आदिवासी कृषक महिलाओं ने एक माह में बेचे दो लाख कीमत के साबुन

हस्त निर्मित साबुन में सगंध के लिए केवीके प्रक्षेत्र में स्थापित आसवन संयंत्र से निकले लेमन ग्रास, पामारोसा, हल्दी, खस के सुगन्धित तेल का उपयोग किया जा रहा है तथा प्राकृतिक रंग के लिए सिंदूर के बीज, हल्दी एवं अपराजिता के फूलों आदि का उपयोग किया जा रहा है।

By: bhemendra yadav

Updated: 03 Mar 2021, 09:55 PM IST

कोरिया. जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी मार्गदर्शन में किसान उत्पादक संगठन एवं स्व-सहायता समूह गणेश, सलका, बैकुंठपुर एवं ओम नम: शिवाय स्व-सहायता समूह, लोहारी, मनेंद्रगढ द्वारा 8 प्रकार के हस्त निर्मित साबुन जैसे लेमन ग्रास और सिंदूर, लेमन ग्रास और हल्दी, पामारोसा और सिंदूर, पामारोसा और हल्दी, लेमन ग्रास और अपराजिता, पामारोसा और अपराजिता, खस और सिंदूर, खस और हल्दी का निर्माण किया जा रहा है।

हस्त निर्मित साबुन में सगंध के लिए केवीके प्रक्षेत्र में स्थापित आसवन संयंत्र से निकले लेमन ग्रास, पामारोसा, हल्दी, खस के सुगन्धित तेल का उपयोग किया जा रहा है तथा प्राकृतिक रंग के लिए सिंदूर के बीज, हल्दी एवं अपराजिता के फूलों आदि का उपयोग किया जा रहा है।

दोनों समूहों की महिलाओं में द्वारा अब तक दो-दो हजार विभिन्न प्रकार के साबुन का निर्माण के साथ-साथ पैकिंग का कार्य भी किया गया है, एक साबुन की कीमत 50 रूपये एवं वजन 100 ग्राम है। अभी तक एक माह में लगभग दो लाख रूपये कीमत की साबुन बेची जा चुकी है, जिसमें किसान उत्पादक संगठन (कोरिया एग्रो प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड) को रूपये 18 हजार 400 एवं दोनों स्व-सहायता समूहों को दस-दस हजार का शुद्ध लाभ अर्जित किया और वर्तमान में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, रायपुर से विभिन्न प्रकार के दो हजार साबुन की मांग आई है जिसे समूहों की महिलओं दूवारा निर्माण के साथ-साथ पैकिंग का कार्य भी किया जा रहा है, जो की एक लाख रूपये कीमत की मांग है।

इस प्रकार भविष्य में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं प्रति माह लगभग 6000-7500 हजार साबुन का निर्माण कर 30 हजार से 37 हजार रूपये की आमदनी अर्जित करेगी और किसान उत्पादक संगठन (कोरिया एग्रो प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड) को प्रति माह लगभग 27600 से 34500 रूपये का लाभ प्राप्त होगा। आदिवासी कृषक महिलाओं को कृषि विज्ञान केंद्र, कोरिया के तकनिकी मार्गदर्शन में महिलाये आत्मनिर्भर एवं स्वरोजगार से अपनी आमदनी बढ़ा रही है। हस्त निर्मित साबुन को किसान उत्पादक संगठन के दूवारा विभिन्न संस्थाओ जैसे- ट्राईफेड, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड एवं हस्त शिल्प विकास बोर्ड से देश के विभिन्न राज्यों में बेचा जा रहा है।

कृषि विज्ञान केंद्र कोरिया के वैज्ञानिक केशव चंद्र राजहंस, पांडुरंग बोबडे एवं पी सी कँवर निरंतर इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सगंध व मसाला फसलों के उत्कृष्टता केंद्र तथा सुपारी व मसाला निदेशालय (भारत सरकार) से कोरिया जिले में सगंध एवं मसाला फसलों की उन्नत खेती, प्रसंस्करण व मूल्य वर्धन की संभावनाओं पर प्रक्षेत्र परीक्षण, प्रदर्शन व प्रशिक्षण के माध्यम से कृषकों के मध्य तकनिकी का प्रचार प्रसार कर रहे है।

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