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Dussehra 2023: यहां महिलाएं बिना घूंघट नहीं जातीं रावण के पुतले के सामने, जानिए क्यों

Dussehra देश भर में आज दशहरा मनाया जा रहा है, शुभ मुहूर्त में रावण के पुतले का दहन होगा। लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जहां दशहरे पर रावण की पूजा की जाती है। एक जगह तो महिलाएं रावण के पुतले के सामने बिना घूंघट नहीं जातीं तो आइये जानते हैं दशहरा रावण दहन समय और एमपी में रावण से जुड़ी परंपरा..

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Pravin Pandey

Oct 24, 2023

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रावण की पूजा (फाइल फोटो)

रावण दहन का समय
पंचांग के अनुसार अश्विन शुक्ल दशमी तिथि 23 अक्टूबर शाम 5.44 बजे से 24 अक्टूबर दोपहर 3 .14 मिनट तक थी। वहीं 24 अक्टूबर को शाम 05.43 बजे गोधूली मुहूर्त लग जाएगा। इसके बाद शुभ मुहूर्त में रावण दहन किया जा सकता है। दशहरे पर रावण दहन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त शाम 07.19 बजे से रात 08.54 बजे तक माना जा रहा है।

क्या है मंदसौर की परंपरा
मध्य प्रदेश के दो शहरों विदिशा (शहर का गांव रावणग्राम) और मंदसौर में रावण की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण की पत्नी का नाम मंदोदरी था और वह मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले (प्राचीन नाम दशपुर) की रहने वाली थी। इससे यहां के लोग रावण को दामाद मानते हैं। इसलिए मंदसौर में नामदेव समाज की महिलाएं रावण की मूर्ति के सामने घूंघट करती हैं और रावण के पैरों पर लच्छा (धागा) बांधती हैं। इस समाज के लोगों की मान्यता है कि रावण के पैरों में धागा बांधने से बीमारियां दूर होती हैं। इसलिए यहां के लोग दशहरे के दिन दशपुरी नगरी के दामाद रावण की पूजा करते हैं। यहां रावण की 41 फीट ऊंची प्रतिमा भी है।


लोग मांगते हैं क्षमा
परंपरा के अनुसार दशहरा के दिन यहां नामदेव समाज के लोग जमा होते हैं और शाम के समय राम-रावण की सेना का मंचन करने हैं। रावण के वध से पहले लोग रावण के सामने खड़े होकर क्षमा-याचना करते हैं और कहते हैं कि आपने सीता का हरण किया था इसलिए राम की सेना आपका वध करने आई है। यहां रावण के नौ मुख हैं और बुद्धि भ्रष्ट होने के प्रतीक के रूप में मुख्य मुंह पर गधे का सिर लगाया जाता है।

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विदिशा के रावणग्राम की कहानी
विदिशा के रावणग्राम में कान्यकुब्ज ब्राह्मण खुद को रावण का वंशज मानते हैं और रावण की पूजा करते हैं। साथ ही हर शुभ काम की शुरुआत रावण के नाम से ही करते हैं। दशहरे के दिन भी माता दुर्गा की जगह रावण की ही पूजा करते हैं। यहां परमार काल के मंदिर में रावण की विशालकाय लेटी हुई प्रतिमा भी है। यहां के लोगों का कहना है कि जब भी प्रतिमा को खड़ा करने की कोशिश की गई कोई न कोई अनहोनी हुई। वहीं इस जिले में गंजबासौदा के पास पलीता गांव में मेघनाद का चबूतरा है। विजयादशमी के मौके पर यहां विशेष पूजा होती है।

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