scriptMoon shrinking due to earthquake and landslides | चांद पर जहां नासा के आर्टेमिस मिशन को उतरना है, वहां आ रहे भूकंप-भूस्खलन | Patrika News

चांद पर जहां नासा के आर्टेमिस मिशन को उतरना है, वहां आ रहे भूकंप-भूस्खलन

locationजयपुरPublished: Jan 31, 2024 12:07:50 am

Submitted by:

pushpesh Sharma

अध्ययन : फाल्ट लाइन का पता चला, नासा के भेजे भूकंपमापी भी हिले

चांद जहां नासा के आर्टेमिस मिशन को उतरना है, वहां आ रहे भूकंप-भूस्खलन
चंद्रमा की सतह असामान्य घटनाओं से सिकुड़ रही है।
वाशिंगटन. नासा के हालिया अध्ययन में पता चला है कि चंद्रमा की सतह असामान्य घटनाओं से सिकुड़ रही है। दक्षिण ध्रुव क्षेत्र पर नजर रखने वाले शोधकर्ताओं ने उस फाल्ट लाइन की पहचान की है, जिसके खिसकने से चांद पर 50 वर्ष पहले बड़ा भूकंप आया था। चिंता का कारण यह है कि इसी जगह नासा के चंद्र मिशन आर्टेमिस-3 की 2026 में लैंडिंग होनी है और यहीं नासा इंसानी बस्तियां बसाने की योजना भी बना रहा है। लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अपोलो मिशन के साथ भेजे गए भूकंपमापी यंत्रों को भी 13 मार्च, 1973 को तेज चंद्रभूकंप ने हिला दिया। इसके दशकों बाद नासा के लूनर रिकोनाइसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) पर लगे कैमरे ने दक्षिणी ध्रुव पर फाल्ट लाइनों का जाल देखा था। नए मॉडल के साथ शोधकर्ताओं ने इसे भी भूकंप से जोड़ा है।
कैसे अलग हैं चंद्रभूकंप
शोध के मुताबिक सामान्य तौर पर चंद्रमा के भूकंप भी धरती के भूकंप के झटकों की तरह ही होते हैं। चांद पर भूकंप और इसके सिकुडऩे का मूल कारण यह है कि हजारों वर्षों में चंद्रमा का आंतरिक भाग ठंडा हो गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिकुडऩ किशमिश की तरह मुरझाने जैसी है।
चंद्रमा की सतह धरती से अलग
चंद्रमा के सिकुडऩे की एक वजह ये भी है कि चांद की सतह पृथ्वी की तुलना में कम कसी हुई है, इसमें अक्सर ढीले कण होते हैं, जो आंतरिक हलचल के कारण आसानी से ऊपर की तरह आते हैं। यही वजह है कि धरती के भूकंप की तुलना में चंद्रमा के भूकंप से भूस्खलन की आशंका ज्यादा होती है।
नासा कर रहा मिशन की तैयारी
यह शोध चांद के दक्षिणी ध्रुव के उस स्थान को लेकर सामने आया है, जो नासा के आर्टेमिस मिशनों के लिए संभावित लैंडिंग साइट है। मिशन के लॉन्च होने की तिथि करीब आने के कारण नासा अपने मिशन को यथासंभव सुरक्षित रखने के लिए लैंडिंग साइट का अध्ययन कर रहा है। शोधकर्ता निकोलस श्मेर ने कहा है कि हम चंद्रमा पर इंसानी बस्तियों की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए ऐसी इंजीनियरिंग संरचनाएं बनाना जरूरी है, जो चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधि को बेहतर ढंग से झेल सकें और खतरनाक क्षेत्रों में लोगों की रक्षा कर सकें।

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