FLASHBACK 2017: स्मार्ट उदयपुर सालभर स्लो रही स्मार्ट वर्क की रफ्तार, पढ़ें सालभर शहर में हुए मिस मैनेजमेंट का ब्यौरा

FLASHBACK 2017: स्मार्ट उदयपुर सालभर स्लो रही स्मार्ट वर्क की रफ्तार, पढ़ें सालभर शहर में हुए मिस मैनेजमेंट का ब्यौरा

Mukesh Hingar | Publish: Dec, 30 2017 03:20:00 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर. स्मार्ट सिटी का स्मार्ट वर्क इतना स्लो रहा कि लोग एक ही सवाल करते आए स्मार्ट सिटी की असली पिक्चर कब दिखेगी।

उदयपुर . साल 2017 बीतने को है। देश की पहली 20 स्मार्ट सिटी में हमारा नाम आया लेकिन स्मार्ट सिटी का स्मार्ट वर्क इतना स्लो रहा कि लोग एक ही सवाल करते आए स्मार्ट सिटी की असली पिक्चर कब दिखेगी। स्मार्ट सिटी बोर्ड के चेयरमैन भी उदयपुर में जब समीक्षा बैठक ली तो बोले कि हैरिटेज के लिए इतनी बजट दे दिया लेकिन काम दिख नहीं रहा है, सिटी बसों को लेकर भी बातें बहुत हुई लेकिन साल निकलने को है और अभी तक सडक़ों पर सिटी बसें नहीं दौड़ी।

 

जाते-जाते पिछले छह महीने से सडक़ों को इस कदर से खोदा कि सडक़ पर चलना तो दूर घर से सडक़ पर आना मुश्किल हो गया है। यह अलग बात है कि सालों बाद सीवरेज लाइने डालने का महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है लेकिन इसका खमियाजा जनता महीनों तक भुगत यह कैसा मैनेजमेंट नगर निगम का रहा। निगम की तरह यूआईटी चेयरमैन भी सडक़ों को लेकर कागज चलाते रहे लेकिन नीचे इंजीनियरों ने देरी से सडक़ों की सुध ली। वर्ष 2017 में यूआईटी व नगर निगम की तिजोरी से शहर की सूरत सुधारने के लिए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हाथ में लिए गए लेकिन आज की तारीख में कई प्रोजेक्ट पाइप लाइन में है तो कुछ पूरे हो गए है।

 

काम तो बड़े लेकिन साल निकल गया ऐसे ही- आयड़ नदी की साफ-सफाई का अभियान में कई संस्थाएं व उद्यमी जुड़े लेकिन साफ हुई आयड़ पर अब एजेंसियों ने अपनी बारी आई तो ध्यान नहीं दिया, ऐसी ही स्थिति रही तो आयड़ पहले जैसी स्थिति में वापस आ जाएगी।

 

सीवरेज लाइन के लिए कॉलोनियों को खोद दिया लेकिन साथ-साथ के साथ सडक़ें ठीक नहीं की, कई जगह तो वैकल्पिक रास्ते तक नहीं दिए।
- जगह-जगह सडक़ों को खोदने वालों को आंख दिखाई लेकिन सडक़ें खोदने वालों को रोक नहीं सके। - गुलाबबाग और शहर के अन्य पार्कोँ की सूरत सुधारने पर समितियों में बड़े-बड़े वादे लेकिन ऑक्सीजन पॉकेट स्वयं संकट में।

- स्वरूपसागर पर चौपाटी बनाने की बातें हुई, फाइल चली लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।

- अवैध वाटिकाओं वालों पर लगाम लगाने को लेकर स ती दिखाई लेकिन सीजन में आंखों के सामने मांगलिक आयोजन हुए।

- स्ट्रीट लाइटों को लेकर पार्षदों की शिकायतों की भरमार रही, नई लाइटें खरीदनेे का काम नहीं हुआ।

- गुलाबबाग में महापौर व आयुक्त ने बच्चों की रेलगाड़ी से हादसों को देखते हुए राह रोकी तो गैरेज समिति ने उसे चला दी। नई ट्रेन को लेकर धरातल पर कुछ नहीं हुआ।

-सडक़ों और आशियाने पर यूआईटी का बजट
25 फरवरी : यूआईटी 282 करोड़ का बजट पेश किया। इसमें 32 करोड़ रुपए सडक़ों के नेटवर्क और 60 करोड़ रुपए आशियाने के सपने को साकार करने पर तय किया।

20 फरवरी : फतहसागर झील के सामने नीमजमाता मंदिर से देवाली छोर तक रोप-वे चलाने के प्रोजेक्ट के तहत यूआईटी का संबंधित फर्म से अनुबंध हुआ। इसके तहत रोपचे की ल बाई 384 मीटर होगी।

