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एमपी में मिली सदियों पुरानी सुरंग, गुफा में बने रास्ते से निकलेगी छुपी धरोहर!

Ujjain Tunnel मध्यप्रदेश में सदियों पुरानी सुरंग मिली है। गुफा जैसे आकार में रास्ता निकला है जिससे कोई छुपी धरोहर सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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gufaujjain

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Ujjain Tunnel found between Jagoti Panchayat Bhawan and Ayurveda dispensary in Ujjain मध्यप्रदेश में सदियों पुरानी सुरंग मिली है। गुफा जैसे आकार में रास्ता निकला है जिससे कोई छुपी धरोहर सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। गुफा जैसा यह रास्ता उज्जैन Ujjain में निकला है। यहां खुदाई में निकले रास्ते को देख हर कोई हैरान रह गया। पुरातत्व अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर यह रास्ता देखा और इसके बाद रिपोर्ट बनाकर भोपाल भेजी। गुफा में बना यह रास्ता या सुरंग कहां तक जा रही है, शोधकर्ताओं द्वारा इस बात की वैज्ञानिक जांच की मांग की गई है।

इतिहासकार, पुरातत्व विद और शोधकर्ता डॉ. आरसी ठाकुर के अनुसार गुफा से निकला यह रास्ता करीब 300 साल पुराना है।
उन्होंने इसे पेशवा बाजीराव प्रथम के कार्यकाल से संबंधित बताया। अश्विनी शोध संस्थान के प्रमुख डॉ. आरसी ठाकुर ने मौके पर जाकर रास्ते की गहराई से जांच-पड़ताल की है। उनका यह भी कहना है कि गुफा के इस रास्ते का ऐतिहासिक महत्व है।

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उज्जैन में पुरातात्विक महत्व का यह रास्ता खुदाई के दौरान दिखाई दिया। एक चबूतरा बनाने के लिए की जा रही खुदाई के दौरान गुफा का सा आकार नजर आया। पास से देखने पर यहां से रास्ता नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि यह विशाल सुरंग है। पुरातात्त्विक नजरिए से महत्वपूर्ण यह सुरंग जगोटी पंचायत भवन और आयुर्वेद औषधालय के बीच मिली है।

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जैसे ही लोगों को यह सुरंग दिखी, तुरंत पुरातत्व विभाग को इसकी सूचना दी गई। विभागीय अधिकारियों ने मौके पर आकर यह गुफा जैसा रास्ता देखा जिसे लोग सुरंग बताते रहे। हालांकि अधिकारियों ने अभी कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है पर इसके महत्व को देखते हुए प्रतिवेदन भोपाल भेजा गया है। बताया जा रहा है कि सुरंग या गुफा के इस रास्ते की विस्तृत जांच की मांग की गई है।

इधर डॉ. आरसी ठाकुर बताते हैं कि पेशवा बाजीराव प्रथम ने 1734 में मालवा का बंटवारा कर होल्कर और सिंधिया राजवंश को दो-दो हिस्से व पंवार वंश को एक हिस्सा दिया था। गौतम बाई को महिदपुर और जगोटी भेंट किया गया था। इस गुफा जैसे रास्ते की वैज्ञानिक जांच से ऐतिहासिक, पुरातात्विक धरोहर को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।