गांवों में काम करने वाले डॉक्टरों के अनुभव को पीजी के लिए माना जाएगा अनुभ

गांवों में हॉस्पिटल की कुर्सियां नहीं रहेंगी खाली .

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. अब गांवों के स्वास्थ्य केन्द्रों पर अमूमन खाली रहने वाली कुर्सिंयां जल्द ही भरने की उम्मीद है, क्योंकि सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में अस्थाई आधार पर कार्य करने वाले चिकित्सकों के लिए इस सेवा समय को पीजी करने के लिए अनुभव में जोडऩे का निर्णय लिया है। जन स्वास्थ्य निदेशक केके शर्मा ने हाल ही में इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं।इस सेवा से इसलिए जुड़ते चिकित्सकये बात उन चिकित्सकों की है, जो जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा अस्थाई आधार पर लिया जाता है। इनकी नियुक्तियों पूर्ण रूप से अस्थाई आधार पर की जाती है। आम तौर पर अधिकांश चिकित्सक इस सेवा से इसलिए जुड़ते हैं, ताकि पीजी के दौरान उन्हें इसके अनुभव का लाभ मिल सके, लेकिन गत 24 अक्टूबर 19 को जारी आदेश के अनुसार बिन्दु संख्या 6 में उल्लेख था कि इस सेवा को पीजीे करने के लिए अनुभव में गणना योग्य नहीं माना जाएगा। इस बिन्दु से अधिकांश चिकित्सक चयनित होकर भी इस सेवा का हिस्सा बनने में पीछे हटने लगे थे।

---

ये थे अन्य निर्देश, जो जारी रहेंगे - नियुक्ति संविदा आधार पर नहीं होकर पूर्ण रूप से आवश्यक अस्थायी आधार पर होगी। जो नियमित रूप से चयन से पद भरे जाने या नियुक्ति तिथि से अधिकतम एक वर्ष, जो भी पहले होगी उस एक वर्ष की अवधि के बाद उन्हें अभिवृद्धि नहीं दी जाएगी।- इनका पदस्थापन सरकार के स्तर पर नियमित रूप से चयनित से पद भरे जाने पर संबंधित नियंत्रणाधिकारी तत्काल इनकी सेवाएं समाप्त कर कार्यमुक्त कर सकेंगे।- इन चिकित्सकों के संबंध में प्रतिदिन की ओपीडी, आईपीडी की सूचना प्रत्येक माह की प्रथम तारीख को तैयार कर अतिरिक्त निदेशक राजपत्रित को भेजी जाएगी।

- इन चिकित्सकों की उपस्थिति भी संस्थान पर कार्यरत नियमित चिकित्सकों की भांति बायोमेट्रिक से ली जाएगी।मरीजों को होगा फायदाइससे चिकित्सकों को लाभ मिलेगा, गांवों में काम करने की उनकी रुचि बढ़ेगी। सरकार के इस निर्णय से मरीजों को काफी फायदा होगा।डॉ. दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ, उदयपुर

bhuvanesh pandya Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned