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कब है भाद्रपद अमावस्या और पिठोरी अमावस्या, जानें शुभ योग और कब करें स्नान-दान

Kab Hai Bhadrapada Amavasya: भाद्रपद महीने की अमावस्या तिथि भाद्रपद अमावस्या या पिठोरी अमावस्या के नाम से जानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान और दान के साथ पितरों की पूजा का विशेष महत्व है। विशेष बात यह है कि दो शुभ योग में भादों अमावस्या पड़ रही है। आइये जानते हैं भाद्रपद अमावस्या का मुहूर्त, स्नान दान का समय और शुभ योग...

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Kab Hai Bhadrapada Amavasya

कब है भाद्रपद अमावस्या और पिठोरी अमावस्या, जानें शुभ योग और कब करें स्नान-दान

कब है भाद्रपद अमावस्या

Kab Hai Bhadrapada Amavasya: हर हिंदी चंद्र महीने की कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि अमावस्या कही जाती है। इस दिन चंद्रमा प्रायः दिखाई नहीं देता और रात में घुप अंधेरा होता है। भाद्रपद महीने की अमावस्या पिठोरी अमावस्या के भी नाम से जानी जाती है। इसके अलावा अमावस्या सोमवार को पड़ती है तो यह सोमवती अमावस्या भी कही जाती है।


इससे इसका महत्व बढ़ जाता है और इस दिन पूजा अर्चना व्रत से चंद्र दोष भी दूर होता है। पितरों का श्राद्ध तर्पण करने से उनका आशीर्वाद मिलता है। पितरों के आशीर्वाद से वंश वृद्धि, नौकरी में तरक्की या धन पाने में आ रही बाधा दूर होती है। आइये जानते हैं पिठोरी अमावस्या की डेट और महत्व

अमावस्या तिथि प्रारंभः सोमवार 2 सितंबर सुबह 05:21 बजे से
अमावस्या तिथि समापनः मंगलवार 3 सितंबर सुबह 07:24 बजे तक
भाद्रपद सोमवती अमावस्या और पिठोरी अमावस्याः 2 सितंबर 2024

पिठोरी व्रत प्रदोष मूहूर्तः 2 सितंबर शाम 06:37 बजे से रात 08:54 बजे तक
पिठोरी अमावस्या व्रत प्रदोष पूजा अवधिः 02 घंटे 17 मिनट

स्नान दान का मुहूर्तः सुबह 04.38 बजे से सुबह 05.24 बजे तक
देव पूजा मुहूर्तः सुबह 06.09 बजे से सुबह 07.44 बजे तक
पितरों के श्राद्ध का समयः दोपहर 12 बजे के बाद और सूर्यास्त से पहले तक

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भाद्रपद सोमवती अमावस्या पर शुभ योग

शिव योगः शाम 06:20 बजे तक
सिद्ध योगः 3 सितंबर शाम 7.05 बजे तक

सोमवती अमावस्या पर शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्तः सुबह 04:31 बजे से सुबह 05:17 बजे तक
प्रातः संध्याः सुबह 04:54 बजे से सुबह 06:03 बजे तक
अभिजित मुहूर्तः सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
विजय मुहूर्तः दोपहर 02:25 बजे से दोपहर 03:16 बजे तक


गोधूलि मुहूर्तः शाम 06:37 बजे से शाम 07:00 बजे तक
सायंकालीन संध्याः शाम 06:37 बजे से रात 07:45 बजे तक
अमृत कालः रात 09:41 बजे से रात 11:27 बजे तक
निशिता मुहूर्तः रात 11:57 बजे से रात 12:43 बजे (3 सितंबर सुबह तक)

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सोमवती अमावस्या के उपाय

  1. सोमवती अमावस्या का व्रत करने वाली महिलाओं को अखंड सुहागन होने का आशीर्वाद मिलता है और वंश वृद्धि होती है। साथ ही उनके काम में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं। बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं।
  2. सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें, इसके बाद मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं, चीटिंयों को आटा डालें, पीपल, बरगद, केला, तुलसी जैसे पौधे लगाएं, इससे जीवन में शुभ फल मिलेगा।
  3. सोमवती अमावस्या को पितरों का श्राद्ध करें, उन्हें तर्पण और पिंडदान दें, इससे जीवन के सभी दुख दूर होंगे।
  4. लक्ष्मी जी की पूजा कर चंद्रमा को अर्घ्य दें, धन सुख समृद्धि तो मिलेगी ही, चंद्र दोष दूर होंगे।
  5. भाद्रपद सोमवती अमावस्या को शिवजी का विशेष रूप से पूजन करें, उनका पंचामृत से अभिषेक करें, सौभाग्य में वृद्धि होगी।