हम बदले, जीने का अंदाज बदला और बदलता जा रहा है का काम-काज का तरीका

- जानें, हम-सबने कैसे सीखा महामारी के दौर में जीना ...

By: Bhupesh Tripathi

Published: 18 Sep 2020, 09:45 PM IST

रायपुर. कोरोना महामारी ने सबकुछ बदलकर रख दिया। या यूं कहें कि इंसान 360 डिग्री बदल गया। जीने का अंदाज बदला, काम-काज का तरीका बदला, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन से लेकर हर क्षेत्र ने खुद को समय की मांग के हिसाब से बदल लिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह नया दौर है, एक नए युग की शुरुआत है। अगर, इस महामारी से जंग जीतनी है तो बदलाव करना ही होगा। समझना होगा कि अभी हम वायरस को तभी हरा सकते हैं जब हम नियमों से चलेंगे। हालांकि इस दौर में भारत समेत पूरी दुनिया को भारी-भरकम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मगर, कहते हैं की जी है तो जहान है...।

हर वर्ग के लोगों से समझा और फिर इस निचोड़ पर पहुंचे
घर- इस दौर में जिंदगियां कई बार, कई-कई दिनों तक घरों में कैद हुईं। कम साधन-संसाधनों में लोगों ने जीना सीखा। यानी थोड़े में गुजारा कैसे किया जाता है, यह जाना। मॉस्क लगाकर जीना सीखा। सेनिटाइजर से हाथ धोना सीखा। घर के बाहर जाने पर चीजों को छूने की आदत कम हुई। मेल-मुलाकात सीमित हुई। घरों में रहने का बहुत समय मिला और मिल रहा है। इसके चलते परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरों को बहुत करीब से जाना। अपनी के प्रति जिम्मेदारियां और बढ़ गईं।

दफ्तर- ऑफिस कल्चर में 360 डिग्री का बदलाव आ गया। जो काम ऑफिस जाकर करते थे, वह अब घर से होना लगा यानी वर्क फ्रॉम होम का कल्चर 70 प्रतिशत संस्थानों ने स्वीकार किया। हालांकि इस काल में कारखाने, उद्योग, दुकानें, रियल इस्टेट समेत कई सेक्टरों का भारी से बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ा। ये बंद हो गए। नौकरियां चली गईं। झटनी और वेतन में कटौती जैसे दिन भी लोगों को देखने पड़ रहे हैं। आर्थिक स्थिति बेपटरी है।

शिक्षा- महामारी में स्कूल- कॉलेज बंद हैं। मगर, सत्र बर्बाद न हो, इसका विकल्प ऑन-लाइन क्लासेस के जरिए निकाला गया है। पढ़ाई जारी है। कई बड़ी परीक्षाएं जैसे नीट भी संपन्न करवाई गई। क्योंकि प्रदेश में जिस गति से मरीज मिल रहे हैं, उससे आने वाले 1- 2 महीने में स्कूल-कॉलेज खुलेंगे ऐसी स्थिति फिलहाल नहीं दिख रही। हालांकि कई स्कूली कक्षाओं में जनरल प्रोमेशन दिए गए। कॉलेजों में भी छात्रों को जनरल प्रोमेशन मिले। मगर, प्रोफेशनल कोर्सेस जैसे चिकित्सा शिक्षा की परीक्षाएं करवाई जा रही हैं।

चिकित्सा- बीमारी है तो तय है कि चिकित्सा यानी स्वास्थ्य की सबसे बड़ी भूमिका होगी ही। बीमारी जब महामारी का रूप ले ले तो सोचिए क्या होगा? ऐसी स्थिति में डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ सबने मोर्चा संभाला और इलाज में जुट गए। ये संक्रमित हो रहे हैं, कुछ साथ बीमारी का शिकार भी हुए, मगर ये इलाज मुहैया करवाने से पीछे नहीं हटे। साधन-संसाधन बहुत सीमित हैं। बेड कम पड़ रहे हैं। ऑक्सीजन युक्त बेड, आईसीयू और वेंटीलेटर की कमी है। मेडिकल स्टाफ को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। मगर ये डटे हुए हैं।

परिवहन- संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी था और है, परिवहन का कम से कम होना। यही कारण था कि प्लेन, ट्रेन, बसों के संचालन पर रोक लगा दी गई। यहां तक की एक शहर से दूसरे शहर तक जाने पर भी पाबंधी थी। मगर, वक्त के साथ फिर बदलाव हुआ। सुरक्षा के साथ ये सब दोबारा शुरू कर दिए गए हैं। क्योंकि कब तक आवागमन को रोका जा सकता है। आर्थिक संकट को देखते हुए इन्हें सुचारू रूप से चलाना जरूरी है। परिवहन बंद होने से बहुत नुकसान भी हुआ।

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