script ‘कोचिंग की नई गाइडलाइन से स्कूलिंग होगी मजबूत’ | Schooling will be strengthened with the new coaching guidelines | Patrika News

‘कोचिंग की नई गाइडलाइन से स्कूलिंग होगी मजबूत’

locationसीकरPublished: Jan 20, 2024 12:32:06 pm

Submitted by:

Ajay Sharma

कोचिंग के शिक्षकों की जानकारी भी मिल सकेगी एक क्लिक पर

विद्यार्थियों व अभिभावक की मांग...नए गाइडलाइन में हो कुछ संशोधन
विद्यार्थियों व अभिभावक की मांग...नए गाइडलाइन में हो कुछ संशोधन
कोचिंग के लिए केन्द्र सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन से विद्यार्थियों को राहत के दावे की गूंज है। केन्द्र सरकार का दावा है कि विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए ये नई गाइडलाइन काफी मददगार साबित होगा। इस बीच शिक्षानगरी के सैकड़ों विद्यार्थियों व अभिभावकों का सवाल है कि कानून में बदलाव की दरकार है। सरकार ने तय कर दिया कि 16 साल के कम आयु के छात्र-छात्रा कोचिंग नहीं ले सकेंगे। लेकिन यदि विद्यार्थियों को शैक्षिक उन्नयन की आवश्यकता है तो अभिभावकों की सहमति से कोचिंग में शामिल होने का अधिकार मिलना चाहिए। वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि नए गाइडलाइन में स्कूल की पढ़ाई पर ज्यादा फोकस किया गया है। इससे विद्यार्थियों की स्कूलिंग और बेहतर होगी। अब कोचिंग विद्यार्थियों को शिक्षकों के एकेडमिक की जानकारी भी एक क्लिक पर मिल सकेगी।
केन्द्र की ओर से जारी कोचिंग संस्थान गाइडलाइन से विद्यार्थियों की स्कूलिंग मज़बूत होगी। वहीं सह शैक्षणिक गतिविधियों एवं खेलकूद में शामिल होने से स्टूडेंट्स का ओवरऑल पर्सनालिटी डेवलपमेंट का मौका भी मिलेगा। लेकिन गंभीर विषय यह है कि केवल स्कूल लेवल की तैयारी से 12वीं के बाद पुराने समय की तरह 1-2 साल की एक्स्ट्रा तैयारी की ज़रूरत पड़ने लग जाएगी जो कि समय एवं धन दोनों का नुक़सान है। इन सबका एक आसान एवं बेहतर समाधान है कि बच्चों को स्कूल में ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जानी चाहिए।
डा. पीयूष सुंडा, चेयरमैन, प्रिंस एजुहब, सीकर

कोचिंग कानून निश्चित तौर पर राहत देने वाला है। इससे विद्यार्थियों की स्कूलिंग और मजबूत होगी। नए कानून में जो प्रावधान किए है उनकी पहले से यहां पालना हो रही है। विद्यार्थियों को मानसिक सम्बलन देने की पहल की शुरूआत यहां से हुई। इसके सकारात्मक परिणाम लगातार सामने आ रहे है।
साहिल चौधरी, सीईओ, सीएलसी
शिक्षानगरी की संस्थाएं कोचिंग और स्कूल के मामले में एक मिसाल है। यहां की संस्थाओं ने विद्यार्थियों को तनाव से राहत देने के लिए सबसे पहले सह शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देना शुरू किया। नए कानून से इस सेक्टर में कई अन्य बदलाव भी सामने आएंगे।
कपिल ढाका, निदेशक, मैट्रिक्स

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