दस हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोपी कांस्टेबल सात साल बाद गिरफ्तार

दस हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोपी कांस्टेबल सात साल बाद गिरफ्तार

Surender Kumar Ojha | Updated: 04 Jul 2019, 11:15:51 PM (IST) Sri Ganganagar, Sri Ganganagar, Rajasthan, India

श्रीगंगानगर. सात साल पहले एक दुकानदार को भयभीत कर उससे कथित तौर पर दस हजार रुपए की रिश्वत लेने के मामले में आखिरकार आरोपी कोतवाली के कांस्टेबल को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की श्रीगंगानगर टीम ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी कांस्टेबल हरवेल सिंह को एसीबी टीम ने अदालत में पेश किया।

एसीबी प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट ने इस आरोपी की जमानत अर्जी खारिज सौलह जुलाई तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।

ब्यूरो के एडिशनल एसपी राजेन्द्र डिढारिया ने बताया कि 4 जुलाई 2012 को मुकर्जीनगर निवासी सतीश बंसल ने एसीबी चौकी में परिवाद देकर आरोप लगायाथा कि बस स्टैण्ड में नियुक्ति कांस्टेबल हरवेल सिंह ने उससे रिश्वत के रूप में दस हजार रुपए ले चुका है और इतनी ही राशि की फिर से मांग करते हुए बार बार उसे दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाने के लिए भयभीत कर रहा है।

बंसल अपनी दुकान पर एसी, फ्रीज, वांशिग मशीन आदि इलैक्ट्रोनिक्स आइटम किश्तों पर बेचता था। इससे सेतिया कॉलोनी की एक महिला ने एसी खरीद किया था लेकिन राशि चुकाने की बजाय उसे किस्तों में देने का वायदा किया था। जब किस्त लेने बंसल उसके घर गया तो उसने किस्त देने की बजाय कोतवाली में एक परिवाद दे दिया जिसमें यह आरोप लगाया कि दुकानदार ने उसके घर आकर उसकी लज्जा भंग की। इस परिवाद की जांच कोतवाली से बस स्टैण्ड चौकी में नियुक्ति कांस्टेबल हरवेल सिंह के पास आई गई थी।
जब एसीबी ने इस परिवाद के आधार पर कांस्टेबल हरवेल सिंह को ट्रेप करने की प्रक्रिया अपनाई तो उससे एसीबी के आने की भनक मिली गई। इस कारण ट्रेप की कार्रवाई नहीं हो पाई। लेकिन एसीबी ने अपनी जांच में रिश्वत मांगने में कांस्टेबल हरवेल सिंह को दोषी मान लिया।
पुलिस प्रशासन ने इस कांस्टेबल के खिलाफ जांच प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभियोजन स्वीकृति देने में टालमटोल कर दी। राजनीतिक एप्रोच और पुलिस के आला अफसरों के अभयदान के कारण इस कांस्टेबल को बिना अभियोजना स्वीकृति के गिरफ़्तार करने के लिए एसीबी चक्कर काटती रही।

लेकिन यह फाइल सात साल तक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दबी रही। ब्यूरो एडिशनल एसपी डिढारिया ने बताया कि अभियोजन स्वीकृति समय पर मिल जाती तो इस आरोपी कांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया जाता। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पिछले दिनों पुलिस अधीक्षक के आदेश पर स्वीकृति मिली तो गुरुवार को आरोपी कांस्टेबल हरवेल सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
चौथ वसूली का मामला उजागर होने के बावजूद पुलिस के अधिकारियों की नजर में आरोपी कांस्टेबल हरवेल सिंह गुडबुक में था। यही वजह है कि अब भी वह केन्द्रीय बस स्टैण्ड पुलिस चौकी में तैनात था।

कोतवाली थाने के इस कांस्टेबल के पास थाना क्षेत्र में महिलाओं के संबंधित परिवाद की अधिकांश जांच की जिम्मेदारी दी गई थी, यह सिलसिला पिछले सात सालों से चल रहा था। गुरुवार को एडशिनल एसपी के आदेश डिप्टी एसपी वेदप्रकाश लखोटिया ने इस आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।

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