सागर

लोगों की बातों को नजरअंदाज करते हुए बच्चों की परवरिश पर दिया ध्यान, संघर्ष रखा जारी

पति के निधन के बाद संभाली किराना दुकान, बच्चों को महसूस नहीं होने दी पिता की कमी

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May 11, 2025
मां वंदना साहू के साथ दोनों बेटे

बीना. पति के निधन के बाद जब परिवार की जिम्मेदारी संभाली और किराना दुकान पर बैठना शुरू किया, तो लोग कई तरह की बातें करते थे, जिससे कई बार मन को ठेस पहुंचती थी, लेकिन फिर भी इन बातों को नजरअंदाज कर संघर्ष जारी रखा, जिससे दोनों बच्चों को आज उनके पैरों पर खड़ा कर सके।
संघर्ष की यह कहानी सुनाते हुए इटावा निवासी वंदना साहू (48) की आंखों में आंसू आ गए। उन्होनें बताया कि उनकी शादी को आठ साल हुए थे और बड़े बेटा अमन की उम्र 7 वर्ष और छोटे बेटा विपुल की उम्र 5 वर्ष थी। इसी दौरान बीमारी के चलते उनके पति शैलेन्द्र साहू का निधन हो गया। पति का निधन होने के बाद वह पूरी तरह से टूट चुकी थीं, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने अपने आप को संभाला और फिर बच्चों की परवरिश के लिए संघर्ष शुरू किया। खुरई रोड स्थित किराना दुकान को संभालते हुए बच्चों की पढ़ाई का भी पूरा ध्यान रखा। सुबह 4 बजे से उठकर बच्चों के लिए खाना बनाना और फिर उन्हें स्कूल भेजकर दुकान पर पहुंचती थीं। रात में दुकान बंद कर बच्चों को पढ़ाती थीं। 19 वर्ष के इस संघर्ष के बाद आज दोनों बच्चों की पढ़ाई पूरी हो गई है और बड़ा बेटा क्लाउड सिक्यूरिटी इंजीनियर बन गया, जो एक विदेशी कंपनी में जॉब कर रहा है। वहीं, छोटे बेटे ने बीबीए की पढ़ाई कर ली है और अब दुकान संभालने लगा है।

किसी भी परिस्थिति में हार न मानें
वंदना साहू ने बताया कि महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानना चाहिए। लोग क्या कह रहे हैं, इसे भी नजरअंदाज करना चाहिए। स्वयं पर विश्वास रखते हुए अगे बढ़ते रहना चाहिए।

मां ने नहीं रहने दी कोई कमी
दोनों बेटों का कहना है कि मां ने कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी और उन्होंने संघर्ष कर अच्छे स्कूल में पढ़ाया, जिससे वह अपने पैरों पर खड़े हो सके हैं। दोनों को अपनी मां पर गर्व है और अब वह मां को खुश रखना चाहते हैं।

Published on:
11 May 2025 11:51 am
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