script543 referred from Kalyan Hospital in three months | कल्याण अस्पताल से तीन माह में रेफर हुए 543 | Patrika News

कल्याण अस्पताल से तीन माह में रेफर हुए 543

locationसीकरPublished: Feb 01, 2024 11:57:27 am

Submitted by:

Puran Shekhawat

मरीजों का भाग्य कहें या अधिकारियों की ढिलाई। सीकर मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल में चिकित्सा विभाग की ढिलाई के कारण मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। रोजाना 45 से 50 मरीजों का आउटडोर होने के बावजूद अस्पताल में कैथ लैब जैसी जरूरी सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। नतीजन मरीजों को निजी अस्पतालों व जांच केन्द्रों में हजारों रुपए खर्च करके उपचार करवाना पड़ रहा है।

कल्याण अस्पताल से तीन माह में रेफर हुए 543
कल्याण अस्पताल से तीन माह में रेफर हुए 543

मरीजों का भाग्य कहें या अधिकारियों की ढिलाई। सीकर मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल में चिकित्सा विभाग की ढिलाई के कारण मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। रोजाना 45 से 50 मरीजों का आउटडोर होने के बावजूद अस्पताल में कैथ लैब जैसी जरूरी सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। नतीजन मरीजों को निजी अस्पतालों व जांच केन्द्रों में हजारों रुपए खर्च करके उपचार करवाना पड़ रहा है। आश्चर्य की बात है कि सीकर में मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद इको कार्डियोग्राफी जैसी साधारण मशीन तक नहीं है। ऐसे में सोनोग्राफी की पुरानी मशीन से ही जुगाड़ करके इको कार्डियोग्राफी की जा रही है। जिससे न केवल ह्दय रोग के वहीं सोनोग्राफी करवाने वाले मरीज भी परेशान हो रहे हैं।
प्रबंधन चाहे तो मिल जाए सुविधा
मेडिकल कॉलेज के अधीन होने के बाद जिला अस्पताल में कैथ लैब के लिए कमरा तो तैयार कर दिया गया लेकिन इस कक्ष में कैथलैब के लिए जरूरी उपकरणों को इंस्टॉल तक नहीं किया गया है। ऐसे में ह्दय रोग के मरीजों के पास सिवाय रेफर होने या निजी अस्पतालों में जाने के कोई विकल्प ही नहीं बचा है। हालांकि अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट ही अपनी निगरानी में इको की जांच करते हैं, स्टॉफ के अनुसार जब कल्याण अस्पताल में मरीजों की सोनोग्राफी बिना सोनोलॉजिस्ट के हो रही तो इको कार्डियोग्राफी के लिए कुछ माह का प्रशिक्षण दिलवा कर मरीजों को ये निशुल्क जांच सुविधा उपलब्ध करवाई जा सकती है।
तो मिल जाए जीवनदान
अस्पताल में जिस कक्ष में ह्दय की धमनियों की जांच के लिए उपकरण युक्त मशीन होती है उसे कैथ लैब (कैथीटेराइजेशन प्रयोगशाला ) कहते हैं। जिसमें ह्दय की महाधमनी, वाल्व रोग, कोरोनरी धमनी रोग,जन्मजात ह्दय रोगियों का जीवन बचाने के लिए एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी जैसे प्राथमिक उपचार किए जाते हैं। सरकार चाहे और कल्याण मेडिकल कॉलेज को यह सुविधा देकर हजारों जीवन बचाए जा सकते हैं।
इनका कहना है
कैथलैब शुरू करने के लिए अस्पताल प्रबंधन की पूरी तैयारी है। प्रदेश स्तर पर उपकरण व मशीने भेजने के साथ ही कैथलैब शुरू हो जाएगी। फिलहाल अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की ओर से इकोकार्डियोग्राफी की जा रही है।
डा महेन्द्र कुमार, अधीक्षक, कल्याण अस्पताल

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