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सेना दिवस : जब इंडियन अयूब के सामने पाकिस्तान के जनरल ने भी टेक दिए थे घुटने

आइए सेना दिवस ( ARMY DAY ) के मौके पर जानते हैं भारत-पाक युद्ध के हीरो कैप्टन अयूब खान से जुड़ी वो रोचक कहानी।

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ayub khan nua jhunjhunu

सीकर. भारत-पाक के बीच हुए युद्धों की हार-जीत के पीछे कई रोचक कहानियां हैं। ये कहानी भी लगभग पांच दशक पुरानी है। उस वक्त भारत-पाक के बीच 1965 का युद्ध चल रहा था। पाक को उसके नापाक मंसूबों का करारा जवाब दिया गया। 1965 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया। भारत-पाक के इस युद्ध के हीरो रहे थे राजस्थान के कैप्टन अयूब खान।

सेना दिवस : राजस्थान के इस मुस्लिम बाहुल्य गांव से खौफ खाता है पाकिस्तान

आइए अब जानते हैं कैप्टन अयूब खान से जुड़ी वो रोचक कहानी। 1965 का युद्ध पाकिस्तान ने अपने जनरल अयूब के नेतृत्व में लड़ा था। इत्तेफाक से उस समय भारतीय सेना में भी एक फौजी युद्ध लड़ रहा था, जिनका नाम था कैप्टन अयूब खान।

कैप्टन अयूब खान ने युद्ध में अदम्य साहस दिखाया और पाकिस्तान के चार टैंक धवस्त किए। बहुत बहादुरी से युद्ध लडऩे और पाकिस्तानी फौज का नाको चने चबवा देने पर कैप्टन अयूब खान की बहादुरी के चर्चे पाकिस्तान में भी होते थे। पाकिस्तान की फौज अपने जनरल अयूब के नेतृत्व पर नाज करती थी। तब भारतीय फौज कहा करती थी कि पाकिस्तानी जनरल को युद्ध में घुटने टिकवा देने के लिए हमारे कैप्टन अयूब खान (इंडियन अयूब) ही काफी हैं। युद्ध के बाद कैप्टन अयूब खान इंडियन अयूब के नाम से काफी फेमस हुए थे। युद्ध की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर तत्कालीन राष्ट्रपति ने कैप्टन अयूब खान को वीर चक्र से सम्मानित किया। 15 सितम्बर 2016 को कैप्टन अयूब खान का हार्ट अटैक से 84 वर्ष में निधन हो गया।

कैप्टन अयूब खान का जीवन परिचय

-राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गांव नुआं में इमाम अली के घर अयूब खान का जन्म 24 जून 1932 को हुआ।
- गांव के स्कूल में दसवीं तक की पढ़ाई पूरी कर 23 जून 1950 को इंडियन आर्मी ज्वाइन की।
-कैप्टन अयूब ने वर्ष 1962 व 1965 में भारत-पाक के बीच हुए युद्ध लड़ा था। पाक के 4 टैंक भी ध्वस्त किए।
-कैप्टन अयूब खान वर्ष 1982 में रिटायर्ड हो गए। इसके बाद ये राजनीति में आ गए।
-झुंझुनूं से कांग्रेस की सीट पर वर्ष 1984 में लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते।
-1989 में झुंझुनूं से ही कांग्रेस की सीट से फिर चुनाव लड़ा, मगर इस बार नहीं जीत पाए।
- वर्ष 1991 में इन्होंने तीसरा चुनाव लड़ा। इस बार जीत नसीब हुई।
-अयूब खान वर्ष 1995 में नरसिम्हा राव सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बनाए गए।

-1996 में फिर झुंझुनूं संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतरे, मगर इस बार हार गए।
-2001 में कांग्रेस को छोड़ बसपा से चुनाव मैदान में भाग्य आजमाया, लेकिन इस बार भी हार का सामना करना पड़ा।
-अयूब खान तीन बहन व चार भाइयों में सबसे बड़े थे। इनके दो बेटी हैं।
-इन्होंने भाई के बेटे सलाउदीन को गोद ले रखा था। वर्तमान में गांव में पोते आदिल व पौत्रवधू शबनम के साथ रहत थे।

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