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गुरु पर्व 27 को, जानिए गुरु नानक की प्रमुख शिक्षाएं

locationभोपालPublished: Nov 25, 2023 03:54:46 pm

Submitted by:

Pravin Pandey

Guru Parv कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्मावलंबियों के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, यह तिथि सिख समुदाय के लिए भी अहम है। इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक का जन्मदिन है। आइये कार्तिक पूर्णिमा पर जानते हैं गुरु नानक के प्रमुख सिद्धांत और उनकी शिक्षाएं...

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गुरु पूर्णिमा 2023
गुरु नानक जयंती प्रमुख सिख त्योहारों में से एक है। जिसे उनके पहले गुरु, गुरु नानक देव के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा पर 27 नवंबर सोमवार को मनाई जाएगी। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने सिख समुदाय को आकार देने और मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए इस दिन उन्हें याद किया जाता है।

गुरुद्वारों में होता है गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ
गुरुनानक देव ने जाति-पाति को मिटाने के लिए कई उपदेश दिए। उनकी जयंती को हर साल गुरु पर्व या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों और गुरुद्वारों में दीपक जलाते हैं और मिठाइयों का भोग लगाते हैं। गुरुद्वारों में विशेष पाठ किया जाता है। समस्त सिख धर्म अनुयायी गुरु नानक देव जी का स्मरण करते हैं। साथ ही लोग गुरु नानक देव के आध्यात्मिक ज्ञान को याद करते हैं। लोग गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं।
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गुरु नानक के सिद्धांत

  • ईश्वर एक है। गुरु नानक देव जी ने एक ओंकार का संदेश दिया।
  • जगत का कर्ता सब जगह और सब प्राणी मात्र में मौजूद है।
  • ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी भय नहीं रहता।
  • ईमानदारी से मेहनत करके उदरपूर्ति करनी चाहिए।
  • बुरा कार्य न करें और न किसी को सताएं।
  • सदा प्रसन्न रहना चाहिए।
निंबार्क जयंती
ज्योतिषाचार्य श्रीनरहरिदास के अनुसार श्री निम्बार्काचार्य का प्रादुर्भाव 3096 ईसा पूर्व (आज से लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व) हुआ था। श्री निम्बार्क का जन्मस्थान वर्तमान महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजी महाराज नगर के निकट मूंगी पैठन में है। सम्प्रदाय की मान्यतानुसार इन्हें भगवान के प्रमुख आयुध सुदर्शन का अवतार माना जाता है। इसकी प्रमुख पीठ अजमेर जिले के नजदीक किशनगढ़ में सलेमाबाद निंबार्क तीर्थ के नाम से जाना जाता है। निम्बार्क का अर्थ है- नीम पर सूर्य। इसके संस्थापक भास्कराचार्य एक वैष्णव विरक्त संन्यासी थे। श्रीनिम्बार्काचार्य चरण ने ब्रह्म ज्ञान का कारण शास्त्र को माना है

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