Devi Patan Temple

देवीपाटन मंदिर

Devi Patan Temple

विवरण :

बलरामपुर. भारत-नेपाल की सीमा पर बसा बलरामपुर जिला अपनी खूबसूरत प्राकृतिक सम्पदा के लिये जाना जाता है। तराई का यह इलाका सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक दृष्टि से विशिष्ट पहचान रखता है। देश की इक्यावन शक्तिपीठो में से एक देवीपाटन की यह पवित्रभूमि है जहाँ प्रतिवर्ष देश विदेश से लाखो श्रद्धालु दर्शन के लिये आते है।

 

भौगोलिक स्थिति : शिवालिका की पृष्ठभूमि में उपस्थित उत्तर प्रदेश का पिछड़ा व अविकसित जनपद बलरामपुर नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से मिलता हुआ 2703.20 उत्तरी आंक्षांश से 2754 उत्तरी अक्षांश तथा 82.230 पूर्वी देशान्तर से 82.49पूर्वी देशान्तर के बीच स्थित है। उत्तर से दक्षिण इसकी अधिकतम लम्बाई 81 किलो मीटर तथा पूरब से पश्चिम 72 किलोमीटर की अधिकतम चौड़ाई में यह जनपद प्रसारित है। यह जनपद पूरब में सिद्धार्थनगर, पश्चिम में श्रावस्ती जनपद, दक्षिण में गोण्डा की जनपदीय सीमा ये घिरा हुआ है। इस जनपद का कुल क्षेत्र 3419.50वर्ग किलोमीटर है। तुलसीपुर बलरामपुर जनपद की पूर्वोत्तर सीमा पर स्थित है। इसके उत्तर में नेपाल पूर्व में बस्ती, दक्षिण में उतरौला तहसील तथा पश्चिम में बलरामपुर तहसील है। सन 1856 से 1950 तक यह क्षेत्र उतरौला के अन्तर्गत था। सन 1950 से 25 जनवरी 1987 से तुलसीपुर को एक पृथक तहसील का स्तर प्रदान किया गया। तुलसीपुर तहसील के अन्तर्गत तीन विकास खण्ड तुलसीपुर, गैसड़ी, पचपेड़वा शामिल है। तहसील का मुख्यालय तुलसीपुर नगर है।

मंदिर का इतिहास : तुलसीपुर एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है। यहां भारत का प्रसिद्ध शक्तिपीठ देवीपाटन तथा महाभारत कालीन दानवीर कर्ण का बनवाया हुआ सूर्यकुण्ड सरोवर विद्यमान है। 51 शक्तिपीठों में से एक मां देवीपाटन शक्तिपीठ माता सती के वाम स्कंध गिरने के कारण यह स्थल सिद्ध पीठ बना। नवरात्रि में यहां देश विदेश से श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति के लिए दर्शन करने आते है। शक्तिपीठ देवी पाटन गुरू गोरक्षनाथ की तपोस्थली भी है, यहीं पर उन्होने योगशक्ति की साधना की थी।

मान्यता : देवी पाटन शक्ति पीठ आस्था, श्रद्धा व भक्ति का अनूठा संगम है। मनोकामना पूर्ति के लिए लाखों भक्त देश विदेश से यहां आते है और मां के दरबार में माथा टेकते है। भारत नेपाल सीमा की निकटता तथा उभय राष्ट्रो की धार्मिक एक रूपता के कारण यह पावन स्थल दोनों ही देशो के करोड़ो श्रद्वालुओ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक एक रूपता को भी परिलक्षित करता है। सामान्यतया अश्विन तथा नवरात्र पर्व पर यह पीठ अनुष्ठान की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।

ऐसे हुआ निर्माण : स्कंद पुराण के अनुसार प्रजापति दक्ष के यज्ञ कुण्ड में माता सती ने भगवान शिव के अपमान से आहत होकर प्रवेश कर अपने शरीर का त्याग कर दिया। यह समाचार सुनकर भगवान शिव यज्ञ स्थान पर पहुंचे। व्यथित शिव ने अपने कन्धे पर माता सती का शरीर रखकर इधर उधर घूमना शुरू कर दिया। इससे सृष्टि के संचालन में बाधा उत्पन्न होने लगी। देवताओं के आवह्वान पर भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के शरीर को काटकर गिराना शुरू किया। जिन 51 स्थानों पर सती के अंग गिरे वह सभी शक्तिपीठ कहलाए। देवीपाटन में सती का वाम स्कंध पट सहित गिरा जिससे यह स्थल सिद्धपीठ देवीपाटन के रूप में विख्यात है। शक्ति के आराधना स्थल होने के कारण यह शक्तिपीठ प्रसिद्व है। नाथ सम्प्रदाय की व्यवस्था में होने के कारण ही सती प्रकरण की पुष्टि होती है क्योकि भगवान शंकर स्वरूप गोरखनाथ जी ने भव्य मंदिरो का निर्माण कराया।

निकटतम धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल : देवी पाटन के निकट कुछ धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल भी शामिल है जिनमें से सूर्यकुण्ड, करबान बाग, सिरिया नाला, धौर सिरी,भैरव मंदिर आदि प्रमुख है। यह पुण्य स्थल अपनी-अपनी जगह अहम भूमिका के लिए विख्यात हैं। पुराणों के कथानुसार महाभारत काल के सूर्य पुत्र महाराजा कर्ण भी देवी पाटन भगवती के भक्त थे। जब उनको अवसर मिलता था तो यहां आकर रूककर माँ भगवती जी की आराधना करते थे। शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रों में अवश्य आते थे। नवरात्रि व्रत करते थे तथा पंडितों के माध्यम से शत चण्डी तो कभी सहस्त्र चण्डी महायज्ञ का आयोजन करते थे। उन्होंने अपने पिता सूर्य भगवान की पुण्य स्मृति में मन्दिर के दूसरे भाग में एक पोखरा बनवाया जो सूर्यकुण्ड के नाम से विख्यात है। पूर्व काल में यह बहुत सुन्दर और विशाल रूप में था पर समय के प्रभाव से अब इसका रूप वह नहीं रहा। वर्तमान में यह साधारण कुण्ड के रूप में परिवर्तित हो गया है लेकिन माँ भगवती के कृपा से इसका अस्तित्व अभी भी बरकरार है। लोगो की आस्था की सूर्य कुण्ड में स्नान करने से चर्म रोग से निजात मिलता है जिस कारण से लाखों श्रद्धालु सूर्य कुण्ड में आस्था की डुबकी लगाते है। जिसमें लाखों की संख्या मे श्रद्धालु आते है।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK