भुगतान अटका, अध्यापकों से उगाही

दूध एवं मिड-डे-मील की बाकी है राशि

 

By: Aswani

Published: 09 Apr 2020, 10:36 AM IST

अश्वनी प्रतापसिंह

राजसमंद. कोरोना महामारी के लिए बंद किए गए विद्यालयों के साथ की विद्यालयों में अन्नपूर्णा दूध एवं मिड-डे-मील बंद हो गया। ऐसे में दूध सप्लाई करने वाले एवं राशन सामग्री देने वाले किराना व्यापारी बकाया राशि को लेकर शिक्षकों को कॉल कर रहे हैं। राजकीय विद्यालयों में अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत बच्चों को दूध वितरण किया जाता है। विद्यालयों में यह दूध शिक्षकों द्वारा डेरियों से क्रय किया जाता है। लेकिन इन दिनों विद्यालयों में दूध की सप्लाई बंद होने से दूध विक्रेता अपने पेमेंट को लेकर चिंतित हो रहे हैं। वहीं दोपहर में दिये जाने वाले भोजन में मिड-डे-मील आयुक्तालय द्वारा गेंहू एवं चावल की सप्लाई तो की जाती लेकिन फल, सब्जी, दाल, तेल एवं मसाले के लिए कुकिंग कन्वर्जन राशि दी जाती है। इस राशि से शिक्षक बाजार से फल, सब्जी, दाल, तेल एवं मसाले की सामग्री खरीदते हैं। यह सामग्री भी शिक्षक बाजार से अपने विश्वास पर उधार खरीदते हैं। बाद में विभाग द्वारा इसका भुगतान किया जाता है। लेकिन इन दिनों विद्यालयों के बंद होने से दूध विक्रेता, किराना व्यापारी एवं फल सब्जी विक्रेता शिक्षकों को फोन कर बकाया राशि का भुगतान करने के लिए आग्रह कर रहे हैं। शिक्षकों की समस्या यह है कि इन दिनों लॉकडाउन के दौरान विभाग की ओर से राशि विद्यालयों को स्थानान्तरित नहीं की गई। ऐसे में इन व्यापारियों को भुगतान कैसे किया जाएगा।


हजारों का भुगतान बकाया
विद्यालयों में दूध एवं मिड-डे-मील की सामग्री का हजारों का भुगतान बकाया है। सरकार द्वारा विभिन्न भुगतान के स्थगन के बाद जिन व्यापारियों को विद्यालयों में बकाया है उनकी चिंता बढ़ गई। व्यापारियों को चिंता सता रही है कि कहीं सरकार ने मिड-डे-मील एवं दूध के भुगतान को भी स्थगित कर दिया तो उन्हे बकाया मिलने में महीनों लग सकते हंै। ऐसे में व्यापारी शिक्षकों को फोन कर भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। अब शिक्षकों के साथ दुविधा यह है कि वे अपनी वेदना किस को बताएं।
अक्षय पात्र का हुआ, हमारा क्यों अटकाया?
इधर मार्च माह के अंत में जिन विद्यालयों में अक्षय पात्र फाउण्डेशन की ओर से पोषाहार वितरण एवं दूध की सप्लाई की जा रही थी उसका भुगतान कर दिया। लेकिन जिन विद्यालयों ंमें एसएमसी की ओर से पोषाहार एवं दूध वितरण किया जा रहा है। उनका भुगतान अभी तक नहीं हुआ। ऐसे में शिक्षक व्यापारियों के सवालों से परेशान हो रहे है।


कुक कम हेल्परों का भी अटका भुगतान
इधर स्कूलों में अल्प मानदेय में काम कर रही कुक कम हेल्परों के मानदेय का भी भुगतान करीब ५ माह से अटका है। पहले से ही उनका मानदेय बहुत कम है और उसे भी पांच माह से रोक लेने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। वहीं लॉकडाउन होने से उनकी समस्या और बढ़ गई है।


शीघ्र भुगतान होगा...
हां समस्या तो है, लेकिन अब शीघ्र ही सभी का भुगतान करवाया जाएगा। इसके लिए बात चल रही है कोई रास्ता निकालेंगे।
-ओमशंकर श्रीमाली, डीईओ, (माध्यमिक) राजसमंद

Aswani Reporting
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