MP में ड्रग माफिया सक्रिय, रीवा बना सेंटर

रीवा से ड्रग माफिया सतना, सीधी, सिंगरौली सहित शहडोल संभाग में कर रहे नशीली दवाओं की सप्लाई , जिले में गांव-गांव फैला कारोबार, फील्ड में दवा विक्रेता बेखौफ बेच रहे नशीली दवाएं

By: Rajesh Patel

Published: 14 Dec 2020, 10:51 AM IST

रीवा. प्रदेश के मुखिया ने ड्रग माफिया के खिलाफ खुली छूट दे दी है। विंध्य में नशे के कारोबारी सक्रिय हैं। रीवा मुख्यलय से बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की सप्लाई की जा रही है। इस काम में सामान्य दवा विक्रेताओं को छोड़ दे तो अवैध रूप से ड्रग माफिया लाइसेंस की आड़ में नशीली दवाओं की खेप लाकर सप्लाई कर रहे हैं। एक साल के भीतर पुलिस के द्वारा की गई कार्रवाई भी इस बात का संकेत कर रही है। अफसरों को सूचना मिली है कि ड्रग माफिया नशीली सिरप के साथ नीले रंग की कैप्शूल की सप्लाई कर रहे हैं।
रीवा-शहडोल संभाग में प्रयागराज से आ रही खेप
रीवा और शहडोल संभाग में नशीली दवाओं की सप्लाई के लिए ड्रग माफियाओं ने रीवा में ठिकाना बनाए हुए है। यहां पर प्रयागराज, चित्रकूट, नागपुर, जबलुपर, इंदौर से बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की खेप आने की सूचना है। कई ड्रग माफिया तो ग्रामीण क्षेत्र में जगह-जगह छोटी-छोटी गोदाम बना रखे हैं। स्वास्थ्य और पुलिस विभाग को सूचना दी गई है कि शहर में इंद्रा मार्केट, रमागोविंद पैलेस, अस्पताल चौराहे के आस-पास एरिया में दवाओं का हब है। दवा गोदामों के बीच ही कई कारोबारी नशे के कारोबार में संलिप्त है। कई लाइसेंसी भी दवा कारोबार के आड़े में नशीली दवाएं बेच रहे हैं।
माफिया पर जुलाई 2019 में कसा था शिकंजा
माफिया के विशेष अभियान की कार्रवाई के दौरान जुलाई 2019 में विभागीय अधिकारियों ने शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर दवा कारोबारियों को पकड़ा था। जिसमें बस स्टैंड के निकट फार्मासिस्ट के खिलाफ कार्रवाई की थी। अधिकारियों को दोबारा सूचना मिली कि फार्मासिस्ट पर नशीली दवाओं की बिक्री की जा रही है। जांच में पता चला कि दवा की दुकान के बजाए घर से सप्लाई कर रहा है। छापामार कार्रवाई में घर से बड़े पैमाने पर नशीली दवाएं मिली। तब पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल भेज दिया है।
कारोबारी लाइसेंस की आड़ में बेच रहे नशीली ड्रग
शहर में कई बड़े कारोबारी भी लाइसेंस की आड़ में नशीली दवाओं का बड़े पैमाने पर तस्करी कर रहे हैं। बताते हैं कि वर्तमान समय में नशीली सिरप के बजाए नीले रंग की कैप्शूल अधिक सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा नशे के कारोबारी गांव-गांव में ठिकाना बना रखे हैं। इस कारोबार में ग्रामीण क्षेत्र के कई युवाओं को भी शामिल किया गया है। जिससे सप्लाई गांव-गांव तक हो सके।
एक का लाइसेंस रद्द, आठ दुकानें सीज
जिले में एक साल पहले विशेष अभियान चलाने के बाद जिम्मेदार ड्रग माफिया पर नकेल कसना भूल गए थे। नशीली सिरप के खिलाफ छिटपुट कार्रवाई के अलावा बड़े कार्रवाई नहीं की गई। खाद्य एवं औषधि विभाग ने जुलाई 2019 में विशेष अभियान के दौरान रीवा में बस स्टैंड के पास एक दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। जिसमें रीवा शहर समेत ग्रामीण क्षेत्र में मनगवां, जवा, गुढ़ आदि कई जगहों पर दुकानें सील कर दी गई थीं। अभियान के दौरान रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि ड्रग माफिया रीवा से सतना, सीधी, सिंगरौली, अनूपुर, उमरिया आदि कई जिले में बड़े पैमाने पर सप्लाई कर रहे हैं। बताते हैं कि जुलाई से लेकर अब तक पुलिस और ड्रग विभाग ने मिलकर करीब 50 पर मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन कार्रवाइयो से साफ है कि जिले में नशीली दवाओं का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है।
एक हजार से अधिक लाइसेंस
--जिले में करीब डेढ़ हजार से अधिक दवा विक्रेता सक्रिय हैं। जबकि खाद्य एवं औषधि विभाग ने करीब 1180 लाइसेंसधारियों का पंजीयन है। जिसमें कईयो ने लाइसेंस सरेंडर भी कर दिया है। इसके अलावा कार्यालय में अभी सैकड़ो की संख्या में आवेदन लंबित पड़े हैं। जिसके लाइसेंस दिए जाने की प्रक्रिया प्रचलन में है। ड्रग इंस्पेक्टर के मुताबिक जिले में एक हजार लाइसेंसधारी है। निरीक्षण के साथ जांच के दौरान कइयो पर कार्रवाई हो चुकी है।
वर्जन...
नार्मल दवा व्यापारी ऐसा नहीं कर रहे हैं। कुछ ऐसे हैं जो बगैर लाइसेंस अवैध रूप से काम कर रहे हैं। जल्द अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। वैसे पुलिस विभाग की ओर से आए दिन कार्रवाई की जा रही है। सूचनाएं संकलित की जा रही है।
प्रियंका चौबे, प्रभारी ड्रग इंपेक्टर

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