तेंदूपत्ता श्रमिक को जूते-पहनने से पैरों में हुई जलन और खुजली

तेंदूपत्ता श्रमिक को जूते-पहनने से पैरों में हुई जलन और खुजली

Manoj Awasthi | Publish: Sep, 05 2018 11:16:17 AM (IST) Raisen, Madhya Pradesh, India

तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटे गए जूते चप्पलों से कैंसर जैसी घातक बीमारी होने का मजदूरों में भय बरकरार है।

रायसेन. तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटे गए जूते चप्पलों से कैंसर जैसी घातक बीमारी होने का मजदूरों में भय बरकरार है। इसी मामले का एक ताजा उदाहरण मंगलवार को तहसील रायसेन के मासेर गांव के एक मजदूर का सामने आया। प्र्राप्त जानकारी के मुताबिक मूलत: लालकुआं रतलाम जिले के निवासी २८ वर्षीय खेतिहर मजदूरी करने वाले शांतिलाल भील पुत्र हीरालाल रायसेन तहसील के मासेर गांव में एक खेत मालिक के यहां सालों से काम कर रहा है।

मजदूर शांतिलाल ने बताया कि वह अपने गृह जिले रतलाम मे तेंदूपत्ता तोडऩे का काम करता है। वह करीब सवा महीने पूर्व अपने गृह गांव रतलाम जिले में गया था। वहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार प्रभारी मंत्री सहित सांसद, विधायकों द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस, साडिय़ां, पानी की बाटलें और जूते-चप्पलों का वितरण किया था। तो इस आयोजन में मजदूर शांतिलाल भील को भी एक जोड़ी जूते नि:शुल्क मिले थे। इन जूतों को पहनकर खेतिहर मजदूर
शांतिलाल भील मासेर आ गया। उसने इन जूतों को करीब महीने भर पहना भी है।

मजदूर ने मंगलवार को दोपहर में मीडिया से चर्चा मेें बताया कि जब इन जूतों को पहनने से दोनों पैरों में खुजली व जलन होना शुरू हो गई। तो उसने पंद्रह दिनों से इन जूतों को पहनना छोड़ दिया। जूतों को एक पॉलीथिन में बांधकर घर रख दिया है।

दर्द और खुजली से मजदूर परेशान
पहले मजदूर शांतिलाल भील ने जिला अस्पताल में इलाज कराया। लेकिन उसे कोई आराम नहीं लगा और उसकी मजदूरी भी छूट गई है। परेशान मजदूर ने कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई सहित विभागीय अधिकारियों को शिकायत की थी। लेकिन शिकायत को कोई तवज्जो नहीं दी गई। मंगलवार को वह खेत मालिक से रुपए उधार लेकर जिला अस्पताल में डॉ. एमएल अहिरवार से इलाज कराने गया।

जिले की तहसील गैरतगंज के गढ़ी हैदरी, पीपरपानी, खैरखेड़ी में भी तेंदूपत्ता बोनस के मजदूरों व संग्राहकों को इस तरह की शिकायतें जब होने लगी तो उन्होंने जूते चप्पलों को ही पहनना छोड़ दिया है। विभाग के अधिकारियों से लेकर वन अमला भी फिलहाल इस सारे घटनाक्रम से पेशोपेश में हैं। लेकिन इस सच्चाई को छुपाने के लिए सरकार के मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले को विपक्षी पार्टियों की साजिश करार दे रहे हैं।

सरकार आर्थिक सहायता दे
मंगलवार को दोपहर में वह खेत मालिक अकरम पठान से कर्ज लेकर उपचार कराने दोबारा रायसेन पहुंचा।उसने मीडिया कर्मियों को बताया कि वह उसके परिवार में पत्नी शांति बाई सहित तीन लडक़ों व एक लडक़ी का पेट पाल रहा है। उसने मप्र सरकार से मदद व इलाज कराने की गुहार लगाई है। मजदूर का कहना है कि रतलाम में कई गरीब महिला-पुरुष मजदूर इन जूते चप्पलों के पहननेे से दोनों पैरों में जलन व खुजली की समस्या से जूझ रहे हैं।

 

- यह प्रदेश स्तरीय मामला है। हमने तो विभागीय अधिकारियों के आदेश पर तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते चप्पलें सहित पानी की बॉटलें, साडिय़ां वितरित की है। अब अगर जूते चप्पलों में कोई शिकायतें आ रही हैं। तो इसमें हमारा क्या कसूर है?
नरेंद्र कुमार चौहान, रेंजर रायसेन

- तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते चप्पलों को बांटने का काम मप्र सरकार ने किया है। इन जूते-चप्पलों के पहनने से मजदूरों को कैंसर होने की शिकायतें लगातर मिल रही हैं। प्रभावित मजदूरों को आर्थिक सहायता राशि दिलाने व इलाज की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार को निभाना चाहिए। तहसील रायसेन के मासेर गांव के खेतिहर मजदूर शांतिलाल भील के लिए भी समुचित इलाज के बंदोबश्त कराए जाएं।?
डॉ. प्रभुराम चौधरी, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक

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