
RSS की चिंतन शिविर में पत्थलगड़ी का ताप साधने की कोशिश
रायपुर. पत्थलगड़ी आंदोलन से निकली आदिवासी समाज की नाराजगी की ‘तपिश’ ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पेशानी पर भी बल डाल दिए हैं। रायपुर के निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में दो दिन का चिंतन शिविर भारत की जनजातियों की अस्मिता और अस्तित्व विषय पर केंद्रित है, लेकिन मूल चर्चा पत्थलगड़ी को लेकर हुई। पूर्व विधायक गणेशराम भगत, लक्ष्मण मरकाम जैसे नेताओं ने पत्थलगड़ी के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखीं।
संघ के नेता झारखंड से निकले पत्थलगड़ी आंदोलन के सरगुजा के जशपुर पहुंचने को लेकर चिंतित थे। बस्तर से आए प्रतिनिधियों ने बताया कि संभाग के अंदरूनी क्षेत्रों तक में पत्थलगड़ी की आंच पहुंच गई है। गांवोंं में ग्राम सभा सर्वोपरि का नारा गूंजने लगा है। कई आदिवासी कार्यकर्ता इसे मिशनरीज और माओवादियों की गतिविधियों से ही जोड़ते रहे। उनका कहना था, संविधान के अनुच्छेदों के नाम पर आदिवासी समाज को गुमराह किया जा रहा है।
आरएसएस नेताओं की चिंता थी, यह आंदोलन समाज को सरकार के खिलाफ खड़ा कर देगा। इसका असर अगले चुनाव पर भी पड़ सकता है। इस मुद्दे पर संघ की रणनीति क्या होगी, इसका खुलासा बुधवार को मोहन भागवत के संबोधन में ही होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बैठक में वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदेव राम उरॉव, आरएसएस के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी, संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, डॉ. कृष्ण गोपाल, केंद्रीय जनजातीय कार्यमंत्री जोएल ओराम, केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नन्द कुमार साय, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेन्द्र यादव आदि मौजूद थे।
संघ के नेताओं ने आदिवासी क्षेत्रों में पंचायतों को स्वायत्तता देने वाले पेसा कानून और वन अधिकार कानून का समर्थन किया। उनका कहना था, इन क्षेत्रों में इनको मान्यता दी ही जानी चाहिए। शिविर के पहले दिन 4 सत्रों में पेसा कानून व इसका जनजातीय क्षेत्रों में क्रियान्वयन, वनाधिकार कानून और आरक्षण में समस्त जनजातीय समाज की भागीदारी कैसी सुनिश्चित हो इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई।
जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री जोएल ओराम ने पत्थलगड़ी आंदोलन को माओवादियों की भाषा बताया है। वनवासी कल्याण आश्रम के चिंतन शिविर में शामिल होने आए ओराम ने कहा, पेसा कानून के हिसाब से ग्रामसभा सर्वोपरि है, इसे मानना चाहिए। लेेकिन यह विकास कार्यों में मत देने के लिए है। ग्राम सभा को यह तय करना है कि वहां रोड बनेगा कि नहीं, बिजली आएगी कि नहीं, स्कूल बनेगा कि नहीं। तेंदुपत्ता का कारोबार कैसे करना है अथवा माइनिंग होगी कि नहीं, लेकिन सरकारी लोगों को, पुलिस वालों को घुसने नहीं देने की बात गलत है। पत्थलगड़ी के नाम पर आप सरकार का विरोध नहीं कर सकते। ओराम ने कहा, यह संविधान और देश विरोधी है। यह माओवादियों की भाषा है। ऐसा नहीं करना चाहिए।
Published on:
20 Jun 2018 11:34 am

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