-यहां लोग अंडरपास से निकले, यूआईटी पुलिया पर दौड़े वाहन
20 मई : यूआईटी पुलिया का लोकार्पण किया गया, इस सडक़ पर वाहन दौडऩे लगे, फतहसागर ओवर लो होने के बाद इस सडक़ पर महीनों तक यातायात बाधित रहता था।

17 अगस्त : ठोकर से मादड़ी और कानपुर जाने वालों के लिए बड़ा दिन था। यूआईटी की ओर से बनाए मादड़ी अंडरपास का लोकार्पण हुआ, इससे अब छोटे वाहन हाइवे पार करने की बजाय सीधे नीचे से निकल जाते है।

28 सितंबर : थूर की पाल पर विकास कार्य का किया शिलान्यास, यूआईटी थूर की पाल पर घाट के साथ पार्क भी बनाएंगे।

प्रदेश का पहला नगर निगम ओडीएफ घोषित
17 फरवरी : शहरी सरकार उदयपुर नगर निगम ने अपना 359 करोड़ रुपए का बजट पारित किया। इसमें सबसे ज्यादा जोर आधारभूत विकास एवं स्वच्छता पर रहा।
3 अगस्त : केन्द्र सरकार ने उदयपुर को ओडीएफ घोषित कर दिया।

आयड़ को वेनिस तो नहीं बना सके पर चकाचक किया
2 अक्टूबर : आयड़ नदी को वेनिस बनाने का सपना तो पूरा नहीं हुआ लेकिन आयड़ नदी को साफ-सुथरा करने का अभियान शुरू किया गया।

29 नवंबर : आयड़ पुलिया की दो छत डाली, 10 मीटर चौड़ी पुलिया का काम तेजी से चल रहा है, पुलिया को फरवरी में शुरू करने की बात की जा रही है।

1 अप्रेल : टाउनहॉल में नगर निगम की बड़ी पार्किंग का शुभारंभ किया।
4 अगस्त : फतहसागर झील किनारे बनाई मेवाड़ दर्शन दीर्घा का लोकार्पण कर दिया।
पहले पासपोर्ट केन्द्र मिला, अब पूर्णकालिक दर्जा भी
2 जून : केन्द्रीय विदेश राज्यमंत्री वी.के. सिंह ने सुभाषनगर में उदयपुर के पासपोर्ट सेवा केन्द्र का लोकार्पण किया।

15 दिस बर : लेकसिटी का महाराणा प्रताप लघु पासपोर्ट केन्द्र ने लघु नहीं पूर्णकालिक पासपोर्ट केन्द्र का दर्जा प्राप्त कर लिया।

इस पॉकेट से ऑक्सीजन भी मिलेगा और मनोरंजन भी
27 फरवरी : पिछोला किनारे आई लव पार्क का लोकार्पण। रिंग रोड के पास यह पार्क खास आकर्षण का केन्द्र रहा।
23 दिसम्बर : पिछोला किनारे वन विभाग ने गोल्डन पार्क का लोकार्पण कराया।
रेलवे ने अपेक्षा से ज्यादा खोली पोटली
3 फरवरी : मावली-मारवाड़ आमान परिवतर्न के सर्वे व बड़ी सादड़ी-नीमच लाइन को भी मंजूरी केन्द्रीय रेल बजट में मिली। सबसे खास बात यह थी कि मावली-मारवाड़ लाइन मंजूर हो जाती है तो उदयपुर से जोधपुर व मारवाड़ सीधा कनेक्ट हो जाएगा।

28 जुलाई : उदयपुर-हरिद्धार एक्सप्रेस ट्रेन शुरू, उदयपुर में आयोजन कर इस ट्रेन को रवाना किया गया। झीलों के बदले मालिक

4 अप्रेल : फतहसागर झील जल संसाधन विभाग (सिंचाई) ने नगर विकास प्रन्यास (यूआईटी) को सौंप ही दी।

21 जुलाई : फतहसागर झील के संरक्षण को झील विकास प्राधिकरण ने स्वीकार कर लिया है।

पीडब्ल्यूडी का दफ्तर ले ही आए उदयपुर
14 जुलाई : इंडियन रोड कांग्रेस की 212 मिड टर्म काउसलिंग बैठक उदयपुर में हुई जिसमें कई बड़े मुद्दों पर मंथन हुआ, केन्द्रीय सडक़ एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी आए।

21 सितंबर : ल बे समय से उदयपुर शहर व ग्रामीण विधानसभा के कई गांवों के अधीन आने वाला पीडब्ल्यूडी कार्यालय उदयपुर शि ट होने का आदेश आया।

15 अगस्त : गुलाबबाग में बर्ड पार्क का काम शुरू हुआ। भूमि पूजन के साथ ही वहां पर तेज गति से काम चल रहा है।

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