Gerbera Flower Farming: जरबेरा की खेती से फल-फूल रहे किसान, इसकी खेती के जरिए कम लागत में किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं, इसकी खेती में 50% अनुदान भी भी मिलता है
Gerbera Flower Farming: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के किसान अब धान, गेहूं, सब्जी की पैदावारी छोड़ उन्नत फसल जरबेरा फूल की खेती कर सालाना लाखों रुपए कमा रहे हैं। उन्नत खेती जरबेरा फूल की खेती के लिए सरकार लागत का 50 प्रतिशत अनुदान भी दे रही है। वर्तमान में राजनांदगांव जिले में 4 किसान जरबेरा की खेती कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि जरबेरा फूल की खेती में सालाना 10 से 12 लाख रुपए प्रति एकड़ आय हो रही है।
किसान जरबेरा की खेती कर अन्य फसलों की तुलना में कहीं अधिक कमाई कर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना और संरक्षित खेती के अंतर्गत पोली हाउस स्कीम के तहत जिले के चार किसान जरबेरा फूल की खेती कर रहे हैं। विभाग द्वारा इन किसानों को पोली हाउस निर्माण व पौध रोपण के लिए 50-50 प्रतिशत का अनुदान दे रही है। एक एकड़ में लगभग 26 हजार पौधे रोपे जाते हैं।
पुणे से आते हैं पौधे,भुरभुरी मिट्टी वाली जमीन उपयुक्त
जरबेरा की खेती में एक बार पौध रोपण के बाद 5 साल तक लगातार पैदावारी हो रही है। पौध रोपण के तीन माह बाद फूलों की पैदावारी शुरू हो जाती है और रोजाना फूलों की तोड़ाई होती है। किसान इन फूलों को डीलर के माध्यम से रोजाना बि₹ी कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि पौध रोपण के लिए पौधे पुणे से आते हैं। प्रति पौधे 30 से 40 रुपए में खरीदी किए हैं। जरबेरा की खेती के लिए भुरभुरा मिट्टी वाली जमीन उपयुक्त है। खेती के लिए सबसे पहले जमीन को लेबल कर सिंचाई के लिए ड्रीप सिस्टम लगाया जाता है, फिर धान का भूसा और गोबर खाद मिला कर डाला जाता है। इसके बाद बैड बना कर पौधे रोपे जाते हैं।
महिला किसान उन्नत खेती कर कमा रही सालाना लाखों
जरबेरा की खेती कर रही एमए अंग्रेजी व बीएड की शिक्षा प्राप्त महिला किसान अनिता नायडू ने बताया कि उनका शुरू से ही खेती के प्रति लगाव रहा है। बताया कि धान, गेहूं सब्जी के अलावा उनका रुझान उन्नत खेती की ओर रहा और उसने जरबेरा की खेती शुरू की। अनिता ने बताया कि जरबेरा की खेती में सालाना 10 से 12 लाख की कमाई हो रही है। उन्होंने बताया कि शादी व धार्मिक आयोजनों के सीजन में जरबेरा फूल प्रति नग 5 से 7 रुपए तक बिक्री होती है। बताया एक एकड़ में प्रति दिन लगभग 2000 फूल निकल रहे हैं और आउट सीजन में ढाई से तीन रुपए प्रति नग में बिक्री होती है।
महानगरों में है जरबेरा की डिमांड, डीलर करते हैं सप्लाई
जरबेरा फूलों की डिमांड मुंबई, कोलकाता, नागपुर, हैदराबाद, दिल्ली, विशाखापट्टनम सहित अन्य महानगरों में अधिक है। इस फूल का उपयोग गुलदस्ता बनाने में अधिक उपयोग होता है। इसके अलावा फूलों की माला में भी इसका उपयोग होता है। शादी सीजन व धार्मिक आयोजनों में भी गुलदस्ता व माला के लिए इसकी डिमांड रहती है।
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक राजेश शर्मा ने बताया कि जरबेरा की खेती करने किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में जिले के किसान गिरीश देवांगन द्वारा डोंगरगढ़ ब्लॉक के कोलिहापुरी में, महिला किसान अनिता नायडू द्वारा राजनांदगांव ब्लॉक के बरगाही व देवादा में, देशलहरा कृषि फार्म द्वारा एक-एक एकड़ में पोली हाउस के माध्यम से जरबेरा की खेती की जा रही है। इस खेती के लिए एक एकड़ में पोली हाउस निर्माण में 30 लाख का खर्च आ रहा है। इसमें सरकार से 16 लाख 80 हजार का अनुदान मिल रहा है। वहीं जरबेरा पौध रोपण में 28 लाख का खर्च आ रहा है। इसमें सरकार से 14 लाख रुपए का अनुदान मिल रहा है।
सालाना 10 से 12 लाख की कमाई
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत संरक्षित खेती अंतर्गत पोली हाउस स्कीम में जरबेरा की बेहतर खेती हो रही है। किसानों को 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। किसान सालाना 10 से 12 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।
-राजेश शर्मा, उप संचालक, उद्यानिकी विभाग राजनांदगांव