इंडिया की बात की तो इन्हीं विद्वानों ने कहा हमारा देश तो अनपढ़ है।
- हमने 13 करोड़ नौजवानों को मुद्रा योजना के तहत लोन दिया।
- उनके समय में दो मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां थी आज 102 हैं।
- 450 का एलईडी बल्ब 45 रुपए में उपलब्ध कराया।
- सालों से अटकी 99 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया।
- हम किसानों को आधुनिक खेती की तरफ ले गए, शत प्रतिशत नीम कोटिंग कराई, यूरिया की कमी अब बंद हुई है, सॉइल हेल्थ कार्ड बनाया, 2016-17 में किसानों ने 1300 करोड़ रुपए बीमा प्रीमियम के रूप में दिया और उन्हें 5500 करोड़ रुपए की सहायता दी। लेकिन इन लोगों को विश्वास नहीं होता।

- हम किसानों की आय दोगुनी करने पर काम कर रहे हैं।

- एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक 20 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। उन्हें मात्र एक रुपए के खर्च पर उन्हें चिकित्सा बीमा मिल रहा है। आने वाले दिनों में आयुष्मान भारत योजना पर भी काम तेजी से हो रहा है।

- उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों माता-बहनों को हमने गैस कनेक्शन देकर उनकी गरिमा का सम्मान किया। ये लोग 8 सिलेंडर 12 सिलेंडर में ही उलझे थे।

- लगभग 32 करोड़ जनधन खाते हमने खोले, करीब 80 हजार करोड़ रुपए गरीबों ने इन खातों में डाले।

(विपक्ष ने वी वॉन्ट जस्टिस के नारे लगाए।)
- 'सबका साथ, सबका विकास' इसी के साथ काम करते हैं। 18 हजार गांवों में बिजली पहुंची। ये काम पिछली सरकारें भी कर सकती थी। इन 18 हजार में से 15 हजार गांव पूर्वी भारत के हैं। इनमें भी पांच हजार गांव पूरी तरह नॉर्थ ईस्ट के। इन इलाकों में हमारे आदिवासी और गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित और वंचितों का एक बड़ा तबका रहता है। पिछली सरकारों का इन लोगों पर भरोसा नहीं था, इसलिए नॉर्थ ईस्ट को वंचित कर दिया।

(प्रधानमंत्री के भाषण के बीच में विपक्ष का जबर्दस्त हंगामा, करीब 5 मिनट खामोश हुए पीएम)

- हम यहां संख्या बल और सवा सौ करोड़ देशवासियों के विश्वास की वजह से हैं।
- एक मोदी को हटाने के लिए... ऐसे लोगों को इकट्ठा कर रहे हैं जिनसे कभी मिलने या कभी उन्हें देखने का भी समय नहीं था।
- यह सरकार का फ्लोर टेस्ट नहीं है, यह कांग्रेस अपने संभावित साथियों की परीक्षा ले रही है। कांग्रेस को अपना कुनबा बिखरने की चिंता है।
- (विपक्षी एकता पर तंज) बाकियों के मन में जो इच्छा है प्रधानमंत्री बनने का क्या? बाकी लोग भी उनके प्रधानमंत्री बनने पर थोड़ी मुहर तो लगाए
- (राहुल पर तंज) डंके की चोट पर अहंकार ये कहलाता है '2019 में आने नहीं देंगे'। जो जनता में विश्वास नहीं करते उनके मुंह से ऐसी बातें निकलती है। अगर 2019 में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो मैं बनूंगा प्रधानमंत्री।

- ये अहंकार ही कहता है कि हम खड़े होंगे तो 15 मिनट भी प्रधानमंत्री ख़ड़े नहीं रह पाएंगे। स्पीकर महोदया, मैं खड़ा भी हूं और चार साल के विकास कार्यों पर अड़ा भी हूं

- मैं हैरान हूं अभी तो मतदान हुआ भी नहीं था, चर्चा आरंभ हुई थी। फिर भी इनको (राहुल गांधी को) यहां आने की इतनी जल्दी थी... बोले उठो, उठो, उठो

- न मांझी , न रहबर ,न हक़ में हवाएं
है कश्ती भी जर्जर ये कैसा सफ़र है

- कइयों के मन में सवाल है कि अविश्वास प्रस्ताव क्यों आया? ना संख्या है, ना बहुमत है। सरकार को गिराने के लिए इतना उतावलापन है तो फिर चर्चा को टालने की इच्छा क्यों? अगर चर्चा की तैयारी नहीं थी और 48 घंटे और देर कर दो तो फिर लाए क्यों?

- आज देश को देखने का मौका मिला कि कैसे विकास कार्यों के प्रति नकारात्मक राजनीति ने देश को घेर रखा है।

- मैं आग्रह करता हूं कि आप सभी इस अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करें और 30 साल बाद देश में पूर्ण बहुमत की बनी सरकार के विकास कार्यों का समर्थन करें।

- भले टीडीपी की तरफ से प्रस्ताव आया है, लेकिन उनके साथ कुछ माननीय सदस्यों की तरफ से प्रस्ताव का समर्थन किया गया, एक बहुत बड़े समूह ने विरोध भी किया।

- अविश्वास प्रस्ताव लोकतंत्र की शक्ति का परिचायक है।

- मैं स्पीकर महोदया का आभार व्यक्त करता हूं। आपने धैर्य के साथ सदन का संचालन किया है।

 

मानसून सत्रः अविश्वास प्रस्ताव के बीच अचानक सालेसाहब की फिल्म की कहानी सुनाने लगे ये रईस सांसद

तमाम नेताओं ने जमकर बोला हमला

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारुक अब्दुल्ला, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम समेत देश के तमाम विपक्षी नेताओं ने सरकार पर जमकर वार किए। सरकारी की तरफ से भी गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी जवाब दिया।

राफेल डीलः राहुल बोले, 'मैं संसद में दिए बयान पर कायम', फ्रांस ने खारिज की बात

 

PM Narendra Modi
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