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रतलाम। विधानसभा चुनाव 2018 का आगाज हो चूका है। जब किसी पार्टी या कोई मुद्दे की लहर चलती है तब किसी एक पार्टी को अतिरिक्त लाभ होता है। लेकिन वर्ष 1990 का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प था। यहां पर विधानसभा सीट रतलाम ग्रामीण पर नजर डाले तो यहां पर आपातकाल के बाद कांगे्रस के प्रति रुझान भाजपा के मुकाबले अधिक रहा है। जब वर्ष 1990 में पूरे राज्य में राममंदिर आंदोलन की नजर थी, तब उज्जैन संभाग में एकमात्र सीट रतलाम ग्रामीण की कांगे्रस को मिली थी। इन सब के बाद भी यहां मतदाता वोट के प्रतिशत को स्ंिवग करते रहते है।
आपातकाल के बाद खुला था खातावर्ष 1977 में आपातकाल के बाद पहली बार ग्रामीण सीट से गैर कांगे्रसी विधायक की जीत हुई थी। यहां से सूरजमल जैन ने कांगे्रस के हरिरात पाटीदार को चुनाव में हराया था। जब जनसंघ के जैन को 55.68 तो कांगे्रस के पाटीदार को 33.96 प्रतिशत वोट मिले थे। प्रतिशत में अंतर के इस रिकार्ड को भाजपा ने ही 2013 में 55.94 प्रतिशत वोट पाकर तोड़ा।
संभाग में मिली थी सिर्फ एक सीट
वर्ष 1990 में जब देश के साथ-साथ पूरे प्रदेश में राममंदिर का आंदोलन चल रहा था, तब भाजपा को राम लहर से चुनाव में लाभ हुआ था। तब उज्जैन संभाग में कांगे्रस को सिर्फ एक सीट मिली थी। संभाग में कांगे्रस के रतलाम ग्रामीण में कांगे्रस के मोतीलाल दवे पहली बार चुनाव में जीते थे। ये जीत न सिर्फ भाजपा, बल्कि तब कांगे्रस के लिए भी अप्रत्याशीत थी, क्योकि पार्टी ने पहली बार दवे को टिकट दिया था व वे बड़े अंतर से चुनाव जीते थे। इसके बाद वे कई चुनाव में जीते।
मंत्री बनाया था दिग्विजय सिंह ने
बाद में ग्रामीण सीट से जितने वाले कांगे्रस के मोतीलाल दवे को दिग्विजयसिंह ने अपने मंत्रीमंडल में जगह दी। दवे को धर्मस्व मंत्री बनाया गया। एेसा नहीं है कि सिर्फ कांगे्रस के समय ग्रामीण सीट से जितने वाले को मंत्री पद दिया हो। वर्ष 2003 में पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे धुलजी चौधरी को उमा भारती सरकार में कृषिमंत्री की जिम्मेदारी मिली थी।
इस तरह समझे वोट का प्रतिशत
चुनावी वर्ष कांगे्रस- जनसंघ/भाजपा
1977-33.96-55.68
1980-45.48-35.04
1985-54.48-42.16
1990-50.76-44.40
1993-52.81-45.25
1998-50.08-46.89
2003-41.39-49.99
2008-45.88-43.37
2013-36.44-55.94
Published on:
21 Oct 2018, 8:02 PM IST
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