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World Hindi Day 2023: मोबाइल क्रांति ने हिंदी को एक नई दिशा दी है। हिंदी न सिर्फ भावनाओं को व्यक्त करने वाली भाषा है बल्कि एकता का भी प्रतीक है। सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद इसने देश को एक सूत्र में बांध रखा है। हिंदी लगातार बढ़ रही है। हिंदी का दायरा नए फलक तक पहुंच चुका है।
पहला हिंदी दिवस (Vishwa Hindi Diwas ) सम्मेलन 10 जनवरी 1974 को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित हुआ था। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर का था, जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी का प्रसार-प्रचार करना था। तब से विश्व हिंदी दिवस इसी तारीख यानी 10 जनवरी को मनाया जाने लगा।बाद में यूरोपीय देश नार्वे के भारतीय दूतावास ने पहली बार विश्व हिंदी दिवस मनाया था।
हिंदी में मिले सर्वोच्च अंक
बालोद कलेक्टर गौरव सिंह हिंदी साहित्य के छात्र रहे हैं। हालांकि बीटेक और एमटेक के लिए इंग्लिश जरूरी थी। जर्मनी में फेलोशिप भी मिली। इन सबके बावजूद मातृभाषा हिंदी के प्रति प्रेम बना रहा। 2012 में यूपीएससी में हिंदी को प्रमुख विषय रखा और 334 अंक के साथ सफल हुए। वे उस समय हिंदी में सर्वोच्च अंक के साथ आईएएस बने। वे मानते हैं कि प्रशासनिक सेवा में आने का सपना हिंदी से होकर ही निकला। उनका कहना है अंग्रेजी से कोई बैर नहीं है लेकिन जहां बात हिंदी में पूरी हो सकती है वहां इसी का उपयोग किया जाना चाहिए। हालांकि किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भाषा नहीं आपका जुनून मायने रखता है।
सूचना बोर्ड में "आज का शब्द"
राजधानी के कोटा निवासी मिथिलेश शर्मा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की भुवनेश्वर शाखा में आला अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुए हैं। वे कुछ वर्षों से अहिन्दी भाषा क्षेत्र में हिंदी के प्रसार-प्रचार के लिए सम्मानित होते रहे। वे बताते हैं, कार्यालय में मैं प्रतिदिन सूचना बोर्ड में "आज का शब्द" लिखता था। जिसमें बैंकिंग के अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी अनुवाद लिखा जाता है। मैं आज भी हिन्दी में हस्ताक्षर करता हूं।
Published on:
10 Jan 2023 12:03 pm

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