#sehatsudharosarkar: ब्लड बैंक पर स्थापना के बाद से ही ताले, गर्भवती महिलाएं जांच के लिए ये जोखिम उठाने को मजबूर

Mohammed Illiyas

Publish: Sep, 17 2017 03:20:58 PM (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
#sehatsudharosarkar: ब्लड बैंक पर स्थापना के बाद से ही ताले, गर्भवती महिलाएं जांच के लिए ये जोखिम उठाने को मजबूर

उदयपुर . चिकित्सा विभाग भले ही स्वास्थ्य सुरक्षा के तमाम दावे करे लेकिन आज भी ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में ही है।

उदयपुर . चिकित्सा विभाग भले ही स्वास्थ्य सुरक्षा के तमाम दावे करे लेकिन आज भी ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में ही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्रीरोग विशेषज्ञ के अभाव में महिलाएं स्वास्थ्य जांच में हिचकिचाती है, वहीं सोनोग्राफी मशीन नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को जोखिम उठाते हुए कई किलोमीटर तक सफर करना पड़ता है। कोटड़ा, झाड़ोल, ओगणा व सुदूर गांवों में आपात स्थिति में खून की आवश्यकता पड़ जाए तो मरीज की जान सांसत में आ जाती है। भगवान भरोसे ही उसे जिला मुख्यालय व गुजरात के अस्पतालों तक दौडऩा पड़ता है। खून की आवश्यकता के लिए झाड़ोल में तीन साल पहले खुला ब्लड बैंक उपकरणों के अभाव में एक दिन भी संचालित नहीं हो पाया। उस पर स्थापना के बाद से ताले लटके हुए हैं। ओगणा चिकित्सालय में पदस्थापित स्टाफ तो नीम हकीमों की दुकानें पनपा रहा है। वे मरीजों का उपचार करने के बजाय समीप की निजी क्लिनिकों पर भेजकर कमीशनखोरी कर रहे हैं।

सोनोग्राफी मशीन नहीं होने से जोखिम उठाने पर मजबूर महिलाएं

अस्पताल में प्रतिदिन 500 से अधिक रोगियों का आउटडोर होने के बावजूद संसाधनों व चिकित्सकों का अभाव है। वर्ष 2007 में ब्लड बैंक की स्थापना की गई लेकिन स्टोरेज सिस्टम नहीं होने से खून की कमी रहती है। इमरजेंसी के दौरान मरीज को उदयपुर लेकर भागना पड़ता है। वर्ष में 3 हजार से अधिक डिलीवरी केसेस आते हैं लेकिन जांच के लिए सोनोग्राफी मशीन नहीं है। डिलीवरी से पूर्व सफर नहीं करने की हिदायत के बावजूद महिलाओं को सोनोग्राफी के लिए जोखिम उठाना पड़ता है। स्त्रीरोग विशेषज्ञ का पदरिक्त है। आपात कालीन स्थिति में महिला चिकित्सक को बुलाया जाता है।

 

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चिकित्सक कहिन..
सोनोग्राफी मशीन नहीं होने के कारण महिलाओं को उदयपुर तक जाना पड़ता है। इसके लिए हमने अधिकारियों को अवगत करवा रखा है।
डॉ. मोहन मेनारिया, चिकित्साधिकारी


पर्याप्त चिकित्सक नहीं, नीम हकीम कूट रहे चांदी

अस्पताल में प्रतिदिन सवा सौ की ओपीडी होने के बावजूद पर्याप्त चिकित्सक नहीं हैं। कम्पाउंडर व नर्सिंग स्टाफ की मिलीभगत के चलते 7 से 8 निजी क्लिनिक व नीम-हकीम चांदी कूट रहे हैं। इस क्षेत्र के रोगी सौ किमी की दूर ईडर की निजी क्लिनिक में जाने को मजबूर हैं। सीएससी में प्रतिवर्ष करीब 800 से ज्यादा डिलीवरी केसेस आते हैं लेकिन स्त्रीरोग विशेषज्ञ व सोनोग्राफी मशीन की व्यवस्था नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को उदयपुर रैफर कर दिया जाता है।

 

चिकित्सक कहिन..
नीम हकीम यहां पर जरूर हैं, लेकिन जब तक ब्लॉक अधिकारी आदेश नहीं दें तब तक मैं कार्रवाई नहीं कर सकता हूं।
डॉ. मनीष चौधरी, चिकित्साधिकारी

 

ब्लड बैंक में उपकरणों का अभाव

झाड़ोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन साल पहले ब्लड बैंक स्थापित किया गया लेकिन उपकरण के अभाव में ताले लटके हैं। अन्य सुविधाओं का भी अभाव है। आपातकालीन स्थिति में लोग गुजरात या उदयपुर रैफर किए जाते हैं। ब्लॉक चिकित्साधिकारी धर्मेन्द्र गरासिया ने बताया कि ब्लड बैंक के लिए पर्याप्त उपकरण की मांग कर रखी है।

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