बाल एवं वृद्ध श्रमिकों के प्रशिक्षण के नाम पर गोलमाल, नियम तोड़कर लाखों का भुगतान

चौंकाने वाली बात यह है इन भुगतानों के लिए कलेक्टर का अनुमोदन तक नहीं लिया गया। हकीकत यह है कि दोनों व्हीपीटी के द्वारा कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम किया ही नहीं गया। मामले की शिकायत वर्तमान के श्रम पदाधिकारी राजेश आदिले ने मामले की जांच कर कार्रवाई के लिए पत्र श्रमायुक्त को भेजा है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 18 Oct 2020, 10:55 PM IST

रायपुर. श्रम विभाग में श्रमिकों के कौशल विकास के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोपी अधिकारी इन फर्जीवाड़ों को अंजाम देने के लिए खुद श्रम विभाग के नियमों को दरकिनार कर दिया। जिससे गड़बड़ी करने वाले प्रशिक्षण कराने वाली संस्थाओं को लाखों का लाभ हुआ।

मामला मुंगेली जिले का है। जब इसकी जानकारी रायपुर में बैठे विभाग के आला अधिकारियों को मिली तो उन्होंने आरोपी अधिकारी को नोटिस जारी कर दिया। मामला यह है कि छत्तीगढ़ कर्मकार सन्ननिर्माण मंडल के नियमों के मुताबिक 18 वर्ष से कम आयु व 50 वर्ष से अधिक आयु रखने वाले श्रमिकों को किसी तरह का प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता। इसके बाद भी मुंगेली की श्रम पदाधिकारी द्वारा फर्जी तरीके से दो व्हीपीटी संवेदना विकास सेवा समिति को 8 लाख 57 हजार और एशियन स्कूल ऑफ इंग्लिश लेग्वेज को 3 लाख 18 हजार का भुगतान कर दिया गया।

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चौंकाने वाली बात यह है इन भुगतानों के लिए कलेक्टर का अनुमोदन तक नहीं लिया गया। हकीकत यह है कि दोनों व्हीपीटी के द्वारा कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम किया ही नहीं गया। मामले की शिकायत वर्तमान के श्रम पदाधिकारी राजेश आदिले ने मामले की जांच कर कार्रवाई के लिए पत्र श्रमायुक्त को भेजा है। हालांकि अब मामले में कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह महासमुंद के श्रम पदाधिकारी घनश्याम पाणिग्रही के खिलाफ भी मामले की जांच होने के बाद कार्रवाई नहीं हुई।

एक प्रशिक्षार्थी का दो बार नाम

पत्रिका को मिले दस्तावेज बताते हैं कि फर्जीवाड़ा करने के दौरान अधिकारी नें बड़ी लापरवाही बरती, जिससे मामले का खुलासा आरटीआई से मिले दस्तावेजों से हुआ है। एक प्रशिक्षार्थी जिसका सरल क्रमांक 21 और 22 भी है , दोनों जगह एक ही प्रशिक्षार्थी का नाम लिख कर प्रशिक्षण शुल्क निकाला गया।

न प्रशिक्षण मिला, न नौकरी लगाई

जिन दोनो व्हीपीटी के नाम से फर्जीवाड़ा किया गया उनका भुगतार करते समय शासन के दिशा निर्देश के मुताबिक छात्रों का उपस्थिति पत्रक विभाग में जमा करवाना था। इसके अलावा नियम यह है कि जितने भी प्रशिक्षार्थी प्रशिक्षण में शामिल हुए सभी को रोजगार उपलब्ध कराकर उसकी पूर्ण जानकारी विभाग को प्रस्तुत की जाए। ऐसा भी नहीं किया गया।

किया 700 मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़

मुंगेली की श्रम पदाधिकारी रहते हुए आरोपी महिला अधिकारी 10 फरवरी 2020 को एक फैक्ट्री के लिए 700 श्रमिकों का फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी कर दिया। यदि उक्त फर्म में कार्यरत मजदूर यदि किसी दुर्घटना के शिकार होते हैं तो फर्जी लाइसेंस होने से श्रमिकों को कोई लाभ नहीं मिल सकता। अवकाश में रहकर लाइसेंस जारी करना सिविल सेवा आचरण अधिनियम का उल्लंघन है।

मामले की रिपोर्ट मुख्यालय दो माह पहले भेज दी गई थी। पूर्व में पदस्थ अधिकारी ने अवकाश में रहकर अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया था। कार्रवाई मुख्यालय स्तर पर ही होगी।

-राजेश आदिले, श्रम प्रदाधिकारी

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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