नौजवां ऐसे जो खुद पहुंचते हैं ब्लड बैंक में रक्तदान करने

- महाराणा भूपाल हॉस्पिटल

- कम होने लगा है रक्त, लेकिन उपयोग भी कम

By: bhuvanesh pandya

Published: 08 Apr 2020, 02:32 PM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. ये जो रक्तदाता है, वह कुछ खास हैं, इसलिए कि लॉक डाउन के दौरान भी उन्होंने अपना जुनून नहीं छोड़ा, वह नियमित तय समय में रक्तदान करने से अब भी नहीं चूक रहे। 21 मार्च से अब तक प्रतिदिन करीब दस रक्तदाता फोन कर ब्लड बैंक पहुंचते हैं और रक्तदान करते हैं। ब्लड बैंक की ओर से उन्हें घर छोडऩे की व्यवस्था कर रखी है। बकायदा एम्बुलेंस उन्हें जरूरत पर घर तक छोड़ता है, हालांकि फिलहाल पहले के मुकाबले ब्लड बैंक में खून की भारी कमी है, क्योंकि सामूहिक रक्तदान शिविर नहीं लगा सकते हैं।

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ये है स्थिति स्टोरेज क्षमता- 2500 यूनिट उपलब्ध- 280 यूनिट सर्वाधिक- ओ पॉजिटिव सबसे कम- ए पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव, दोनों के नेगेटिव भी

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ब्लड बैंक तकनीकी प्रभारी मांगीलाल चौधरी ने बताया कि रोजाना कई रक्तदाता फोन करते हैं और यहां रक्तदान करते हैं, उन्हें हॉस्पिटल से घर भेजने की सुविधा रखी हुई है। कई लोगों ने शिविर करवाने की इच्छा जताई है, यदि प्रशासन तय सोशियल डिस्टेंसिंग को समझाते हुए स्वीकृति देता है तो रक्तदान शिविर आयोजित किया जा सकता है। उदयपुर में आरएनटी मेडिकल कॉलेज को छोड़ गीतांजली, पेसिफिक, अनन्ता, अमरीकन, सरल और लोकमित्र भी अपने ब्लड बैंक रखते है।

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वर्तमान में अपने बैंक में ये सुविधा भी है। प्लेटलेट: प्लेटलेट्स क्षतिग्रस्त ऊतकों को सही करते है। इसके साथ ही यह रक्तस्त्राव को रोकने का काम करते है। इस प्रक्रिया का वैज्ञानिक नाम होमियोस्टेसिस है। प्लेटलेट्स रक्त में मौजूद तत्व होते है, जो पानी रूपी द्रव और कोशिकाओ से बने होते है। इन कोशिकाओं में आँक्सीजन को ले जाने वाली लाल रक्त कोशिकाएं भी शामिल होती है। प्लेटलेट्स रक्त में मौजूद बेहद ही सूक्ष्म कण होते है। जिनको चिकित्सकीय जांच के दौरान देखा जा सकता है। शरीर पर चोट लगने के बाद रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स को संकेत मिलता है। जिससे वह चोट व रक्तस्त्राव वाले स्थान पर पहुंचकर रक्त को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर देते है।
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प्लाज्मा: रक्त के तरल हिस्से को प्लाज्मा कहते हैं, यह रंगहीन है। जिसमें 90 प्रतिशत पानी, प्रोटीन और अकार्बनिक लवण होते हैं। इसमें घुलनशील रूप में ग्लूकोज, एमिनो एसिड, वसा, यूरिया, हार्मोन, एंजाइम आदि जैसे कुछ कार्बनिक पदार्थ भी होते हैं। शरीर में यह इन घुलनशील पदार्थों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचाता है। प्लाज्मा के प्रोटीन में एंटीबॉडीज होते हैं जो बीमारियों और संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा प्रणाली में सहायता करते हैं। ये रक्त का लगभग 55 से 60 प्रतिशत भाग बनाता है। पानी के अतिरिक् त इसमें बाकी 8 से 10 प्रतिशत भाग में कई कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ मौजूद रहते हैं।सिंगल डोनर प्लेटलेट की भी सुविधा यहां उपलब्ध है।

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-वर्तमान में इतनी जरूरत वर्तमान में नियमित कुल करीब 30 से 35 यूनिट जा रहा है, जबकि आवक करीब 10 से 12 यूनिट है। थैलेसीमिया के मरीजों के लिए प्रतिदिन करीब दस यूनिट की जरूरत है।

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सुबह नौ से 12 बजे तक हम दो-दो लोगों को बुला रहे हैं, ताकि खून की बेहद कमी नहीं हो। प्रशासन ने पांच लोगों को एक साथ से ज्यादा बुलाने की अनुमति नहीं दी है, यदि कोई जरूरत पड़ती है तो तत्काल व्यवस्था करेंगे।

डॉ संजय प्रकाश, प्रभारी ब्लड बैंक, एमबी हॉस्पिटल उदयपुर

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