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ADMISSION 2018 : डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग में भी नहीं भर पा रही हैं सीटें

- स्वनिर्भर के साथ सरकारी कॉलेजों में भी हजारों सीटें रिक्त- डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग में प्रवेश के हुए दो राउण्ड फिर भी 27 हजार से अधिक सीटें रिक्त

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ADMISSION 2018 : डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग में भी नहीं भर पा रही हैं सीटें

सूरत.

राज्य के डिग्री इंजीनियरिंग की ही तरह डिप्लोमा इंजीनियरिंग में भी हजारों सीटें रिक्त होने की आशंका है। प्रवेश के दो राउण्ड पूर्ण होने के बाद भी 27 हजार से अधिक सीटें खाली हैं। अब इन रिक्त सीटों को भरना मुश्किल नजर आ रहा है।

राज्य के विद्यार्थी अब धीरे-धीरे इंजीनियङ्क्षरग से दूर होने लगे हैं। रिक्त सीटों के आंकड़े गवाह हैं कि विद्यार्थियों को अब इंजीनियङ्क्षरग में रुचि कम हो रही है। डिग्री इंजीनियङ्क्षरग की तरह डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग में भी सीटें रिक्त पड़ी हैं। राज्य के डिप्लोमा इंजीनियरिंग में भी प्रवेश देने का जिम्मा एसीपीडीसी के पास है। प्रवेश के दो राउण्ड पूर्ण होने के बाद एसीपीडीसी ने रिक्त सीटों की सूची जारी की है। इसके अनुसार राज्य के स्वनिर्भर डिप्लोमा इंजीनियिरिंग पाठ्यक्रम में 22,366 सीटें तथा सरकारी डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग कॉलेजों में 4404 सीटें रिक्त पड़ी हैं। वहीं, पीपीपी डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग कॉलेजों में 472 सीटें रिक्त पड़ी हैं। राज्यभर में कुल 27,242 डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग की सीटें खाली हैं। 10वीं के बाद राज्य के विद्यार्थियों की पहली पसंद डिप्लोमा इंजीनियङ्क्षरग हुआ करती थी। पहले ही राउण्ड में सीटें भर जाती थी। अब दो-दो राउण्ड होने पर भी सीटें रिक्त पड़ी रहती हंै। डिग्री इंजीनियङ्क्षरग में भी 30 हजार से अधिक सीटें खाली हैं। इन्हें भर पाना भी मुश्किल हो गया है।

डिग्री इंजीनियरिंग में 28 हजार से अधिक सीटें रिक्त
डिग्री इंजीनियर में विद्यार्थियों की रुचि कम होती जा रही है। राज्य के इंजीनियर संस्थानों में हर साल 25 हजार से अधिक सीटें रिक्त रह जाती हैं। इस बार यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। इंजीनियर में प्रवेश देने का जिम्मा एसीपीसी को सौंपा गया है। एसीपीसी ने हाल ही में प्रवेश के दूसरे राउण्ड की सूची जारी की है। इसके अनुसार राज्य के ज्यादातर महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में सीटें खाली हैं। यही हाल रहा तो रिक्त सीटों की संख्या तीसरे राउण्ड में और भी बढ़ सकती हैं। दूसरा राउण्ड पूरा होने पर राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान और महाविद्यालयों को मिलाकर 28 हजार से अधिक सीटें रिक्त हंै। राज्य में इंजीनियर की 46 हजार सीटें हैं। राज्य के सभी महाविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर पाई हैं।

- कई संस्थानों में एक भी प्रवेश नहीं
राज्य के कई शैक्षणिक संस्थान और महाविद्यालय ऐसे है, जिनमें दो राउण्ड पूर्ण होने पर भी एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया है। कई संस्थान में 100 से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं। कई संस्थानों में मात्र एक-दो विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया है। अब यह सीटें भरना भी मुश्किल है। जब एसीपीसी महाविद्यालयों को सीट भरने का जिम्मा सौंपेगा, तब भी संचालकों को रिक्त सीटें भरना मुश्किल होगा।

स्वनिर्भर कॉलेजों की 50 फीसदी से अधिक सीटें खाली
राज्य के स्वनिर्भर महाविद्यालयों में करीब 46,645 सीटें हैं। प्रथम राउंड में यहां 21,343 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। राज्यभर में स्वनिर्भर कॉलेजों की 25,302 सीट रिक्त पड़ी हैं। सरकारी और अनुदानित महाविद्यालयों में 10,777 सीटें है। इनमें से प्रथम राउंड में 10,591 सीटें भर गईं। यहां मात्र 186 सीटें रिक्त हैं। प्रवेश के दूसरे राउंड में यह सीटें भर सकती हैं।