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वैज्ञानिकों ने माना दाल-चावल जैसे भारतीय भोजन बीमारियों को मात देने में करते हैं मदद

सिर्फ डीएनए में गड़बड़ी होने से आनुवांशिक बीमारियां नहीं होतीं अगर आहार सही हो तो वो बीमारी पर रोक भी लगा सकता है एक शोध में वैज्ञानिकों ने की भारतीय खाने की तारीफ

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Priya Singh

Sep 19, 2019

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नई दिल्ली। एक शोध में साबित हुआ है कि भारतीय आहार आनुवांशिक बीमारियों रोकने में कारगर साबित होता है। जर्मनी की ल्यूबेक यूनिवर्सिटी में किए गए इस शोध में पता चला है कि सिर्फ डीएनए में गड़बड़ी होने से आनुवांशिक बीमारियां नहीं होतीं। आहार भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। आहार ठीक न हो तो वह ऐसी बीमारी पैदा कर सकता है और अगर आहार सही हो तो वो बीमारी पर रोक भी लगा सकता है। बता दें कि तीन वैज्ञानिकों ने इस शोध को किया है।

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इन वैज्ञानिकों में रूस के डॉ. अर्तेम वोरोवयेव, इजराइल की डॉ. तान्या शेजिन और भारत के डॉ. यास्का गुप्ता शामिल हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, पश्चिमी आहार आनुवांशिक रोगों को बढ़ाने का काम करता है जबकि भारतीयों का लो कैलोरी आहार ऐसे रोगों से बचाता है। वैज्ञानिकों ने चूहों पर इस शोध को प्रयोग किया है। ये चूहे पहले से ल्यूपस नाम के रोग से ग्रसित थे इस रोग का सीधा संबंध डीएनए से होता है। इसमें शरीर के अंग जैसे किडनी, दिल, फेफड़े, ब्लड सेल्स, मस्तिष्क और काई अंग नष्ट हो जाते हैं।

वैज्ञानिकों ने चूहों के एक समूह को फास्टफूड का सेवन कराया और दूसरे समूह को भारत का शाकाहारी आहार- स्टार्च, सोयाबीन तेल, दाल-चावल, सब्जी और विशेषकर हल्दी के इस्तेमाल से बनाए खाने का इस्तेमाल कराया। चूहों का एक समूह ल्यूपस से ग्रसित हो गया और भारतीय खाना खाने वाला समूह ल्यूपस रोग का शिकार होने से बच गया।

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