समझाइश के बाद हुई सुलह, पति—पत्नी साथ रहने हुए राजी

न्यायायल परिसर में हुआ लोक अदालत का आयोजन

By: sachendra tiwari

Published: 10 Mar 2019, 09:00 AM IST

बीना. न्यायालय परिसर में शनिवार को लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें समझाइश और आपसी सुलह से चार न्यायालयों में कईमामलों में राजीनामा हुआ। साथ ही बैंक, बिजली कंपनी के लंबित प्रकरणों में राजीनामा कर राशि जमा कराईगई।
लोक अदालत का शुभारंभ प्रथम अपर जिला सत्र न्यायाधीश आलोक मिश्रा ने किया। प्रथम अपर जिला सत्र न्यायालय में 13 वर्ष पुराने मारपीट वाले मामले में राजीनामा कराया गया। जिसमें सब रजिस्टार सुरेश दयाल योगी और दस्तावेज लेखक कैलाश अहिरवार के बीच मारपीट हुई थी। साथ ही दोनों को निचली अदालत द्वारा छह-छह माह की सजा भी सुनाई गई थी और इसके बाद उन्होंने यहां अपील की थी, जिसमें दोनों पक्षों को समझाइश देकर राजीनामा कराया गया। साथ ही दो मामलों में पति-पत्नी के बीच सुलह कराई गई, जिनमें पति-पत्नी अलग होना चाहते थे। एक मामले में कल्लू उर्फ हरिशंकर और पत्नी सुनीता, दूसरे मामले में अरविंद और पत्नी आरती के बीच समझाइश के बाद सुलह कराई गईऔर परिवार टूटने से बच गए। न्यायालय में अन्य मामलों में भी राजीनामा कराया गया। द्वितीय अपर जिला सत्र न्यायाधीश ज्योति मिश्रा के न्यायालय में बिजली कंपनी के १६ मामलों में सुलह हुई, जिसमें 77 हजार 222 रुपए जमा हुए, इसमें एक मामला पांच साल पुराना था। वहीं मोटर व्हीकल एक्ट के एक पुराने मामले में सुलह कराई गई, जिसमें 30 हजार रुपए क्लेम दिलाया गया। प्रथम वर्ग न्यायाधीश अभिलाष जैन के न्यायालय में 2 सिविल, 2 क्रिमिनल, 3 चैक बाउंस और 1 घरेलु हिंसा के केस में राजीनाम हुआ। सिविल का एक मामला 8 वर्ष पुराना था जो देवरमण ट्रस्ट मंडीबामोरा और किराएदार के बीच चल रहा था। इसमें लोक अदालत में राजीनामा हुआ। प्रथम वर्ग न्यायाधीश लक्ष्मी बास्कले के न्यायालय में सिविल 5, चैक बाउंस 4, क्रमिनल 3 और भरण पोषण के 1 मामले में सुलह हुई।
कर्जमाफी का दिखा असर
कर्जमाफी के कारण लोक अदालत मे बैंकों के काउंटर खाली पड़े रहे। यहां गिनेचुने लोग ही पहुंचे। बैंक काउंटर पर बैठे कर्मचारी लोगों के आने का इंतजार करते रहे। कर्मचारियों का कहना था कि कर्जमाफी के कारण लोग लोक अदालत में नहीं आ रहे हैं।

 

sachendra tiwari Reporting
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