आकाशीय बिजली गिरने से 14 बकरिया की मौत


प्रतापगढ़. जिले में रविवार दोपहर बाद हुई मेघगर्जना के साथ बारिश ने कहर बरपाया है। रठांजना थाना इलाके के बरडिय़ा पंचायत के खेरी मगरी गांव में रविवार शाम को आकाशीय बिजली गिरी। जिससे गांव के पास चरवाहे की 14 बकरियों की मौत हो गई।

By: Devishankar Suthar

Published: 27 Sep 2021, 07:50 AM IST


प्रतापगढ़. जिले में रविवार दोपहर बाद हुई मेघगर्जना के साथ बारिश ने कहर बरपाया है। रठांजना थाना इलाके के बरडिय़ा पंचायत के खेरी मगरी गांव में रविवार शाम को आकाशीय बिजली गिरी। जिससे गांव के पास चरवाहे की 14 बकरियों की मौत हो गई। यहां दुर्गा पुत्र हरजी लाल बंजारा अपनी 15 बकरियों को चराने के लिए पहाड़ी पर गया था। शाम को आकाशीय बिजली गिरने से 14 बकरियों की मौके पर ही मौत हो गया। इस दौरान दुर्गा बंजारा बकरियों से थोड़ा आगे चल रहा था। ऐसे में वह बाल-बाल बच गया। सूचना पर कई ग्रामीण मौके पर पहुंचे। इस संबंध में पुलिस और प्रशासन को अवगत कराया गया है। बताया कि चरवाहे के पास आय का कोई साधन नहीं है।
-=--==--=--=कांठल में हुई खंड बारिश
-कई इलाकों में झमाझम बारिश
-दोपहर बाद हुई तेज बरसात
प्रतापगढ़. जिलें में बारिश का दौर रविवार को भी जारी रहा। इस दौरान दोपहर बाद कई इलाकों में खंड बारिश हुई। बारिश से खेतों में पानी भर गया। वहीं शहर में दोपहर को हवा के साथ मूसलाधार बारिश हुई। करीब एक घंटे तक बारिश से सडक़ें दरिया बन गई। इसके बाद शाम तक रुक-रुककर बारिश का दौर चलता रहा।
जिलेभर में गत दिनों से लगातार बारिश से खेतों में नुकसान होने लगा है। इससे किसानों में चिंता सताने लगी है।
धरियावद. कस्बे में रविवार दिनभर आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच दोपहर बाद आसमान काले बादल घिर आए और बारिश शुरू हो गई।
तेज हवा एवं आसमान में बिजली की तेज गर्जना के बीच करीबन आधे घंटे तक तेज बरसात हुई। आलोकऋतू वैधशाला अनुसार बीते चौबीस घंटों में 50 एमएम बरसात दर्ज की गई। इधर 31 मीटर भराव क्षमता वाले जाखम बांध में जल की आवक जारी रही। रविवार दोपहर तक बांध का जलस्तर 27.50 मीटर दर्ज किया गया बांध में पानी की आवक लगातार बनी हुई हैं।
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मूंगाणा क तालाब से रिसाव
क्षेत्र में रविवार दोपहर बाद आधा घंटा जमकर बारिश हुई। मूसलाधार बारिश से दिन में वाहन चालकों ने हेडलाईट लगाकर वाहन को चलाया। इस बरसात से नदी-नालों में पानी की अच्छी आवक हुई। कस्बा में स्थित हनुमान सागर तालाब हुआ लबालब चंद घंटों में रिता हो गया। इस तालाब का निर्माण वर्ष 1956 में हुआ। एक दशक पूर्व पाल का हिस्सा टूट गया। गत वर्ष बरसात के दौरान टूटा हिस्सा पानी के साथ बह गया। लंबे अर्से से टूटी पाल की मरम्मत कराने की मांग की जा रही है। लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। मूंगाणा के आसपास नदी-नाला नहीं होने से हनुमान सागर तालाब के पानी से खेतों में सिंचाई के साथ ही कुओं में जल स्तर भी रहता है।

Devishankar Suthar
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