
राजपरिवार ने बेटी की याद में दान कर दिया महल, आज वहीँ से चल रहा संगीत विश्वविद्यालय
खैरागढ़. छत्तीसगढ़ का एकमात्र संगीत नगरी जो राजधानी से 100 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। यह शहर कला प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। संगीत एवं कला विश्विद्यालय होने के कारण इस शहर को संगीत नगरी के रूप में भी पहचान मिली है। देश के कई राज्यों के साथ ही विदेश से भी छात्र यहां संगीत शिक्षा के लिए आते हैं।
यह है संगीत विश्वविद्यालय का इतिहास
खैरागढ़ रियासत की राजकुमारी इंदिरा जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय है उन्हें बाल उम्र से ही संगीत में रुचि थी। किसी कारणवश उनका बचपने में ही निधन हो गया। जिसके बाद खैरागढ़ रियासत के तत्कालीन शासक राजा बीरेंद्र बहादुर सिंह और उनकी पत्नी रानी पद्मावती देवी सिंह ने अपनी बेटी राजकुमारी 'इंदिरा' की स्मृति में संगीत और ललित कला विश्वविद्यालय की स्थापना 14 अक्टूबर 1956 में की।
एशिया का पहला संगीत विश्वविद्यालय
यह एशिया का पहला विश्वविद्यालय है जो पूरी तरह से संगीत, नृत्य, ललित कला और रंगमंच के विभिन्न रूपों के लिए समर्पित है। इसके साथ ही संस्था इस समय कलात्मक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
नेक (NAAC) द्वारा मिला ग्रेड 'ए'-
विश्वविद्यालय के प्रयासों का राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा वर्ष 2014 में मूल्यांकन किया गया जिसके बाद विश्वविद्यालय को ग्रेड 'ए' की मान्यता दी गई थी। जिसके बाद इसकी प्रसिद्धि बढ़ी और एडमिशन की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई।
राजपथ में भी दिखी थी झांकी
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2016 के लिए राज्य सरकार द्वारा सिलेक्शन बोर्ड के समक्ष 'कला और संगीत' विषय को प्रस्तावित किया गया। जिसे बोर्ड द्वारा स्वीकारा और सरकार ने विश्वविद्यालय की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय का थ्रीडी मॉडल झांकी राजपथ पर प्रदर्शित किया।
इन विषयों में यहां कर सकते हैं पढ़ाई
संगीत, चित्रकला, वादन, नृत्य, नाटक, मूर्तिकला, टेक्सटाइल डिजाइनिंग,इतिहास, लोकसंगीत आदि विषयों पर स्नातक से लेकर शोध तक की शिक्षा यहां कराई जाती है। अधिक जानकारी के लिए विश्विद्यालय की औपचारिक वेबसाइट विजिट कर सकते हैं।
Published on:
29 Apr 2022 08:47 pm

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