
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विभाग गंभीर नहीं, अटकाया १८१ और ११२ का इंटीग्रेशन, तकनीकी प्रक्रिया पूरी हुई
रायपुर। महिला बाल विकास विभाग महिलाओं की सुरक्षा और सरंक्षण को लेकर गंभीर नहीं इस कारण ही डॉयल ११२ के साथ १८१ के इंटीग्रेशन के मामले को अटका रहा है। महिला हेल्प लाइन १८१ और ड़ॉयल ११२ में इंट्रीग्रेशन अब तक नहीं हो पाया, जबकि दोनों सेवाओं के तकनीकी विशेषज्ञों ने एक दूसरे के सॉफ्टवेयर को ओके भी कर दिया कि दोनों एक साथ जुड़ कर काम कर सकते है। डॉयल ११२ महिला बाल विकास से इंटीग्रेशन का एक प्रस्ताव चाह रहा है लेकिन विभाग ने आज तक प्रस्ताव बनाकर नहीं दिया। १८१ महिला हेल्प लाइन की नोडल एंजेसंी महिला बाल विकास ही है।
महिला की जानकारी लेने में ही पूरा समय निकल जाता है
महिला हेल्पलाइन की प्रभारी मनीषा तिवारी दत्ता ने बताया कि दिल्ली से १८१ की तकनीकी टीम ने आकर डॉयल ११२ को पूरी तरह समझा और यह भी कहा कि दोनों सिस्टम एक साथ इंटीग्रेट होकर काम कर सकते है। डॉयल ११२ का कहना है कि महिला बाल विकास हमें प्रस्ताव भेजे तो तुरंत इंटीग्रेशन हो जाएगा। महिला हेल्प लाइन की रायपुर की प्रभारी कहती हंै कि अभी हो यह रहा है कि महिला के किसी भी मामले में हमारे स्टॉफ का पूरा समय यह पता करने में ही निकल जाता है कि महिला का क्या हुआ, उसे मदद मिल पाई की नहीं, क्योंकि हमें हर बार ११२ से ही जानकारी लेनी पड़ती है और ११२ हर बार नए एक ही केस को, नए केस में दर्ज करता है। हम उस महिला की पूरी मदद ही नहीं कर पाते है।
१८१ की प्रभारी ने बताया कि मंगलवार को ही हमने बिलासपुर से एक महिला को सिम्स में भर्ती कराया और जब हमने बाद में यह जानना चाहा कि उस महिला का क्या हुआ तो ११२ के पास कोई जानकारी नहीं थी यहां तक कि १०८ के लिए भी हमें पहले ११२ को ही कॉल करना पड़ता है। बाद में हमने सिम्स बिलासपुर में फोन करके पूछा तो हमें पता चला कि किसी भी महिला को यहां उस समय भर्ती नहीं किया है इस तरह फिर एक महिला को मदद नहीं मिल पाई। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है ऐसा अक्सर होता है। इस कारण महिला हेल्प लाइन और डॉयल ११२ का इंट्रीग्रेशन बहुत जरूरी है।
अभी सारा काम मेन्युअली ही हो रहा था, यदि 112 इंटीग्रेट होकर काम करता तो महिला के केस की सारी जानकारी 181 और सखी सेंटर ऑनलाइन ही देख लेते, उन्हें किसी से महिला की डिटेल लेने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है इस कारण ही महिलाओं और बच्चियों से अत्याचार और दुष्कर्म के मामले बढ़ रहे हैं। 3 साल में सिर्फ साढ़े 6 हजार मामले ही 181 तक पहुंचे है, जिसमें से साढ़े 3 हजार मामलों में महिलाओं को न्याय मिला है।
- जल्द ही प्रस्ताव बनाया जाएगा
महिला हेल्प लाइन १८१ और डॉयल ११२ का इंटीग्रेशन होने से महिलाओं को फायदा होगा। हम जल्द ही इसका प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे। कुछ दिन पहले हमारी महिला सुरक्षा को लेकर बैठक भी हुई थी।
जनमजेय महोबे, संचालक महिला बाल विकास विभाग
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इंटीग्रेशन की अंतिम कार्यवाही चल रही है
इंटीग्रेशन नहीं हुआ है, लेकिन महिला हेल्प लाइन १८१ और डॉयल ११२ की तकनीकी विशेषज्ञों ने एक दूसरे के सॉफ्वेयर को समझ लिया है। अब सर्विस प्रोवाइडर के यहां अंतिम कार्यवाई चल रही है। हम तो स्वंय चाहते है कि जल्द ही इंटीग्रेशन हो ।
आर. के. विज एडीजी, डॉयल ११२ प्रभारी
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Published on:
30 Jan 2020 09:02 pm

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