script पशुओं से मनुष्यों में फेल रहा ब्रुसेलोसिस संक्रमण | Brucellosis infection spreading from animals to humans | Patrika News

पशुओं से मनुष्यों में फेल रहा ब्रुसेलोसिस संक्रमण

locationउदयपुरPublished: Dec 29, 2023 10:26:16 pm

Submitted by:

Dhirendra Joshi

- सावधानी से बचाव संभव, बीमारी होने के बाद लंबे समय तक रहते हैं लक्षण

पशुओं से मनुष्यों में फेल रहा ब्रुसेलोसिस संक्रमण
पशुओं से मनुष्यों में फेल रहा ब्रुसेलोसिस संक्रमण
उदयपुर. पशुओं में पाया जाने वाला ब्रुसेलोसिस जीवाणु मनुष्यों के लिए भी खतरनाक है। इस जीवाणु की चपेट में आने वाले लोगों को लंबे उपचार के बाद राहत मिलती है। अधिकतर पशुपालक और पशु चिकित्सा से जुड़े लोग इसकी चपेट में आते हैं। उदयपुर में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। ब्रुसेलोसिस जीवाणु पशुओं के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों को अधिक चपेट में लेता है। इसके अलावा कच्चे या बिना पाश्चुरीकृत डेयरी उत्पाद खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ होता है। कभी-कभी, ब्रुसेलोसिस के बैक्टीरिया हवा के माध्यम से या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैल सकते हैं। इसकी चपेट में आने के बाद बुखार, जोड़ों का दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसका उपचार आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है। उपचार में सप्ताह से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है। इसका संक्रमण दूबारा भी हो सकता है। यह रोग विश्व के कई देशों में होती है। संक्रमण के लक्षण संक्रमण होने के बाद इसके लक्षण कुछ दिनों से लेकर कुछ माह बाद दिखाई दे सकते हैं। इसके लक्षण फ्लू के समान होते है। इसमें बुखार, ठंड लगना, भूख में कमी, पसीना, कमजोरी, थकान जोड़ों, मांसपेशियों और पीठ में दर्द, सिरदर्द आदि लक्षण दिखते हैं। इनमें हो सकता है संक्रमण इस बैक्टीरिया का संक्रमण कई जंगली और घरेलू जानवरों में हो सकता है। इनमें बकरी, भेड़, सूअर, जंगली सूअर, कुत्ते, हिरन, ऊंट, ब्रुसेलोसिस, गाय, भैंस आदि में भी हो सकता है।
ऐसे फैलता है जानवरों से इंसानों में
यह बैक्टीरिया फैलने के कई कारण है। इनमें कच्चे डेयरी उत्पाद खाना। बिना पाश्चुरीकृत दूध, आइसक्रीम, मक्खन और पनीर से मनुष्यों में फैल सकता है। संक्रमित जानवरों के कच्चे या अधपके मांस में भी बैक्टीरिया फैल सकता है। यह बैक्टीरिया हवा में आसानी से फैलता है। संक्रमित जानवरों के खून और शरीर के तरल पदार्थ किसी कट या घाव के संपर्क में आने से भी संक्रमण का खतरा रहता है। यह बैक्टीरियां एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं से यह बैक्टीरिया बच्चों में जा सकता है।
ये समस्याएं हो सकती है
इस बैक्टीरिया की चपेट में आने से एक अंग या पूरे शरीर में जटिलताएं पैदा हो सकती है। इसमें गंभीर समस्या हृदय कक्षों की आंतरिक परत की सूजन, हृदय वाल्व को नुकसान पहुंचने पर संक्रमित की मृत्यु तक हो सकती है। जोड़ों की सूजन, दर्द, अंडकोष की सूजन और संक्रमण, यकृत की सूजन और संक्रमण सहित अन्य समस्याएं भी हो सकती है।
15 से 20 लोग आ चुके चपेट में
इस संक्रमण से उदयपुर जिले में अब तक 15 से 20 चिकित्सा से जुड़े और पशुपालक चपेट में चुके हैं। कुछ दिन पूर्व एक पशुपालक भी इसकी चपेट में आया है। 1 अप्रैल से 30 नवंबर तक पशुपालन विभाग ने 317 डेयरियों के दूध का और 9 पशुओं का परीक्षण किया। इसमें 10 डेयरियों के दूध में यह बैक्टीरिया मिला। वहीं 2 पशुओं में यह बैक्टीरिया पाया गया। इसी प्रकार इस समय सीमा में 332 पशुओं सीरम टेस्ट किया गया। इनमें से 33 पशुओं में ब्रुसेलोसिस पाया गया।
- डॉ. सुरेंद्र छंगाणी, वरिष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी

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