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इस बेटी ने बिन बोले ही जीत लिया सबका दिल,बनीं एशिया का सबसे खूबसूरत चेहरा

इस बेटी ने बिन बोले ही जीत लिया सबका दिल,बनीं एशिया का सबसे खूबसूरत चेहरा,हासिल किया ये बड़ा मुकाम

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सागर

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Samved Jain

Jul 21, 2018

इस बेटी ने बिन बोले ही जीत लिया सबका दिल,बनीं एशिया का सबसे खूबसूरत चेहरा

इस बेटी ने बिन बोले ही जीत लिया सबका दिल,बनीं एशिया का सबसे खूबसूरत चेहरा

कहते है बोली से व्यक्ति के व्यक्तित्व और प्रतिभा की पहचान हो जाती है। बोली से ही भविष्य दिखने लगता है। लेकिन आज हम जिस बेटी की बात कर रहे है, उसने बिन बोले ही सबका दिल जीत लिया है। उसके हौसलों ने न सिर्फ भारत का नाम एशिया में रौशन किया है, बल्कि हर उस यंगस्टर के लिए मिसाल कायम की है, जो एक विशेष वर्ग में होने के कारण खुद को कमजोर समझने लगते है। हम गौरवान्वित है कि यह बेटी मध्यप्रदेश की है। जिसे आज पूरा देश सलाम कर रहा है।

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टीकमगढ़. जी हां, हम बात कर रहे है हाल ही में मिस डेफ एशिया 2018 का खिताब जीतने वाली देशना जैन की। जिन्होंने ताइवान में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय ब्यूटी कांटेस्ट में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और अब मिस डेफ एशिया का ताज लेकर वापस भारत लौट चुकी हैं। इस प्रतियोगिता में 25 देशों से सिलेक्ट होकर आईं युवतियों ने हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं मिस डेफ वल्र्ड में भी देशना जैन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। एशिया का ताज लेकर वापस भारत लौटी देशना का इंदौर में भव्य स्वागत किया गया था। जबकि उनका इंतजार टीकमगढ़ में भी बेसब्री से किया जा रहा है।

कौन है देशना जैन?


भारत के परचम को एशिया में लहराने के बाद अब देशना जैन भारत की ब्रांड बन चुकी हैं। ऐसे में वह कौन है, कहां से है। परिवारिक परिचय पर पहले नजर डाल लेते है। देशना मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिला निवासी व्यवसायी देवेन्द्र बबलू बुखारिया की पुत्री है। उनकी मां का नाम दिव्या जैन है। देशना जन्म से ही मूक बधिर है, लेकिन माता-पिता ने अपनी लाड़ली की इस कमी को कभी भी उसके दिलो दिमाग पर हावी नहीं होने दिया। टीकमगढ़ में साइन लेंगेज शिक्षा का इतना स्कोप नजर नहीं आने पर परिजनों ने देशना को इंदौर भेज दिया था। जहां एक मूक बधिर संस्थान से देशना शिक्षित हुई। बचपन से ही देशना की आकर्षक छबि के चर्चाएं होती रही है। जबकि देशना का भी ग्लैमर के प्रति काफी लगाव रहा है। यही वजह थी कि संस्थान डाइरेक्टर मोनिका पंजाबी ने उसे इस क्षेत्र में आगे बढऩे में मदद की और इस बेटी ने देश को गौरवान्वित कर अपनी ताकत को सबके सामने प्रस्तुत किया है। देशना सुष्मिता सेन को रोल मॉडल मानती हैं।

पहले ही दौर में मिल गई थी सफलता


बढ़ते मनोबल को सहारा मिलने के बाद देशना ने फिर मुड़कर नहीं देखा। परिवार और सहयोगियों का भी साथ मिलता रहा। राजस्थान में आयोजित मिस इंडिया डेफ का खिताब भी उन्होंने अपने नाम किया था। इसके बाद टीकमगढ़ वापसी पर उनका जोरदार स्वागत हुआ था। टीकमगढ़ में उस वक्त भी खुशी की लहर दौड़ गई थी जब देशना भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिलेक्ट की गई थी। ताइवान जाने के पूर्व सभी ने देशना के लिए प्रार्थना की थी। और अब देशना ने भारत के साथ-साथ, मध्यप्रदेश और टीकमगढ़ जिले का नाम रौशन किया है।

कैसे बनी मिस एशिया?


- ताइवान में 8 से 16 जुलाई तक मिस एशिया डेफ 2018 का आयोजन किया गया।
- प्रतियोगिता में 28 देशों से प्रतियोगी शामिल हुए।
- भारत से देशना जैन ने किया प्रतिनिधित्व।
- देशना 8 जुलाई को ताइवान पहुंच गई थी।
- जहां लगातार उन्होंने 10 दिन तक कड़ी मेहनत कर ट्रेनिंग ली।
- इस दौरान उन्होंने ताइपे शहर भी घूमा।
- प्रतियोगिता के एक राउंड में उन्होंने गुजराती परिधान पहनकर सभी को अपनी ओर आकर्षित किया।
- फिनाले के लिए वह काफी नर्वस नजर आईं।
- पहले टॉप- 10 और फिर टॉप -5 में जगह बनाई।
- क्वेश्चन- आंसर रांउड के माध्यम से मेंटल एबिलिटी चेक की गई।
- देशना हर प्रतियोगिता में प्रतियोगियों को कड़ी टक्कर दी और अंत में खिताब अपने नाम किया।
- अब देशना जैन मिस एशिया डेफ 2018 है।
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इन परेशानियों का करना पड़ा सामना


- डे्रस डिजाइनर का नहीं मिला सपोर्ट।
- डे्रस डिजाइनर के ड्रेस नहीं थे पहनने लायक, अंत समय मां दिव्या जैन को करना पड़े थे रिजेक्ट।
- शाकाहारी होने की वजह से ताइवान में खाने के लिए होना पड़ा परेशान।

क्या है देशना की बिन बोली बात?


देशना जैन जिस बिन बोली बात से सबका दिल जीत लिया, वहीं बात देशना ने खिताब जीतने के कुछ सेकंड पहले ही कही थी। देशना से जब पूछा गया कि अगर आप यह खिताब जीत लेती हैं तो उसके बाद क्या करेंगी? तो उनका कहना था कि यहां से जीतकर जाने के बाद मैं हमारे देश की डेफ कम्यूनिटी के लिए एक उदाहरण पेश करना चाहती हूं। जो लोग अपनी लाइफ के प्रति कांफिडेंट नहीं हैं, उन्हें मेरी जीत से पॉजिटिव संदेश मिलेगा। मुझे यहां पर जो कड़ी ट्रेनिंग दी है, उसके अनुभव मैं अन्य गल्र्स के साथ शेयर करूंगी, जिससे वे अभी से इंटरनेशनल लेवल के लिए तैयार हो सकें।

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