covid 19 : ग्राउंड रिपोर्ट : डिलेवरी किट के भरोसे डॉक्टर लड़ रहे कोरोना की जंग, हिस्ट्री के जरिए तलाश रहे लक्षण

जिले में संसाधन की कमी के बीच स्वास्थ्य, पुलिस और प्रशासनिक अमला कोरोना से जंग लड़ रहा हैं। अस्पताल व फील्ड में स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) की सुरक्षा साधारण मास्क व डिलेवरी किट के भरोसे है

By: Rajesh Patel

Published: 10 Apr 2020, 11:37 AM IST

रीवा. जिले में संसाधन की कमी के बीच स्वास्थ्य, पुलिस और प्रशासनिक अमला कोरोना से जंग लड़ रहा हैं। अस्पताल व फील्ड में स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) की सुरक्षा साधारण मास्क व डिलेवरी किट के भरोसे है। हैरान करने वाली बात तो यह कि स्क्रीनिंग में लगे अधिकांश डॉक्टरों के पास पीपीई किट तो दूर इन्फ्रा रेड थर्मामीटर (आईआरटी) तक नहीं है। सर्दी, जुकाम, बुखार से पीडि़त व बाहर से आने वाले लोगों की हिस्ट्री के जरिए कोरोना संदिग्धों को खोज रहे हैं।

बीस हजार की हो चुकी स्क्रीनिंग
जिले में प्रशासनिक और पुलिस अमले को छोड़ दो तो कोरोना से लडऩे वाला फ्रंट लाइन का वर्कर चिकित्सक है। कोरोना से बचाव को लेकर एक मीटर की दूरी यानी सोशल डिस्टेंस की हिदायत के बाद भी हर संदिग्ध की जांच के लिए डॉक्टर मुंह खुलवाता है। ब्लड का सैम्पल लेता है। आज की स्थित में 17 सैंपल लिए जा चुके हैं। गनीमत है कि अभी तक कोई पॉजिटिव केस नहीं आया है। जिले में प्रथम व दूसरे चरण को मिलाकर लगभग बीस हजार से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।

जान जोखिम में डालकर महामारी को दे रहे मात
पखवाड़ेभर से कोरोना की जंग लड़ रहे डॉक्टर, स्वास्थ्य अमले का परिवार ड्यूटी पर जाने के लिए हिम्मत की डोज दे रहा है। प्रदेश के इंदौर, भोपाल सहित बाहर से आने वाले खबरों को लेकर भयभीत है। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मचारी बार-बार पीपीइ किट, एन-95 मास्क और टमप्रेचर मापने के लिए इन्फ्रा रेड थर्मामीटर (आईआरटी) मशीन आदि की मांग कर रहे हैं। कुछ चिकित्सकों को छोड़ दे तो अधिकांश चिकित्सकों के पास आइआरटी मशीन नहीं है। जिले में 50 अधिक आरआरटी टीमें हैं। शहरी क्षेत्र में 10 टीमें लगी हैं। विदेश सहित बाहर से आने वालों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। कई डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण स्तर पर काम कर रही टीमों ने मुख्य चिकित्साधिकारी से किट, मास्क उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है।

ब्लाक स्तर पर हर जोन में दो-दो टीमें
जिले में कुल 9 ब्लाक हैं। प्रत्येक ब्लाक स्तर को चार जोन में बांटा गया है। हर जोन में डॉक्टर व स्वास्थ्य अमले की दो-दो टीमें लगाई गई हैं। पंचायत से सूचना मिलते ही टीम स्क्रीनिंग के लिए पहुंच जाती है। कई बार गांव में भीड़ लगामर चिकित्सकों के पास लेाग खड़े हो जाते हैं। सोशल डिस्टेंस को भी भीड़ भूल जाती है। डॉक्टरों के समझाइस के बाद जैसे-तैसे मानने को तैयार होते हैं। जांच के समय अधिकांश डॉक्टर लोगों के बताए हुए कहानी के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जिले में स्क्रीनिंग के लिए 250 से अधिक कर्मचारियों की टीम लगी है। अधिकांश कर्मचारियों के पास वायरस की सुरक्षा से निपटने के लिए संशासन नहीं है।

वर्जन...
जिले में अभी ऐसी कोई बात नहीं है। सुरक्षा की व्यवस्था है। सुरक्षा के बीच डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी काम कर रहे हैं। जो संशासन नहीं है उसे जुटाए जा रहे हैं। कोरोना की जंग लडऩे के लिए हर कोशिश की जा रही है। इस वायरस को बचाव को लेकर प्लास्टिक के कपड़े की आश्वयकता होती है। हमारे कई ऐसे साथी हैं जो जर्सी पहनकर काम कर रहे हैं।
डॉ. आरएस पांडेय, सीएमएचओ

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