Raipur News: सिंचाई कॉलोनी में नया आवासीय और कमर्शियल प्रोजेक्ट ड्राइंग डिजाइन नहीं बनने के कारण अटक गया है। नए प्रोजेक्ट के लिए दो साल पहले ही मकानों में तोड़फोड़ की गई।
Chhattisgarh News: रायपुर। सिंचाई कॉलोनी में नया आवासीय और कमर्शियल प्रोजेक्ट ड्राइंग डिजाइन नहीं बनने के कारण अटक गया है। नए प्रोजेक्ट के लिए दो साल पहले ही मकानों में तोड़फोड़ की गई। कॉलोनी में रहने वाले अफसरों को दूसरी जगह शिफ्ट भी कर दिया गया।इस कवायद के बाद प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया है। कुछ मकान पूरे तो कुछ आधे टूटे हैं।
शिकायत के बाद भी अवैध कब्जों पर कार्रवाई नहीं की गई
करीब 200 मकान में तोड़फोड़ शुरू नहीं हुई, लेकिन उनमें रहने वाले लोगों ने मकान खाली कर ताला लगाकर छोड़ दिया है। दो माह पहले 50 मकानों में अवैध कब्जा की शिकायत की गई थी। इसके बाद भी अभी तक न कब्जा हटाया गया है, न ही प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की कोई प्रक्रिया हुई है। अब एक माह बाद आचार संहिता लगा जाएगी। इसके बाद प्रोजेक्ट का कुछ भी होना संभव नहीं है।
बता दें कि कॉलोनी में सिर्फ चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को नवा रायपुर, अमलीडीह, कबीर नगर में भेज दिया गया था। 340 में 150 मकानों में बुलडोजर चला दिया गया है। तृतीय वर्ग के कर्मचारी तकरीबन 60 मकानों को खाली कर ताला लगाकर दूसरे जगहों में शिफ्ट हो गए।
सिर्फ कर्मचारियों के मकान पहले तोड़े
कॉलोनी में सबसे पहले चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों का मकान तोड़ा गया था। अभी भी अधिकारियों और तृतीय वर्ग के मकान नहीं टूटे हैं। इसके अलावा सिंचाई कॉलोनी की शुरुआत में बच्चों और बुजुर्गों के लिए बने गौरव गार्डन और तीरथगढ़ जलप्रपात की तर्ज पर बने वॉटरफाल को तोड़ दिया गया।
प्रशासन ने सिंचाई कॉलोनी को तोड़कर वहां कमर्शियल कांप्लेक्स बनाने की योजना बनाई है। शांतिनगर पुनर्विकास योजना (मल्टीस्टोरी काम्पलेक्स) पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति की रिपोर्ट को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
अधिकारियों के मकान अभी हिले तक नहीं
सिंचाई कॉलोनी में बनने वाली कमर्शियल कांप्लेक्स की ड्राइंग डिजाइन तैयार नहीं होने के कारण यह तय नहीं हो पा रहा है कि नए प्रोजेक्ट का स्वरूप कैसा होगा। इस वजह से तोड़फोड़ भी रोक दी गई है। शांतिनगर की जिस कॉलोनी को तोड़ा जा रहा है वह करीब 100 साल पुरानी है।
हाउसिंग बोर्ड ने अभी तक साढ़े 4 एकड़ जमीन ही खाली कराई है। बोर्ड अफसरों को अभी भी 11 और 14 कुल 25 एकड़ जमीन खाली करवानी है। इसके लिए 200 से ज्यादा मकानों को तोड़ना है। इसके बाद ही नया प्रोजेक्ट शुरू हो पाएगा। बचे हुए मकान कब तक हटेंगे अभी तक यह भी तय नहीं है।