
सरकारी अस्पताल की रेफरल स्लिप दिखाने पर ही निजी में होगी सिजेरियन डिलीवरी
रायपुर.डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिस पर जमकर बबाल मचा हुआ है। शनिवार को सामने आए विवाद की वजह है सिजेरियन (बड़े ऑपरेशन से प्रसव) डिलीवरी को लेकर योजना की राज्य नोडल एजेंसी द्वारा जारी की गई गाइड लाइन है। इसमें साफ लिखा है कि, निजी अस्पतालों में तभी सिजेरियन होगा, जब सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं होगी। यदि सीधे निजी अस्पताल जाते हैं, तो उन्हें मुफ्त डिलीवरी का लाभ नहीं मिलेगा। निजी अस्पतालों में सिजेरियन के पूर्व सरकारी अस्पतालों के रेफरल स्लिप लगाना अनिवार्य होगा।
इसे लेकर ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की छत्तीसगढ़ इकाई और हॉस्पिटल बोर्ड ने कड़ी आपत्ति की है। पूर्व में सरकार ने सामान्य प्रसव को सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित कर दिया है, लेकिन सिजेरियन को इमरजेंसी सर्विसेस मानते हुए खुला रखा है।
सूत्रों के मुताबिक जनवरी में स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक सिंह ने राज्य नोडल एजेंसी के अफसरों, आईएमए व हॉस्पिटल बोर्ड के पदाधिकारियों से सिजेरियन को लेकर चर्चा की थी। इसके बाद भी इसमें जटिीलता दिख रही है। इस लेकर आईएमए का कहना है, अगर यही करना था, तो निजी अस्पतालों को इस योजना से बाहर कर देते।
गाइड लाइन के अहम बिंदु
1- सामान्य, जटिल और सिजेरियन प्रसव की सुविधा सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क है। अनुबंधित निजी अस्पतालों में भी योजना का लाभ मिलेगा।
2- सरकारी अस्पताल में सिजेरियन सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर मरीज को पहले ऐसे सरकारी अस्पताल में भेजना होगा, जहां यह सुविधा उपलब्ध है। यदि सुविधायुक्त सरकारी अस्पताल नजदीक में नहीं है, तभी उन्हें निजी अस्पताल में रेफर किया जाएगा।
3- निजी अस्पतालों द्वारा सिजेरियन का पैकेज ब्लॉक करने की स्थिति में केस से संबंधित दस्तावेजों के साथ रेफरल स्लिप को अपलोड करना अनिवार्य होगा।
4- प्रसूता के प्रकरण ऐसे समय अस्पताल आते हैं, जब रेफरल स्लिप प्राप्त किया जाना संभव न हो और सिजेरियन की आवश्यकता हो तो 48 घंटे के अंदर इसे जमा करवाना होगा।
सिजेरियन के लिए 11,500 रुपए तय- निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के लिए राज्य सरकार ने 11,500 रुपए निर्धारित कर दिए हैं। तय राशि से एक रुपए भी अतिरिक्त नहीं लिए जा सकते।
बड़ा सवाल: शर्त कितनी सही है- अगर किसी गर्भवती को प्रसव पीड़ा होती है और नजदीक के सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने के बावजूद उसे पहले इसी अस्पताल में आना होगा। यहां डॉक्टर जांच करेंगे। रेफरल स्लिप बनवाएंगे। फिर उसे ऑपरेशन की सुविधा वाले सरकारी या निजी अस्पताल रेफर किया जाएगा। सोचिए, तब तक गर्भवती की क्या स्थिति रहेगी? अगर उसके साथ कोई घटना-दुर्घटना होती है तो इसका जवाबदार कौन होगा?
निजी अस्पतालों में सिजेरियन कब होगा, कैसे होगा इस पर शर्तें लागू करना गलत है। ये शर्तें गर्भवती को परेशानी में डालने जैसी स्थिति है। सरकार ने कई पैकेज सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित किए हैं, वैसे ही इसे भी कर दे।
डॉ. महेश सिन्हा, अध्यक्ष, आईएमए, प्रदेश इकाई
सब के कहने पर ही गाइड लाइन जारी की गई है। अगर किसी को कोई समस्या है या आपत्ति है तो शासन हर स्तर पर उसे हल करने की पूरी-पूरी कोशिश की जाएगी।
डॉ. श्रीकांत राजिमवाले, राज्य नोडल अधिकारी, डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना
Published on:
09 Feb 2020 12:25 pm

बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
