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सोशल मीडिया में ज्यादा एक्टिव बन सकता है परेशानी का कारण, ऐसे हो रही ठगी, ये मामला जान उड़ जाएंगे होश

cyber crime news : सीए अंकित और सतीश के साथ ही इसी तरह की ऑनलाइन ठगी हुई है...

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रायपुर. cyber crime news इंटरनेट, सोशल मीडिया प्लेटफार्म में जिस ढंग से हम अपने बारे में जानकारियां या जरूरी दस्तावेज शेयर करते हैं, उससे किसी बड़ी ठगी के शिकार हो सकते हैं। किसी तरह की बड़ी साजिश का हिस्सा भी बना सकते हैं। दरअसल साइबर ठगी करने वाले आम लोगों के पहचान से संबंधित उन हर जानकारियों को चुरा रहे हैं, जिसके जरिए उन्हें ठगा जा सके। (cyber crime case) फोटो, आधार कार्ड-पैनकार्ड नंबर, हस्ताक्षर नमूना, मोबाइल नंबर, लैंडलाइन नंबर आदि कुछ भी मिल जाए। इन चीजों का इस्तेमाल झांसा देने में करते हैं। सीए अंकित और सतीश के साथ ही इसी तरह की ऑनलाइन ठगी हुई है।

यहां से जा रही जानकारियां
-सोशल मीडिया प्लेटफार्म
-अलग-अलग प्रोफशनल वेबसाइट
-केवायसी सेंटरों-मेट्रीमोनियल साइट
-बैकिंग वेबसाइट, ऐप
-ऑनलाइन ट्रांजेक्शन

ऐसे करते हैं ठगी
इंटरनेट और सोशल मीडिया माध्यम से चुराई गई फोटो, मोबाइल नंबर, पहचान संबंधित दस्तावेजों का इस्तेमाल का साइबर ठग किसी बड़े अधिकारी, कारोबारी या प्रोफेशनल की डीपी लगाकर उनके मातहतों से ऑनलाइन ठगी करने में करते हैं। वाट्सऐप की डीपी में उनका फोटो लगा लेते हैं, फिर उनके फायनेंस अधिकारी, बैंककर्मी, दोस्तों-रिश्तेदारों आदि को वाट्सऐप मैसेज करके रकम ट्रांसफर करने कहते हैं।

ऐसे बचा जा सकता है
-सोशल मीडिया के प्रोफाइल फोटो लॉक रखें
-केवल सरकारी और प्रतिष्ठित कंपनियों के अधिकृत वेबसाइटों में पहचान संबंधित जानकारी दें
-केवल वाट्सऐप मैसेज के आधार पर ही किसी के भी खाते में रकम जमा न करें। मैसेज करने वाले से बातचीत करके पुष्टि कर लें।
-आउटसोर्सिंग वाली केवायसी सेंटरों में पहचान संबंधित दस्तावेज देने से बचें

केस-1
स्वर्णभूमि कॉलोनी निवासी सीए अंकित बांगर का ट्रांसपोर्टिंग का व्यवसाय है। वर्ष 2020-21 का इनकम टैक्स की जानकारी देते समय उन्हें पता चला कि किसी ने उनके पैनकार्ड का दुरूपयोग करते हुए जीएसटी नंबर रजिस्टर्ड करवा लिया है। उनके डिजीटल हस्ताक्षर के जरिए आयकर पोर्टल में करोड़ों रुपए के टर्नओवर की जानकारी भी अपलोड कर रखी है। यह सब कैसे हुआ? उन्हें पता भी नहीं चल पाया। पुलिस भी आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। इस केस में अंकित की पहचान से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज पैनकार्ड नंबर और हस्ताक्षर का नमूना चुराया गया था।

केस-2
डीवी प्रोजेक्ट लिमिटेड के सीएफओ सतीश कुमार सरावगी के अज्ञात व्यक्ति ने वाट्सऐप मैसेज करके 25 लाख से ज्यादा राशि अमन कुमार शर्मा के खाते में जमा करने के लिए कहा। मैसेज करने वाले के डीपी में सतीश के बॉस की फोटो लगी थी। डीपी के आधार पर सतीश ने उसे अपना बॉस मान लिया और दो अलग-अलग खातों में 55 लाख रुपए से ज्यादा जमा कर दिए थे। आरोपियों ने सतीश को यकीन दिलाने ऑफिस के लैंडलाइन नंबर पर भी फोन किया। इस केस में सतीश का मोबाइल नंबर, उनके बॉस का फोटो, ऑफिस का लैंडलाइन नंबर चुराया गया था।

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