मोदी सरकार की इस योजना से महिलाएं डूब गई कर्ज में, परेशान होकर बेचने पड़ रहे गहने

मोदी सरकार की इस योजना से महिलाएं डूब गई कर्ज में, परेशान होकर बेचने पड़ रहे गहने

Swachh Bharat abhiyan: महिलाओं के ऊपर कर्ज (Debt) का बोझ आ गया है। स्थिति यह हो गई कि कर्जदाता अपना कर्ज (Clean India Campaign) मांगने घर तक पहुंच रहे हैं।

रायपुर. स्वच्छ भारत (Swachh Bharat abhiyan) को लेकर मोदी सरकार (PM Modi govt) ने हर शौचालय (Toilet) का नारा दिया है। इसके लिए सरकार ने करोड़ों रुपए का बजट (Budget) भी तैयार किया है। लेकिन प्रदेश का यह पहला जिला (Balod district) होगा जहां महिलाएं शौचालय बनाकर कर्ज (Debt) में डूब गए हैं। सरकार के आदेशों के मुताबिक कर्ज लेकर घर में शौचालय तो बन गया, लेकिन महिलाओं के ऊपर कर्ज का बोझ आ गया है। स्थिति यह हो गई कि कर्जदाता अपना कर्ज मांगने घर (Clean India Campaign) तक पहुंच रहे हैं। यही नहीं बार-बार घर पहुंच (PM Narendra Modi) रहे लोगों का कर्ज चुकाने महिलाएं अब तो अपने सोने-चांदी के जेवरात तक बेच रही हैं। जेवरात बेचकर जो रुपए आ रहे है, उनसे अपना कर्ज चुका रहे हैं।

ग्रामीणों को शौचालय नहीं बनाने पर राशन कार्ड कट जाने की दी धमकी

Swachh Bharat abhiyan

यह मामला जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम बडग़ांव का है, जहां को ओडीएफ बनाने के लिए कुछ भी आदेश दिया गया। यहां जनपद और ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने मिलकर पहले तो ग्रामीणों को डराया कि शौचालय नहीं बनाओगे तो राशन कार्ड काट दिया जाएगा। ग्रामीणों ने कर्ज लेकर शौचालय तो बना दिया पर शौचालय की प्रोत्साहन राशि आज तक नहीं मिली है। अब ग्रामीण जिला कलक्टोरेट आकर शौचालय की प्रोत्साहन राशि दिलाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि गांव के सरपंच ने कर्ज चुकाने सोने-चांदी बेचने की बात को गलत बताया है।

राही बाई ने बेच दी ऐंठी व चांदी के जेवर
ग्रामीण हितग्राही राही बाई ने बताया कि वह शौचालय निर्माण के लिए उधार लेकर शौचालय बनाया, पर जिनसे उधार लिया था, वे तंग कर रहे हैं। मजबूरी में अपनी ऐंठी व चांदी के जेवर तक बेच दिए हैं और कर्ज चुकाया। वहीं महिलाओं ने गांव के सरपंच पर भी आरोप लगाया है कि उन्होंने शौचालय बनाने दबाव डाला और कहा कि, जो शौचालय नहीं बनाएगा, उसका राशन कार्ड काट दिया जाएगा।उनकी इस धमकी के बाद उन्होंने मजबूरी में कर्ज लेकर शौचालय बनाया। राशि की मांग करने वालों में गांव के राही बाई, हरिन बाई, निर्मल, अंकलहीन बाई, एवन बाई, संतरी, ललिता, उतरा, केकती, चमेली, गोदावरी, सुकारू, सीता बाई आदि उपस्थित रही।

नहीं मिली प्रोत्साहन राशि तो बकरा बेच चुकाया कर्ज
यह सुनने में जरूर अटपटा लगा रहा होगा कि कर्ज चुकाने के लिए सोने-चांदी के जेवरात और बकरा तक बेच दिए पर यह बिल्कुल सही है। ग्राम बडग़ांव की ग्रामीण अंकलहिन बाई ने बताया कि दो साल पहले ही गांव में शौचालय का निर्माण कराया था। ग्राम व जनपद पंचायत ने शौचालय अनिवार्य किया था। फिर आनन-फानन में जिनके पास रुपए नहीं थे, उन्होंने कर्ज लेकर शौचालय बनाया। शौचालय बनाने मिलने वाली प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। अब तक जिनसे कर्ज लिया है वह बार-बार पैसा मांग रहे हैं तो हताश होकर बकरा बेच दिया।

सरपंच बोले - 150 हितग्राहियों का बची है राशि
बालोद जिले के ग्राम पंचायत बडग़ांव के सरपंच दीपक ठाकुर ने बताया कि उनके ऊपर जो आरोप महिलाओं ने लगाया है, वह गलत है। शौचालय बनाने के बदले गांव के 150 हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि दी जानी है। अपने पास मात्र 80 हितग्राहियों को देने लायक ही राशि है। शासन की ओर से धीमी कार्रवाई से राशि भेजी जा रही है। अन्य हितग्राहियों की राशि आने पर एक साथ राशि देने की योजना थी। रही बात बकरा और सोने-चांदी के जेवर बेचकर कर्ज चुकाने की, मुझे नहीं लगता गांव में इस तरह की स्थिति निर्मित हुई हो। हालांकि महिलाएं ये बात जरूर बोल रही है।

 

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