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बिना लोहे के बना राम मंदिर फिर भी एक हजार साल तक मरम्मत की जरूरत नहीं, कैसे होगा ये चमत्कार...

locationभोपालPublished: Jan 22, 2024 10:24:28 am

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deepak deewan

जिस पल का लोगों को सदियों से इंतजार था आखिरकार वह घड़ी अब आ गई है। अयोध्या में आज भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है। इसी के साथ नए और भव्य मंदिर में रामलला विधिवत गर्भगृह में विराजमान हो जाएंगे। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद भी मंदिर का निर्माण कार्य चलता रहेगा। नए राम मंदिर की ऐसी अनेक खासियतें हैं जो इसे अनूठा बनाती हैं।

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नए राम मंदिर की ऐसी अनेक खासियतें हैं जो इसे अनूठा बनाती हैं।

जिस पल का लोगों को सदियों से इंतजार था आखिरकार वह घड़ी अब आ गई है। अयोध्या में आज भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है। इसी के साथ नए और भव्य मंदिर में रामलला विधिवत गर्भगृह में विराजमान हो जाएंगे। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद भी मंदिर का निर्माण कार्य चलता रहेगा। नए राम मंदिर की ऐसी अनेक खासियतें हैं जो इसे अनूठा बनाती हैं।

राम मंदिर तीन मंजिला है जिसका अभी प्रथम तल बनकर तैयार हुआ हैैं। इसे नागर शैली में बनाया गया है और इस तरह डिजाइन की गई है कि शक्तिशाली भूकंप में भी मंदिर जरा नहीं हिलेगां। राम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस विशाल भवन में लोहे का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार पूर्व से पश्चिम तक राम मंदिर की लंबाई पूरी 380 फीट हैै। मंदिर की चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट हैै। इतना विशाल निर्माण बिना लोहे के हो रहा हैै। नया राम मंदिर परंपरागत नागर शैली में बनाया जा रहा हैै।

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सबसे खास बात तो यह है कि लोहे का यूज नहीं करने के बाद भी मंदिर जरा भी कमजोर नहीं रहेगा बल्कि ज्यादा मजबूत होगा। यह चमत्कार होगा मंदिर निर्माण की देश की हजारों साल पुरानी तकनीक से। राम मंदिर की आयु एक हजार वर्ष से ज्यादा आंकी गई है। एक हजार साल की इस अवधि में मंदिर की मरम्मत की भी जरूरत नहीं होगी।

निर्माण विशेषज्ञ और इंजीनियरों के अनुसार किसी भी बिल्डिंग में लोहे का उपयोग पाइल फाउंडेशन में किया जाता है मगर राममंदिर के निर्माण में यहां भी लोहा नहीं लगाया। दरअसल मंदिर की नींव आर्टिफिशियल रॉक से बनाई गई है। मंदिर के फाउंडेशन में ऐसी केमिकल भी डाला गया है जोकि चट्टान का रूप ले लेता है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने लोहे का इस्तेमाल नहीं करने की वजह भी बताई है। ट्रस्ट ने मंदिर की आयु पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। ट्रस्ट के अनुसार लोहे के इस्तेमाल से मंदिर की उम्र घट जाती। दरअसल कई इंजीनियरों का कहना है कि लोहे में जंग लगती है जिसके कारण बार.बार मरम्मत की भी जरूरत पड़ती है। नींव में लोहे लगाते तो बार बार मरम्मत से इसके कमजोर हो जाने का खतरा उत्पन्न हो जाता। ऐसे में मंदिर का एक हजार साल तक टिक पाना संभव नहीं होता। यही वजह है कि मंदिर की नींव में लोहे का जरा भी प्रयोग नहीं किया।

राम मंदिर की निर्माण शैली पर भी खूब चर्चा हो रही है। यह मंदिर नागर शैली में बनाया जा रहा है कि जोकि सनातन स्थापत्य कला की तीन शैलियों में से एक है। प्रमुख रूप से यह उत्तर भारतीय हिंदू मंदिर निर्माण शैली है और देश के प्रमुख मंदिरों में सोमनाथ मंदिर तथा कोणार्क का सूर्य मंदिर भी इसी शैली में बनाया गया है।

नागर शब्द की उत्पत्ति नगर से हुई है। नागर शैली में मंदिर में प्रायः दो मुख्य हिस्से रखे जाते हैं- मंदिर का पहला हिस्सा लंबा होता है और दूसरे हिस्से में मंडप रखा जाता है जोकि आनुपातिक रूप से छोटा होता हैै। दोनों हिस्सों के शिखर की ऊंचाई में बड़ा अंतर होता है। देश में हिमालय और विंध्य के बीच के अधिकांश प्रमुख मंदिर मुख्य तौर पर नागर शैली में ही बनाए गए हैं।

मंदिर पर एक नजर
राम मंदिर की लंबाई
पूर्व से पश्चिम की ओर 380 फीट
मंदिर की चौड़ाई 250 फीट
मंदिर की ऊंचाई 161 फीट

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