
राज्य सरकार ने 3 अक्टूबर को मण्ड्या के श्रीरंण्ट्टण में दशहरा उत्सव के पहले दिन गंगा आरती की तर्ज पर कावेरी आरती का प्रतीकात्मक शुभारंभ करने का निर्णय लिया है।
यह निर्णय कृषि मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ चर्चा के बाद लिया गया। मण्ड्या, मैसूरु, हासन और चामराजनगर के विधायकों और विधान पार्षदों के दल ने हाल ही में चेलुवरायस्वामी के नेतृत्व में गंगा नदी के तट पर आरती समारोह आयोजित करने के तरीके का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश के वाराणसी और उत्तराखंड के हरिद्वार में दौरा किया था।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे कांग्रेस के विधान पार्षद दिनेश गुलिगौड़ा ने कहा कि हमने 3 अक्टूबर को श्रीरंण्ट्टण में प्रतीकात्मक रूप से कावेरी आरती आयोजित करने का निर्णय लिया है। कावेरी नदी के तट पर स्थायी संरचनाओं के निर्माण के बाद आरती सप्ताह में कम से कम पांच दिन आयोजित की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रतिनिधिमंडल को कावेरी आरती के संचालन और इसके स्थान पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा, जो बाद में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल में बदल जाएगा। गौड़ा ने कहा कि चिह्नित स्थान ऐसा होना चाहिए, जहां साल भर नदी में पानी का प्रवाह बना रहे।
शिवकुमार ने प्रतिनिधिमंडल को रिपोर्ट में कावेरी बेसिन के सभी जिलों की विशिष्ट विशेषताओं को शामिल करने का निर्देश दिया। गौड़ा ने कहा कि मंत्रिमंडल के आरती के लिए संरचनाओं के निर्माण और स्थायी स्थान के लिए धन जारी करने पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध के दौरे के दौरान शिवकुमार ने कहा था कि राज्य सरकार ने कावेरी नदी के तट पर कावेरी आरती आयोजित करने पर विचार कर रही है। प्रतिनिधिमंडल के साथ 20 और 21 सितंबर को हरिद्वार और वाराणसी का दौरा करने वाले गौड़ा ने कहा कि हरिद्वार और वाराणसी में गंगा आरती के दौरान करीब 40,000 लोग भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कावेरी आरती से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
Updated on:
25 Oct 2024 05:57 pm
Published on:
30 Sept 2024 05:04 pm
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