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Arandi Ki Kheti: सिरोही में अरण्डी की बम्पर पैदावार, लेकिन मालामाल हो रहा गुजरात, जानिए कैसे

Arandi: सिरोही जिले में न प्रोसेसिंग यूनिट, न कृषि मंडी, किसानाें को बिक्री के लिए जाना पड़ रहा गुजरात, झेल रहे दोहरा नुकसान, जिले में 45 से 50 हजार हैक्टेयर में हो रही अरण्डी की खेती, हर साल बढ़ रहा रकबा

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खेत में खड़ी अरण्डी की फसल व मौजूद किसान। फोटो- पत्रिका

सिरोही। खनिज संपदा का धनी सिरोही जिला कृषि प्रधान भी है। यहां पैदा होने वाली सौंफ की महक देश-दुनिया में तो फैल ही रही है, यहां की अरण्डी भी प्रमुख फसलों में शुमार है। यहां की जलवायु और भूमि अरण्डी की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है, इसी कारण जिले में अरण्डी की बंपर पैदावार होती है। हर साल जिले में करीब 45 से 50 हजार हेक्टेयर में अरण्डी की बुवाई होती है और हर साल बुवाई का रकबा बढ़ रहा है।

जिले में अरण्डी की अच्छी-खासी पैदावार होती है, लेकिन विडंबना यह है कि यहां स्थानीय स्तर पर इस फसल को बेचने तक की सुविधा नहीं है और न ही कोई प्रोसेसिंग यूनिट है। किसानों को फसल बेचने गुजरात जाना पड़ता है। ऐसे में यहां उत्पादित इस फसल से गुजरात को लाभ हो रहा है, जबकि किसानों को भी दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर यहां कृषि मंडी खुले और प्रोसेसिंग यूनिट लगे तो किसानों की आय बढ़ेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे जिला कृषि क्षेत्र में भी विकास की उड़ान भरेगा।

50 हजार हेक्टेयर में लहलहा रही अरण्डी फसल

वर्तमान में सिरोही जिले में करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अरण्डी की फसल लहलहा रही है। यह नकदी फसल कम खर्च में अधिक मुनाफा देती है और दवाइयों से लेकर औद्योगिक उपयोग तक इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए किसान भी इस फसल में रुचि ले रहे हैं।

ऐसे में हर साल फसल का रकबा बढ़ रहा है। अरण्डी के तेल की बाजार में काफी डिमांड है, इसलिए अन्य तिलहनों के मुकाबले अधिक भाव मिल जाता है। अरण्डी की बुवाई सामान्य रूप से खरीफ फसलों के साथ जुलाई या अगस्त माह में की जाती है। इस साल जिले में 50 हजार 192 हेक्टेयर में अरण्डी की बुवाई हुई है।

कृषि मंडी खुले तो नहीं हो दोहरा नुकसान

जिले में अरण्डी की अच्छी-खासी पैदावार होती है। ऐसे में जिले में कृषि मंडी हो तो किसानों को फसल बेचने गुजरात नहीं जाना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर फसल बेचने से उनकी आय बढ़ेगी। अभी गुजरात जाने का काफी किराया लग जाता है और वहां पूरा मूल्य भी नहीं मिल पाता। इससे दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। यदि मंडार व रेवदर में स्वीकृत कृषि मंडी खुल जाए तो किसानों को लाभ होगा।

क्षेत्र के किसानों ने बताया कि सिरोही में जिला स्तर पर भी कृषि मंडी नहीं होने से किसानों को मजबूरन अपना उत्पाद गुजरात की ऊंझा मंडी में बेचना पड़ता है। यदि जिले में पूर्ण सुविधायुक्त कृषि मंडी हो तो किसानों को राहत मिले और लाभ भी होगा। किसानों को बेहतर भाव मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

इनका कहना है

सिरोही जिले की जलवायु और भूमि अरण्डी की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। इस साल 50,192 हेक्टेयर में अरण्डी की बुवाई हुई है। यह नकदी फसल कम खर्च में अधिक मुनाफा देती है और दवाइयों से लेकर औद्योगिक उपयोग तक इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन सिरोही में प्रोसेसिंग यूनिट और बिक्री की व्यवस्था नहीं होने से किसान गुजरात की ऊंझा मंडी में उत्पादन बेचने जाते हैं।

  • शंकरलाल मीणा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग सिरोही

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