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बच्चों को नंगे पैर देखकर मन रोया, फिर किया ऐसा काम बन गए मिसाल...पढ़े पूरी खबर

locationराजसमंदPublished: Feb 03, 2024 11:22:37 am

Submitted by:

himanshu dhawal

राजसमंद. पाने वाले प्रभु और देने वाले प्रभु हम तो निमित मात्र है। इसी भावना के चलते मिशन चरण पादूका राजसमंद ने अब तक 15 हजार से अधिक बच्चों के पैरों तक जूते चप्पल पहुंचा दिए। मिशन के तहत जरूरतमंद बच्चों की सूची भामाशाह एवं सहयोग करने वालों को उपलब्ध कराई जाती है। वह ही अपने स्तर पर जूते-चप्पल खरीदकर बच्चों तक, उनकी स्कूल या आंगनबाड़ी तक पहुंचा देते हैं।

बच्चों को नंगे पैर देखकर मन रोया, फिर किया ऐसा काम बन गए मिसाल...पढ़े पूरी खबर
मिशन चरण पादुका के तहत बच्चों के पैर धोकर चप्पल पहनाते हुए
इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें रुपयों का लेन-देन नहीं होता। भामाशाह अपनी इच्छा और श्रद्धा के अनुसार जूते-चप्पल स्वयं खरीदकर अथवा किसी के माध्यम बच्चों तक पहुंचा देते हैं। इसलिए इस अभियान के जुड़े लोग अपने आप को निमित मात्र कहते हैं। इस मिशन में कई आरएएस अधिकारी, अधिकारी, शिक्षक आदि जुड़े हुए हैं। इसमें कई सहयोग करने वाले कई लोग अपना नाम तक सामने नहीं आने देते हैं। नंगे पैर घूमने वाले बच्चों के पैरों में नए जूते और मौजे मिलने पर बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है।
यूं हुई इस अभियान की शुरूआत
जिला परिषद में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में जिला समन्यवक नानालाल सालवी मई 2023 में काम के चलते देलवाड़ा स्थित नेड़च पंचायत गए थे। वहां पर 10-12 बच्चे नंगे पांव खड़े थे। सालवी ने उनसे नंगे पैर होने के कारण पूछा तो बच्चों ने कहा कि हमारे जूते-चप्पल नहीं है। इस पर उन्होंने उन बच्चों के नंगे पैरों की फोटो खीची और सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाकर लिखा की हम इन बच्चों के लिए क्या कर सकते हैं। इसे देखते ही जीएसटी में राज्य कर अधिकारी आशा गवारिया ने उन्हें तुरंत फोन किया और उन बच्चों तक जूते-चप्पल पहुंचाने की इच्छा जाहिर की। वह 14 मई 2023 को बच्चों के लिए 50 जोड़ी जूते-चप्पल लेकर पहुंचे तो बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसके बाद से यह अभियान लगातार अब तक जारी है।
यूं बनता गया कारवा
इस अभियान की खास बात यह है कि इसमें अधिकांश लोग अपनी स्वैच्छा से जुड़े हैं। इसे सेवालय नाम दिया गया। इस अभियान से जुड़ी बैंक मैनेजर नेहाराव, सहकारिता विभाग में कार्यरत जितेन्द्र शर्मा, केशव सांचीहर, अध्यापिका वीणा वैष्णव, एलडीसी मुबारिक खान सिंधी, जया जोशी, रेखा चनिया और प्रगति सहित कई लोग इस अभियान से जुड़े हैं।
भामाशाह को प्रेरित कर पहुंचा रहे जूते-चप्पल
जिले के भोपाजी भागल में कार्यरत अध्यापक कृष्ण गोपाल गुर्जर ने भामाशाहों को प्रेरित कर करीब 7 हजार से अधिक बच्चों को जूते-चप्पल, स्वेटर आदि पहुंचा चुके हैं। नेहरू युवा केन्द्र के प्रकाश खटीक भी भामाशाह के सहयोग से साढ़े तीन हजार से अधिक बच्चों तक एवं चरण पादुका से जुड़े सदस्य भी 5 हजार से अधिक बच्चों तक जूते-चप्पल पहुंचा चुके हैं।
समारोह में खर्च होने वाले राशि से पहुंचाई चरण पादुका
वर्तमान में एसबीआई उदयपुर में ब्रांच मैनेजर नेहाराव ने बताया कि उनके पिता सेवानिवृत हुए। उन्होंने समारोह नहीं करने का निर्णय लिया। इसकी जगह समारोह में खर्च होने वाली राशि से जरूरतमंद बच्चों तक जूते-चप्पल और स्वेटर आदि उपलब्ध कराए। इसी प्रकार माता-पिता की वर्षगांठ पर, बच्चे के जन्मदिन पर भी ऐसा ही किया। इसी प्रकार इस अभियान जुड़े अन्य लोग भी जरूरतमंद बच्चों के बीच जाकर खुशी देने का प्रयास करते हैं।

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