तहसीलदार-नायब तहसीलदार सामूहिक अवकाश पर, राजस्व का काम-काज ठप

तहसीलदार-नायब तहसीलदार सामूहिक अवकाश पर, राजस्व का काम-काज ठप
4 day strike: Madhya Pradesh tehsildar-naib tehsildar on group leave

Suresh Kumar Mishra | Updated: 11 Oct 2019, 01:42:26 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

विडम्बना: डेढ़ हजार पक्षकारों की पेशियां आगे बढ़ीं, पीएम किसान का भी काम प्रभावित

सतना/ प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर गुरुवार से जिले के सभी तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। 13 अक्टूबर तक इनके सामूहिक अवकाश पर जाने से राजस्व कामकाज ठप हो गए हैं। पीएम किसान, जाति प्रमाण-पत्र समेत अन्य प्रकरण लंबित हो गए। कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा राजस्व अधिकारी संघ के बैनल तले चल रहे इस आंदोलन को लेकर संघ का कहना है कि खाली पदों को नहीं भरा जा रहा, इसलिए विभाग में अधिकारी-कर्मचारियों की कमी है। मौजूदा अधिकारियों के पास अतिरिक्त प्रभार है।

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संसाधनों की कमी भी है, इसके बावजूद विभाग में ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय-सीमा में करने की बाध्यता है। बढ़े काम के बोझ से अधिकारियों के सामने मानसिक तनाव की स्थितियां बनने लगी है। इसे लेकर सामूहिक अवकाश लिया गया है। 13 की शाम तक मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो 14 से सामूहिक हड़ताल पर जाएंगे। मप्र राजस्व अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह का कहना है कि तहसीलदारों के काफी पद खाली हैं। ये पद नायब तहसीलदारों को पदोन्नति देकर भरे जाने हैं। इसके अलावा मानवीय संसाधन की काफी कमी है।

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यह हुई परेशानी
नायब तहसीलदार और तहसीलदारों के सामूहिक हड़ताल पर जाने से राजस्व न्यायालयों की पेशियां बढ़ा दी गईं। इसमें लगभग डेढ़ हजार पक्षकार प्रभावित हुए। जाति प्रमाण-पत्र, आरक्षण से संबंधित सर्टिफिकेट, चुनाव संबंधी सर्वे, पीएम किसान योजना सहित अन्य राजस्व कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुए है। सामूहिक अवकाश का पहला दिन होने से काफी संख्या में लोग तहसील कार्यालयों में पहुंचे लेकिननिराश लौटना पड़ा।

मुख्यमंत्री को दिया यह मांग पत्र
- नायब तहसीलदार व तहसीलदारों को सालों से पदोन्नतियां नहीं मिल रही हैं। कई तहसीलदार व डिप्टी कलेक्टर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। संघ ने तत्काल पदोन्नति का रास्ता खोलने की मांग की है।
- मानवीय संसाधनों के अलावा कम्प्यूटर ऑपरेटर, लिपिक, भृत्य, चौकीदार, भवन, फर्नीचर, नियमित मासिक बजट की कमी है। किसानों के प्रकरणों को समय पर निपटाने में दिक्कतें आती हैं। उन्हें परेशान होना पड़ता है।
- राजस्व अधिकारी 24 घंटे काम कर रहे हैं। फिर भी एक महीने का अतिरिक्त वेतन नहीं मिल रहा। साप्ताहिक अवकाश की सुविधा भी नहीं है। मानसिक तनाव से पूरा परिवार प्रभावित हो रहा है।
- मई-जून में ट्रांसफर करने थे, जो अभी तक किए जा रहे हैं। इसके कारण परिवार अस्त-व्यस्त हो रहा है, सरकार को इसकी चिंता नही है।
- वेतन विसंगति की स्थिति है। मसलन नायब तहसीलदार व परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास का मूल वेतन एक है। लेकिन पदोन्नति के बाद परियोजना अधिकारी का मूल वेतन नायब तहसीलदार से ज्यादा हो जाता है। यही स्थिति तहसीलदार व जनपद सीईओ की है। पदोन्नति के बाद जनपद सीईओ को प्रथम श्रेणी का वेतनमान मिलता है जबकि तहसलीदार को द्वितीय श्रेणी का।
- तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों का वेतन अन्य राज्यों के समान किया जाए। राजस्व के अतिरिक्त अन्य विभागों के काम के लिये पृथक से मानदेय दिया जाए।
- नायब तहसीलदारों को राजपत्रित घोषित किया जाए एवं उन्हें वाहन सुविधा प्रदान की जाए।

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