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बहुत दिल दुखाती है यह नजदीकी हार

locationरतलामPublished: Oct 30, 2023 10:27:32 pm

वर्ष 1962 से लेकर 2018 तक के विधानसभा चुनाव का लेखाजोखा
रतलाम, नीमच व मंदसौर जिले की विधानसभा सीटों की स्थितिकांटे की टक्कर और एक बूथ ने हरा दिया

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रतलाम। चुनावों में जीत-हार एक से लेकर हजारों-लाखों वोटों तक भी होती है, लेकिन नजदीक से हार बहुत दिल दुखाती है। चुनाव में एक-एक वोट की भी कीमत होती है। इसके कई उदाहरण भरे पड़े हैं। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार एक मत से गिर गई तो वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के दावेदार सीपी जोशी एक मत से चुनाव हार गए और उसके बाद कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। वर्ष 1993 में नीमच विधानसभा सीट से बालकृष्ण वैरागी मात्र 66 मतों से पराजित हुए। वर्ष 1962 से लेकर 2018 तक के विधानसभा चुनाव का लेखाजोखा देखें तो रतलाम, नीमच व मंदसौर में 13 ऐसे प्रत्याशी रहे, जिनकी हार का अंतर 1000 मतों से कम रहा। दो प्रत्याशी का अंतर 300 मतों से भी कम रहा।1962 में गरोठ व मनासा से शुरूआत
कम अंतर से हार की शुरुआत वर्ष 1962 में गरोठ व मनासा से हुई। गरोठ में जनसंघ के मोहनलाल ने कांग्रेस के माणकलाल को 955 मतों से हराया तो मनासा में जनसंघ के सुंदरलाल ने कांग्रेस के सूरजमल को 880 मतों से शिकस्त दी। मनासा में ही अगले चुनाव में कांग्रेस के नंदरामदास (बालकवि बैरागी) ने इस हिसाब का चुकता किया और भारतीय जनसंघ के सुंदरलाल को 711 मतों से मात दी।आलोट में 219 मतों से हार
वर्ष 1972 के विधानसभा चुनाव में आलोट सीट पर कांग्रेस की लीलादेवी चौधरी ने भारतीय जनसंघ के नवरतन सांखला को केवल 219 मतों से हराया। इसी वर्ष सुवासरा में भी कांग्रेस के रामगोपाल भारतीय 416 मतों से ही जीत पाए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के चंपालाल आर्य को पराजित किया।सुवासरा में 335 मतों की हार
वर्ष 1980 के चुनाव में गरोठ में भाजपा के मोहनलाल सेठिया से कांग्रेस आई के सत्यनारायण चौबे 961, नीमच में कांग्रेस आई के रघुनंदनप्रसाद से भाजपा के खुमान सिंह शिवाजी 644, सीतामऊ में भाजपा के कैलाश चावला से कांग्रेस आई के धनसुखलाल 509 और सुवासरा में भाजपा के चंपालाल आर्य से कांग्रेस आई के मदनलाल मात्र 335 मतों से चुनाव हार गए।…और 66 मतों से हार गए बैरागी
नीमच विधानसभा सीट से वर्ष 1993 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नंदरामदास (बालकवि बैरागी) महज 66 मतों से हार गए। उन्होंने भाजपा के खुमानसिंह शिवाजी को कड़ी टक्कर दी थी। शिवाजी को 52843 और बैरागी को 52777 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद बैरागी ने संसद की राह पकड़ी। वे राज्यसभा सदस्य मनोनीत किए गए। इसके बाद 1998 के चुनाव में कांग्रेस के भारत सिंह से भाजपा के नानाराम पाटीदार 821 मतों से हार गए।जावरा-सुवासरा में गत बार कड़ी टक्कर
रतलाम जिले में जावरा और मंदसौर की सुवासरा सीट पर वर्ष 2018 के चुनाव में कड़ी टक्कर रही। जावरा में कांग्रेस के केके सिंह भाजपा के राजेन्द्र पांडे से 511 मतों से हार गए तो सुवासरा में हरदीप सिंह डंग महज 350 मतों से ही जीते, तब वे कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडे थे।छह चुनावों में कम मतों से कोई नहीं हारा
विधानसभा चुनाव 1977, 1985, 1990, 2003, 2008 और 2013 में कई प्रत्याशी कम मतों से तो हारे लेकिन रतलाम,नीमच व मंदसौर जिले की सीटों पर 1000 मतों से कम अंतर किसी का भी नहीं रहा।
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