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चंदखुरी कौशल्या का जन्मस्थल नहीं, माता के अस्तित्व को नकार रही भाजपा

पूर्व मंत्री चंद्राकर के विवादास्पद बयान पर भड़की कांग्रेस

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चंदखुरी कौशल्या का जन्मस्थल नहीं, माता के अस्तित्व को नकार रही भाजपा

चंदखुरी कौशल्या का जन्मस्थल नहीं, माता के अस्तित्व को नकार रही भाजपा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रभु राम के बाद अब माता कौशल्या के नाम पर सियासत गरमा गई है। इसे लेकर पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर का बयान आया है कि चंदखुरी माता कौशल्या की जन्मस्थली नहीं है। इस पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, जो लोग कल तक राम के नाम पर चंदे और वोटों के धंधे का कारोबार करते थे, वे आज माता कौशल्या के जन्म स्थान पर प्रश्न खड़ा करके उनके अस्तित्व को ही नकार रहे हैं।

दरअसल, एक सवाल के जवाब में पूर्व मंत्री चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस और उनके कथित नेता जो मुद्दाविहीन हो गए हैं। उनको जो राम याद आ रहे हैं, उनके ज्ञान पर तरस आता है। कौशल्या जी का मंदिर चंदखुरी में स्थित है, न कि उनकी जन्मस्थली है। उन्होंने कहा, कौशला जमीदारी जो बिलासपुर में है, उसे माना जाता है कि वो दक्षिण कौशल के राजा भानुमति की कन्या कौशल्या उत्तर कौशल के राजा दशरथ से ब्याही गई थी। यह नहीं माना जाता है कि वो चंदखुरी में पैदा हुई थी। उनके बुद्धि ज्ञान पर तरस आता है। यह राजनीतिक उपयोग है।

चंद्राकर के बयान पर क्या भाजपा की सहमति है?

पूर्व चंद्राकर के बयान पर तंज कसते हुए कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, कल को अजय चंद्राकर यह भी दावा कर दें कि प्रभु राम का जन्म अयोध्या में नहीं हुआ था। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय से यह पूछा है क्या अजय चंद्राकर के उक्त बयान में इन तीनों की सहमति भी शामिल है? उन्होंने कहा, माता कौशल्या के जन्म स्थान पर सवाल खड़ा करके भारतीय जनता पार्टी ने दरअसल छत्तीसगढ़ के विद्वान इतिहासकारों की विद्वता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही साथ उन्होंने यह भी जाहिर कर दिया है कि माता कौशल्या के प्रति उनके मन में कितनी आस्था है। डॉ. रमन सिंह को प्रदेश की जनता को यह जवाब देना चाहिए कि क्या माता कौशल्या के प्रति भाजपा के मन में आस्था नहीं रहने के कारण ही अपने 15 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने चंदखुरी स्थित मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं किया? सत्ता जाने के बाद से 15 वर्षों तक कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त रही भारतीय जनता पार्टी के लोग अब मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुके हैं और उनका हिन्दू धर्म विरोधी चेहरा भी सामने आने लगा है।

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