केंद्र सरकार के खिलाफ श्रम संगठनों का आंदोलन शुरु, कॉमर्शियल माइनिंग के विरोध में हड़ताल से ठप रहीं कोल खदानें

तीन दिवसीय आंदोलन का कई श्रम संगठनों ने किया समर्थन, ड्यूटी पर नहीं पहुंचे कई कर्मचारी

By: rampravesh vishwakarma

Published: 02 Jul 2020, 10:41 PM IST

बिश्रामपुर. केंद्र सरकार के कॉमर्शियल माइनिंग के निर्णय के विरोध में गुरुवार से सीटू, एटक, एचमएस, बीएमएस व इंटक इंटक श्रम संगठनों की हड़ताल शुरू हो गई। इसकी वजह से खदानों में उत्पादन ठप रहा।

तीन दिवसीय आंदोलन के प्रथम दिवस श्रम संगठनों द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बिश्रामपुर के कुम्दा 7/8, न्यू बलरामपुर खदान, रेहर-गायत्री, आमगांव, अमेरा सभी खदानों में आवश्यक कर्मचारियों को छोड़ कर शेष अन्य कर्मचारियों को जाने नहीं दिया गया।

परिणामस्वरूप क्षेत्र के कुल 4354 कर्मचारियों में से आम प्रथम पाली के कुल 711 कर्मचारियों में से 219, सामान्य दिन के 1572 कर्मचारियों में से 378 कर्मचारी ही ड्यूटी पर पहुंचे। इस प्रकार उपस्थिति नगण्य रही।


श्रम संगठनों के पदाधिकारियों ने गेट मीटिंग कर कोयला उद्योगों का निजीकरण, कोल ब्लॉक की नीलामी, सीएमपीडीआईएल को कोल इंडिया से अलग करने सहित अन्य मुद्दों को लेकर कामगारों से हड़ताल सफल बनाने की अपील की।

गेट मीटिंग में सीटू के कार्यकारी अध्यक्ष ललन सोनी, एटक के क्षेत्रीय महामंत्री पंकज गर्ग, सीटू के क्षेत्रीय महामंत्री जय प्रकाश पांडे, बीएमएस के सचिव प्रेम कुमार जायसवाल, एचएमएस के रामचंद्र जायसवाल, एटक के कामदेव सिंह, हरगोविंद ने मोर्चा खोला है, जिन्हें विभिन्न संगठन के महेंद्र लांडे, सुजीत सिंह, अजय विश्वकर्मा, अमरजीत सिंह, बीबी सेन आदि मार्गदर्शन दे रहे हैं।

वहीं इस हड़ताल के बीच महाप्रबंधक बीएन झा ने आंदोलनकारियों से अपील करते हुए कहा है कि क्षेत्र घाटे में चल रहा है, सभी को मिलकर उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान देना है, खदानें हैं तो हम सब हैं।

rampravesh vishwakarma Desk
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