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मृत्युदर 0.9 प्रतिशत: अक्टूबर के 17 दिन में 184 जानें गईं, बैक डेट में हुई 298 मौतों की एंट्री

- बीते 2 महीने में मौतें ज्यादा हो रही थीं तो जिलों ने छिपाईं, अब कम हो रही तो पुराने आंकड़े जारी कर रहे... - इसलिए बढ़ रहा मौत का ग्राफसच नंबर 1- अक्टूबर में मौतों का औसत 28.4, मगर एक दिन भी 28 मौत नहीं हुईंसच नंबर 2- 24 घंटे में होने वाली मौत का औसत 10.8सच नंबर 3- विलंब से होने वाली मौतों का औसत 17.4

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रायपुर. प्रदेश में कोरोना मृत्युदर ०.९ प्रतिशत पर जा पहुंची है, जो अब तक के सर्वाधिक स्तर पर है। ये आंकड़े कम होती संक्रमण की रफ्तार में चौकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल में राज्य में १७ अक्टूबर तक १,४३९ जानें जा चुकी हैं। सर्वाधिक ६८० मौतें सितंबर के ३० दिनों में हुई है। लेकिन अक्टूबर के १७ दिनों में ४८२ मरीजों ने दमतोड़ चुके हैं। यानी औसतन हर दिन २८.३५ मौतें हो रही हैं।

यह सरकारी आंकड़ों का सच है। जो, आधा-अधूरा है। हकीकत यह है कि जब जिलों में मौतें ज्यादा हो रही थीं तो जिले के जिम्मेदारों ने राज्य स्वास्थ्य विभाग को कम मौतों की रिपोर्ट भेजीं। अब जब मौतों के आंकड़े कम हो रहे हैं तो पुरानी मौतों की सूचनाएं धीरे-धीरे कर जारी की जा रहीं हैं। स्पष्ट है कि वर्तमान में रोजाना २८ मौतें नहीं हो रही हैं। दरअसल, बैक डेट में हुई मौतों को आज होने वाली मौतों के साथ जोड़ा जा रहा है। अक्टूबर में एक भी दिन २४ घंटे में १६ से अधिक मौतें नहीं हुईं। ८ दिन तो आंकड़े दहाई के पार नहीं गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े आज के समय में लोगों के अंदर भय पैदा करने वाले हैं, तब जब कोरोना संक्रमण घटता दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग मुताबिक अक्टूबर में अप्रैल, जुलाई, सितंबर तक की मौतों की जानकारियां जिले अब भेज रहे हैं। जबकि कोरोना से मौत की पुष्टि में होने में २४ घंटे से अधिक समय नहीं लगता, तब जब मृतक कोरोना संदिग्ध हो। संक्रमित मरीज की रिपोर्ट २ घंटे में बन जाती है।

जिले जहां ५० से अधिक जानें गईं
रायपुर- ५१३, दुर्ग- १७४, रायगढ़- ११४, बिलासपुर- ८७, जांजगीर-चांपा- ७४, बलौदाबाजार- ६९, राजनांदगांव- ५७

जिलों से ऐसे जारी हो रहे मौतों के आंकड़े
तारीख- आज हुई मौत- विलंब से मौतों की सूचना
१ अक्टूबर- १४- १५

२ अक्टूबर- ०५- ११
३ अक्टूबर- १५- १४

४ अक्टूबर- ०९- ०५
५ अक्टूबर- १३- २३

६ अक्टूबर- १४- ०९
७ अक्टूबर- १४- १६

८ अक्टूबर- ०८- १६
९ अक्टूबर- १६- २२

१० अक्टूबर- ०७- ३२
११ अक्टूबर- ११- ०७

१२ अक्टूबर- ०७- २६
१३ अक्टूबर- ०९- ११

१४ अक्टूबर- १६- १७
१५ अक्टूबर- १६- ३०

१६ अक्टूबर- ०५- ३५
१७ अक्टूबर- ०५- ०७

(- इन आंकड़ों से तस्वीर पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी कि कैसे जिले विलंब से मौतों की सूचनाएं सार्वजनिक करने के लिए राज्य को डेटा भेज रहे हैं।)

'विलंब से आई सूचना' क्यों लिखना पड़ रहा
'पत्रिका' ने २४ सितंबर को इस गड़बड़ी को उजागर किया, जिसके बाद अब तक रोजाना पिछले मौतों की डेटा धीरे-धीरे कर जिले जारी करते आ रहे हैं। मगर, बड़ा सवाल यह है कि एक दिन में ही सारी बैक डेट में हुई मौतों की जानकारी क्यों नहीं जारी कर दी जाती, ताकी 'विलंब से आई सूचना' लिखने की जरुरत ही न पड़े। स्थिति तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी अपने ही सीएमएचओ पर समय पर मौत की सूचनाएं देने का दबाव तक नहीं बना पा रहे हैं।

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जिलों से ही मौत की जानकारियां समय पर नहीं आ रहीं तो राज्य को कैसे मालूम चलेगा किसकी मौत हुई। इसलिए विलंब के साथ सूचना प्राप्त हुई, मुझे लिखना पड़ता है।
डॉ. सुभाष पांडेय, प्रवक्ता एवं संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य विभाग

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