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पंचायत ने किया इनकार, फिर कैसे मिला रोजगार

मलारना डूंगर@ पत्रिका. ग्राम पंचायत तारनपुर में फर्जी जॉब कार्ड से मनरेगा में रोजगार देने का मामला सामने आया है।

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Rakesh Verma

Feb 16, 2017

ग्राम पंचायत तारनपुर

ग्राम पंचायत तारनपुर

मलारना डूंगर@ पत्रिका. ग्राम पंचायत तारनपुर में फर्जी जॉब कार्ड से मनरेगा में रोजगार देने का मामला सामने आया है। फर्जी जॉब कार्ड से मनरेगा में रोजगार देकर हजारों रुपए का ऑनलाइन भुगतान भी कर दिया गया। इस बात का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत पंचायत से मांगी गई सूचना से हुआ है। गौरतलब है कि तारनपुर निवासी राकेश पुत्र रामप्रसाद मीना ने पंचायत द्वारा सर्वे क्रमांक २४३८१९०-सी से जारी जॉब कार्ड की सूचना मांगी थी। इस पर पंचायत ने २४३८१९०-सी क्रमांक से पंचायत के रिकार्ड में जॉब कार्ड इन्द्राज नहीं होने की सूचना दी थी। जबकि उक्त सर्वे क्रमांक से जारी जॉब कार्ड के जरिए पंचायत क्षेत्र में अपना खेत अपना काम योजना के तहत मनरेगा योजना से चले व्यक्तिगत लाभ के कार्यों में श्रम कर ऑनलाइन भुगतान भी उठा लिया गया। मजे की बात यह है कि उक्त सर्वे क्रमांक से जारी जॉब कार्ड में परिवार की मुखिया राजकुमारी पुत्री रामधेश्याम मीना (१८) व दीपक (२०) का नाम इन्द्राज है। जबकि पंचायत ने सूचना अधिकारी के तहत उक्त नम्बर से जॉब कार्ड बनाने की बात से इनकार किया है। ऐसे में उक्त जॉब कार्ड से मनरेगा में उठाया गया भुगतान संदेह के घेरे में है।

यूं किया मनरेगा में काम

ग्राम पंचायत तारनपुर में सर्वे क्रमांक २४३०१९०-सी से दिनांक ४ अप्रेल २०१० को जॉब कार्ड राजकुमारी व दीपक के नाम से रजिस्ट्रड हुआ। उक्त जॉब कार्डधारी राजुकमारी व दीपक ने ४ जून २०११ से २६ जून २०१६ तक विभिन्न कार्यों में मनरेगा के तहत श्रम किया है। मनरेगा वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ो की बात करे तो उक्त जॉब कार्ड धारियों को सत्र २०११-१२ में १३ दिन का रोजगार दिया गया। इसी तरह सत्र २०१२-१३ में १३ दिवस, सत्र २०१३-१४ में १५२ दिन, सत्र २०१५-१६ में १०४ दिन व सत्र २०१६-१७ में सौ दिन का रोजगार दिया गया।जबकि नियमानुसार मनरेगा योजना में एक परिवार को वर्ष में सौ दिन से अधिक रोजगार नहीं दिया जा सकता। ऐसे में यी पूरा मामला सवालों के घेरे में है।

कम उम्र में बना जॉब कार्ड

आरोप है कि तारनपुर पंचायत में ४ अप्रेल २०१० को सर्वे क्रमांक २४३८१९०-सी से जारी जॉब कार्ड में उल्लेखित नाम दीपक की उम्र उस वक्त १४ वर्ष थी। ऐसे में मनरेगा में बाल श्रम करवाने का मामला भी बनता नजर आ रहा है। जबकि कर्मचारी चयन आयोग द्वारा संयुक्त हायर सैकण्डरी परीक्षा २०१६ (चरण १) दिनांक ३ फवरी २०१७ परीक्षा के लिए जारी प्रवेश पत्र में दीपक पुत्र राधेश्याम मीना की जन्म दिनांक १७ अक्टूबर १९९७ में इन्द्राज है। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि जॉब कार्ड २४३८१९०-सी में इन्द्राज नाम दीपक व संयुक्त हायर सैकेंडरी परीक्षा के प्रवेश पत्र में इन्द्राज नाम दीपक पुत्र राधेश्याम एक ही है। यह खुलासा जांच के बाद भी सम्भव है।

एफआईआर दर्जकराएंगे

फर्जी जॉब कार्ड से मनरेगा में भुगतान उठाया गया है तो जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। पंचायत में बिना पंजीयन के जॉब कार्ड से मनरेगा में रोजगार नहीं दिया जा सकता।

विजय सिंह

विकास अधिकारी पंचायत समिति बौंली

जांच कराएंगे...

मुझे अभी तारनपुर पंचायत में आए दो माह हुए हैं। रिकार्ड देख कर ही कुछ बता सकता हूं। यदि ऐसा हुआ है तो जांच की जाएगी।

राजेश सैनी

सचिव ग्राम पंचायत तारनपुर